Season 2, Episode 43 · Shiv Puran Katha in Hindi
शिवजी की अनुपम लीला | शिव पुराण - श्री रुद्र संहिता - अध्याय 43
9 Aug 2026 · 8 min
Season 2, Episode 43 · Shiv Puran Katha in Hindi
9 Aug 2026 · 8 min
शिव पुराण के तैंतालीसवें अध्याय में भगवान शिव की अद्भुत और रहस्यमयी लीला का वर्णन किया गया है। इस अध्याय में देवी मैना भगवान शिव के दर्शन की इच्छा प्रकट करती हैं। पहले वे देवताओं और भगवान विष्णु के दिव्य स्वरूप को देखकर उन्हें ही शिव समझ बैठती हैं। बाद में नारद मुनि उन्हें बताते हैं कि भगवान शिव तो समस्त ब्रह्मांड के स्वामी हैं। इसके बाद भगवान शिव अपने भूत-प्रेत, पिशाच और शिवगणों सहित ऐसे अद्भुत रूप में प्रकट होते हैं कि देवी मैना भयभीत होकर मूर्छित हो जाती हैं। यह प्रसंग भगवान शिव की अलौकिक लीला और अहंकार के नाश का गहरा संदेश देता है। यदि आप संपूर्ण शिव महापुराण सुनना चाहते हैं, तो इस…
by Stream Panther Network · Hindi · Devotional & Spiritual
शिव पुराण सभी पुराणों में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण व सबसे ज्यादा पढ़ी जाने वाली पुराणों में से एक है। भगवान शिव के विविध रूपों, अवतारों, ज्योतिर्लिंगों, भक्तों और भक्ति का विशद् वर्णन किया गया है।इसमें शिव के कल्याणकारी स्वरूप का तात्त्विक विवेचन, रहस्य, महिमा और उपासना का विस्तृत वर्णन है। शिव पुराण में शिव को पंचदेवों में प्रधान अनादि सिद्ध परमेश्वर के रूप में स्वीकार किया गया है। शिव-महिमा,…
S2 · E46 · 30 Aug 2026 · 6 min
शिव पुराण अध्याय 46 में भगवान शिव के सुंदर एवं दिव्य स्वरूप का वर्णन किया गया है। माता मैना भगवान शिव के मनोहर रूप को देखकर अत्यंत प्रसन्न होती हैं और उनकी आरती उतारती हैं। विवाह में उपस्थित देवता, ऋषि-मुनि, गंधर्व और अन्य जन भगवान शिव के दिव्य स्वरूप की प्रशंसा करते हैं। इसके बाद माता पार्वती कुलदेवी के पूजन के लिए अपनी सखियों और कुल की स्त्रियों के साथ बाहर आती हैं। उनके अनुपम सौंदर्य को देखकर सभी देवता नतमस्तक हो जाते हैं। स्वयं भगवान शिव भी माता पार्वती के सुंदर स्वरूप को देखकर हर्षित और मोहित हो जाते हैं। यह अध्याय शिव-पार्वती विवाह के मंगलमय प्रसंग को आगे बढ़ाता है।
S2 · E45 · 23 Aug 2026 · 6 min
शिव पुराण – श्री रुद्र संहिता अध्याय 45: शिव का सुंदर व दिव्य स्वरूप दर्शन इस अध्याय में माता मैना की शर्त स्वीकार करते हुए भगवान शिव अद्भुत, उत्तम और दिव्य सुंदर स्वरूप धारण करते हैं। उनका तेजस्वी और मनोहर रूप देखकर माता मैना अत्यंत प्रसन्न होती हैं और भगवान शिव की पूर्व में की गई निंदा के लिए उनसे क्षमा मांगती हैं। भगवान शिव के दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए हिमालय नगरी की स्त्रियां अपने सभी कार्य छोड़कर दौड़ी चली आती हैं। शिवजी के अलौकिक स्वरूप को देखकर सभी भगवान शिव और माता पार्वती की युगल जोड़ी की प्रशंसा करती हैं और पार्वती की कठोर तपस्या को धन्य मानती हैं। इसके बाद नगर की स्त्रियां…
S2 · E44 · 16 Aug 2026 · 13 min
शिव पुराण श्री रुद्र संहिता अध्याय 44 – मैना का विलाप एवं हठ इस अध्याय में देवी पार्वती की माता मैना भगवान शिव के भयंकर स्वरूप को देखकर अत्यंत व्याकुल हो जाती हैं और शिव-पार्वती विवाह का विरोध करती हैं। देवता, सप्तऋषि, नारदजी, शैलराज हिमालय और स्वयं माता पार्वती उन्हें भगवान शिव की वास्तविक महिमा समझाने का प्रयास करते हैं। अंततः श्रीहरि विष्णु मैना को भगवान शिव के निर्गुण-सगुण स्वरूप और उनकी दिव्य माया का ज्ञान कराते हैं। मैना का क्रोध शांत होने लगता है और वे एक शर्त रखती हैं—यदि महादेव सुंदर शरीर धारण करें, तो वे सहर्ष अपनी पुत्री पार्वती का विवाह उनसे कर देंगी। यह अध्याय भगवान शिव की दिव्य…
S2 · E42 · 2 Aug 2026 · 5 min
शिव पुराण के बयालीसवें अध्याय में भगवान शिव की दिव्य बारात का हिमालय नगरी में भव्य स्वागत और अभिनंदन वर्णित है। गिरिराज हिमालय स्वयं भगवान शिव और समस्त देवताओं का स्वागत करते हैं। देवताओं, ऋषि-मुनियों तथा बारातियों के सम्मान, भगवान शिव के दिव्य स्वरूप, विष्णु और ब्रह्मा की उपस्थिति तथा पार्वती विवाह की तैयारियों का अत्यंत सुंदर वर्णन इस अध्याय में मिलता है। यदि आप सम्पूर्ण शिव पुराण का श्रवण क्रमबद्ध रूप से करना चाहते हैं, तो इस श्रृंखला से अवश्य जुड़ें। 🙏 हर हर महादेव!
S2 · E41 · 26 Jul 2026 · 6 min
शिव पुराण के अध्याय 41 में विश्वकर्मा द्वारा निर्मित दिव्य विवाह मंडप का अद्भुत वर्णन मिलता है। नारद जी भगवान शिव को हिमालयपुरी के भव्य मंडप की जानकारी देते हैं, जहाँ देवताओं, ऋषियों और अनेक जीवों की इतनी जीवंत प्रतिमाएँ बनाई गई थीं कि सभी आश्चर्यचकित रह गए। इस अध्याय में देवताओं के मन में उत्पन्न भय, भगवान शिव का उन्हें दिया गया आश्वासन तथा शिव बारात के हिमालयपुरी पहुँचने का दिव्य प्रसंग वर्णित है। यदि आप शिव पुराण सम्पूर्ण , शिव-पार्वती विवाह कथा , महादेव की दिव्य लीलाएँ , और सनातन धर्म की पौराणिक कथाएँ सुनना चाहते हैं, तो इस श्रृंखला से अवश्य जुड़ें। 🙏 हर हर महादेव 🙏
S2 · E40 · 19 Jul 2026 · 6 min
भगवान शिव की बारात का हिमालयपुरी की ओर प्रस्थान, शिव पुराण के अध्याय 40 में भगवान शिव की दिव्य बारात के हिमालयपुरी की ओर प्रस्थान का अद्भुत वर्णन किया गया है। इस अध्याय में नंदी, वीरभद्र, भैरव, शिवगण, भगवान विष्णु, ब्रह्माजी, इंद्र, ऋषि-मुनि, गंधर्व, किन्नर तथा समस्त देवताओं के साथ भगवान शिव की अलौकिक बारात का भव्य दृश्य प्रस्तुत किया गया है। यदि आप शिव पुराण का सम्पूर्ण पाठ , भगवान शिव की कथाएँ , शिव-पार्वती विवाह , तथा सनातन धर्म के प्रामाणिक ग्रंथों का अध्ययन करना चाहते हैं, तो यह श्रृंखला आपके लिए है। 🙏 हर हर महादेव 🙏
S2 · E51 · 4 Oct 2026 · 5 min
शिव पुराण अध्याय 51 में देवी रति भगवान शिव से अपने पति कामदेव को पुनर्जीवित करने की करुण प्रार्थना करती हैं। देवी रति की प्रार्थना और स्तुति से प्रसन्न होकर भगवान शिव कामदेव को जीवनदान देते हैं। कामदेव पुनः पहले की भांति सुंदर और स्वस्थ रूप में प्रकट होते हैं। रति और कामदेव भगवान शिव की स्तुति करते हैं और कामदेव महादेव से अपने अपराध के लिए क्षमा मांगते हैं। भगवान शिव प्रसन्न होकर उन्हें आशीर्वाद प्रदान करते हैं। इस अध्याय में सुनिए रति की प्रार्थना, कामदेव का पुनर्जीवन, भगवान शिव का वरदान और शिव-पार्वती विवाह के बाद की पावन कथा।
S2 · E50 · 27 Sep 2026 · 6 min
श्री शिव पुराण के अध्याय 50 में भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के शेष मंगल कार्यों का वर्णन मिलता है। विवाह की विधियां पूर्ण होने के बाद भगवान शिव माता पार्वती की मांग में सिंदूर भरते हैं और शिव-पार्वती विवाह विधि-विधान से संपन्न होता है। इसके बाद सरस्वती, लक्ष्मी, सावित्री, गंगा, अरुंधती, अहिल्या, तुलसी सहित अनेक देवियां भगवान शिव और माता पार्वती के पास आती हैं और महादेव से हास्य-विनोद करती हैं। यह अध्याय शिव-पार्वती विवाह के आनंदमय और विनोदपूर्ण प्रसंग का सुंदर वर्णन प्रस्तुत करता है।
S2 · E49 · 25 Sep 2026 · 3 min
शिव पुराण के उनचासवें अध्याय (अध्याय 49) में शिव-पार्वती विवाह के दौरान घटित एक महत्वपूर्ण प्रसंग का वर्णन है। विवाह की विधियां पूरी करते समय ब्रह्माजी देवी पार्वती के दिव्य स्वरूप को देखकर मोहित हो जाते हैं। भगवान शिव उनके मन के भावों को जान लेते हैं और अत्यंत क्रोधित हो जाते हैं। देवताओं द्वारा भगवान शिव की स्तुति और क्षमा-प्रार्थना करने पर उनका क्रोध शांत होता है। इसी प्रसंग में बालखिल्य ऋषियों की उत्पत्ति और उनके गंधमादन पर्वत पर जाकर सूर्य भगवान की आराधना एवं तपस्या करने का वर्णन भी मिलता है। इस अध्याय में सुनिए: शिव-पार्वती विवाह, ब्रह्माजी का मोहित होना, भगवान शिव का क्रोध, देवताओं की…
S2 · E48 · 13 Sep 2026 · 6 min
श्री शिव पुराण अध्याय 48 में भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह के आरंभ, भगवान शिव के कुल-गोत्र के रहस्य, माता पार्वती के कन्यादान और शिव-पार्वती के पाणिग्रहण की मंगलमयी कथा का वर्णन है। विवाह की रस्मों के दौरान शैलराज हिमालय भगवान शिव से उनके कुल, गोत्र, प्रवर और वेद शाखा का परिचय पूछते हैं। भगवान शिव मौन रहते हैं। तब नारद जी बताते हैं कि भगवान शिव निर्गुण, निराकार, परमब्रह्म और परमेश्वर हैं। उनका गोत्र और कुल नाद है—शिव नादमय हैं और नाद शिवमय है। इसके बाद हिमालय और मैना अपनी पुत्री पार्वती का विधिपूर्वक कन्यादान करते हैं। भगवान सदाशिव माता पार्वती का पाणिग्रहण स्वीकार करते हैं और चारों ओर…