13 Dec 2025 · 2 min
🎙️ Episode 31– Shrimad Bhagavad Gita Chapter 1, Verses 36–37
श्लोक (Sanskrit): निहत्य धार्तराष्ट्रान्नः का प्रीतिः स्याज्जनार्दन। पापमेवाश्रयेदस्मान्हत्वैतानाततायिनः॥३६॥ तस्मान्नार्हा वयं हन्तुं धार्तराष्ट्रान्स्वबान्धवान्। स्वजनं हि कथं हत्वा सुखिनः स्याम माधव॥३७॥ --- भावार्थ (Hindi): अर्जुन ने कहा — हे जनार्दन! धृतराष्ट्र के पुत्रों को मारकर हमें कौन-सी प्रसन्नता प्राप्त होगी? इन आततायियों को मारने पर भी हमें पाप ही लगेगा। इसलिए हे माधव! अपने ही बंधु-बांधव धृतराष्ट्र के पुत्रों को मारना हमारे लिए उचित नहीं है। अपने ही स्वजनों का वध करके हम कैसे सुखी हो सकते हैं? --- Meaning (English): Arjuna said — O Janardana, what joy would we gain by killing the…






