Episode · आचार्य प्रशांत
शादी करी है, ईमान नहीं बेचा है || आचार्य प्रशांत (2026)
26 Sep 2026 · 33 min
Episode · आचार्य प्रशांत
26 Sep 2026 · 33 min
वीडियो जानकारी: 16.08.2026, संत सरिता, गोवा, Title: शादी करी है, ईमान नहीं बेचा है || आचार्य प्रशांत (2026), विवरण: इस संवाद में आचार्य प्रशांत से दिखावे की भूख, दूसरों से खुद को श्रेष्ठ साबित करने की चाह, जानवरों के प्रति मनुष्य के व्यवहार और रिश्तों में अपने मूल्यों को लेकर सवाल किए गए हैं। बातचीत शादी और परिवार तक भी जाती है, जहाँ केवल आकर्षण या सामाजिक पहचान के बजाय जीवनसाथी के विचारों, मूल्यों और मानसिकता को समझने की जरूरत पर चर्चा होती है। साथ ही, रिश्तों में शांति बनाए रखने और अपने मूल्यों से समझौता करने के बीच के अंतर को भी समझाया गया है।
by PrashantAdvait Foundation · Hindi · Devotional & Spiritual
आचार्य प्रशांत एक लेखक, वेदांत मर्मज्ञ, एवं प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। बेलगाम उपभोगतावाद, बढ़ती व्यापारिकता और आध्यात्मिकता के निरन्तर पतन के बीच, आचार्य प्रशांत 10,000 से अधिक वीडिओज़ के ज़रिए एक नायाब आध्यात्मिक क्रांति कर रहे हैं। आई.आई.टी. दिल्ली एवं आई.आई.एम अहमदाबाद के अलमनस आचार्य प
28 Sep 2026 · 14 min
वीडियो जानकारी: 21.06.24, गीता समागम, ग्रेटर नॉएडा, विवरण:- अगस्त 2026 में गर्मी का रिकॉर्ड टूट रहा है। लेकिन असली सवाल सिर्फ़ तापमान बढ़ने का नहीं है—अगर तापमान इसी तरह बदलता रहा, तो हमारी फसलें, बारिश और नदियाँ कितने समय तक बचेंगी? जलवायु में बदलाव कोई दूर की समस्या नहीं है। तापमान और नमी का संतुलन बिगड़ने से मानसून प्रभावित हो सकता है, फसलें संकट में पड़ सकती हैं और उन छोटी-छोटी प्रजातियों का अस्तित्व खतरे में आ सकता है जिन पर खेती टिकी हुई है। कुछ स्थानीय प्रजातियाँ एक बार मिट गईं, तो क्या वे वापस आ पाएँगी? और नदियों का क्या? ग्लेशियर लगातार सिकुड़ते रहे, तो आज बहती दिखाई दे रही धारा एक…
27 Sep 2026 · 23 min
Video Information: 21.11.2025, Bhagavad Gita (English), Chennai, Context:- A young woman asks Acharya Prashant about the need for female role models. The discussion explores why true greatness goes beyond gender and body identification. It then turns to ego and right company, examining why we sometimes push away what is valuable instead of changing ourselves.
27 Sep 2026 · 20 min
वीडियो जानकारी: 21.05.2024, बोध प्रत्यूषा, ग्रेटर नॉएडा, विवरण:- आप क्रिकेट, खिलाड़ियों और सेलिब्रिटीज़ को घंटों देखते हैं—लेकिन क्या वे आपकी ज़िंदगी के बारे में उतना ही सोचते हैं? आपके पास जो थोड़ा-बहुत खाली समय है, वह किसके नाम हो रहा है? क्रिकेट और सेलिब्रिटी संस्कृति हमारे समय, ध्यान और पैसे का बड़ा हिस्सा ले सकती है, जबकि पानी, जलवायु परिवर्तन, शिक्षा और पर्यावरण जैसे असली मुद्दे पीछे छूट जाते हैं। चर्चा सवाल उठाती है कि जिन लोगों को हम अपना आदर्श बना लेते हैं, क्या वे वास्तव में उन समस्याओं से जुड़े हैं जो हमारी ज़िंदगी को प्रभावित कर रही हैं?और सवाल सिर्फ़ मनोरंजन का नहीं है। जब…
26 Sep 2026 · 36 min
Video Information: 08.06.2026, Oxford University, UK, Title: Oxford QnA: Why Do We Fear The Truth? || Acharya Prashant, UK Tour (2026), Context:- Can technology, policy and science really solve the climate and ecological crisis if the human being who created the crisis remains unchanged? Acharya Prashant explores the deeper cause behind environmental destruction, excessive consumption and the idea of development through the lens of the Ishavasya Upanishad. He questions whether carbon capture, green technology and better policies can be sufficient when the same ego that creates pollution and…
26 Sep 2026 · 15 min
वीडियो जानकारी: 25.02.24, संत सरिता, ग्रेटर नॉएडा, विवरण:- बंगाल की खाड़ी में बना गहरा दबाव ओडिशा और आंध्र प्रदेश की ओर बढ़ रहा है। भारी बारिश, तेज़ हवाओं और बाढ़ का खतरा है। लेकिन अगर मौसम में ऐसी उथल-पुथल लगातार बढ़ती गई, तो क्या हमारे शहर, हमारी व्यवस्थाएँ और हमारी ज़िंदगी उसे झेल पाएँगी? जलवायु परिवर्तन सिर्फ़ गर्मी बढ़ने का नाम नहीं है। बढ़ती गर्मी का असर बारिश, तूफ़ानों, बिजली, यातायात, स्वास्थ्य और हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी तक पहुँच सकता है। कुछ जगहों पर पानी बढ़ेगा, कहीं गर्मी असहनीय होगी—और सबसे ज्यादा कीमत उन लोगों और जीवों को चुकानी पड़ सकती है जो पहले से सबसे कमजोर हैं। लेकिन…
25 Sep 2026 · 23 min
Video Information: 21.11.2025, Bhagavad Gita (English), Chennai, Context:- A young woman asks Acharya Prashant about the need for female role models. The discussion explores why true greatness goes beyond gender and body identification. It then turns to ego and right company, examining why we sometimes push away what is valuable instead of changing ourselves.
8 Oct 2026 · 1 hr 17 minNew
Video Information: 06.10.2026, Bhagavad Gita (English), Title: World Champion Girls Face Acharya Prashant in the Ring || Acharya Prashant (2026), Context: Acharya Prashant interacts with Asian Games and MMA champions Aarya Chaudhary and Rewa Bhadouriya, exploring competition, excellence, restlessness, self-discipline, and the deeper meaning of the right fight. He explains why the real opponent is not always outside us, but often the ego within, and why strength, dedication, and self-awareness are essential for living with excellence.
8 Oct 2026 · 30 minNew
वीडियो जानकारी: 24.02.2025, संत सरिता, ग्रेटर नोएडा, Title: खाने में इतना समय क्यों बर्बाद करते हो? || आचार्य प्रशांत, विवरण: जिसके जीवन में स्वाद नहीं होता, वह उसकी भरपाई ज़ुबान के स्वाद से करता है। जिनकी ज़िंदगी में असली आग होती है, उन्हें मिर्च वाली आग नहीं चाहिए। मैं स्त्री हूँ या पुरुष - यह बाद की बात है; पहले मैं इंसान हूँ। मेरी ज़िंदगी के छह घंटों की कोई कीमत है या नहीं? घर का खाना सस्ता सिर्फ इसलिए लगता है, क्योंकि उसमें लेबर की कीमत नहीं जोड़ी जाती। एक जी रहा है खाने के लिए, और दूसरी जी रही है बनाने के लिए। जो चीज़ विज्ञान के दायरे में आती है, उसका उत्तर विज्ञान से लो - बाबा जी से…
7 Oct 2026 · 29 minNew
Video Information: 06.04.2026, Mussoorie International School (MIS), Title: School Kids Grill Acharya Prashant || Mussoorie International School (2026), Context: Acharya Prashant explores fundamental questions about identity, self-inquiry, philosophy, perception, and the ego. He explains why our names, roles, achievements, and social identities may not define who we truly are, and why genuine inquiry begins by questioning these identities.
7 Oct 2026 · 21 minNew
Title: महिलाओं के विरुद्ध हिंसा क्यों नहीं रुक रही? || आचार्य प्रशांत विवरण: हर जघन्य घटना के बाद आक्रोश होता है, विरोध प्रदर्शन होते हैं और कठोर सजा की माँग उठती है। लेकिन कुछ समय बाद वैसी ही दूसरी घटना सामने आ जाती है। आखिर महिलाओं के विरुद्ध हिंसा क्यों नहीं रुक रही?क्या इसका कारण केवल कमजोर कानून-व्यवस्था है, या इसकी जड़ हमारे घरों, रिश्तों, मनोरंजन और सामाजिक मान्यताओं में छिपी है? महिलाओं को स्वतंत्र मनुष्य के बजाय उपभोग की वस्तु मानने वाली मानसिकता कैसे बदल सकती है? आचार्य प्रशांत समझाते हैं कि केवल अपराधियों को सजा देने या महिलाओं पर और पाबंदियाँ लगाने से समस्या समाप्त नहीं होगी।…