आचार्य प्रशांत एक लेखक, वेदांत मर्मज्ञ, एवं प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। बेलगाम उपभोगतावाद, बढ़ती व्यापारिकता और आध्यात्मिकता के निरन्तर पतन के बीच, आचार्य प्रशांत 10,000 से अधिक वीडिओज़ के ज़रिए एक नायाब आध्यात्मिक क्रांति कर रहे हैं। आई.आई.टी. दिल्ली एवं आई.आई.एम अहमदाबाद के अलमनस आचार्य प
Video Information: 06.04.2026, Mussoorie International School (MIS), Title: School Kids Grill Acharya Prashant || Mussoorie International School (2026), Context: Acharya Prashant explores fundamental questions about identity, self-inquiry, philosophy, perception, and the ego. He explains why our names, roles, achievements, and social identities may not define who we truly are, and why genuine inquiry begins by questioning these identities.
Title: महिलाओं के विरुद्ध हिंसा क्यों नहीं रुक रही? || आचार्य प्रशांत विवरण: हर जघन्य घटना के बाद आक्रोश होता है, विरोध प्रदर्शन होते हैं और कठोर सजा की माँग उठती है। लेकिन कुछ समय बाद वैसी ही दूसरी घटना सामने आ जाती है। आखिर महिलाओं के विरुद्ध हिंसा क्यों नहीं रुक रही?क्या इसका कारण केवल कमजोर कानून-व्यवस्था है, या इसकी जड़ हमारे घरों, रिश्तों, मनोरंजन और सामाजिक मान्यताओं में छिपी है? महिलाओं को स्वतंत्र मनुष्य के बजाय उपभोग की वस्तु मानने वाली मानसिकता कैसे बदल सकती है? आचार्य प्रशांत समझाते हैं कि केवल अपराधियों को सजा देने या महिलाओं पर और पाबंदियाँ लगाने से समस्या समाप्त नहीं होगी।…
वीडियो जानकारी: 03.10.2026, बोध प्रत्युषा सत्र, Title: धर्म के रास्ते के तीन पुराने खतरे और एक चौथा नया विकल्प || आचार्य प्रशांत (2026), विवरण: इस संवाद में आचार्य प्रशांत बताते हैं कि किसी एक परंपरा से चिपक जाना, सभी परंपराओं को बिना समझे अपनाना या सभी परंपराओं को ही नकार देना - तीनों ही तरीकों में समझ का अभाव रह सकता है। वे बताते हैं कि अलग-अलग परंपराओं और दर्शनों के पीछे छिपी मूल बात को समझने के लिए एक सही फ्रेमवर्क की आवश्यकता है। आचार्य जी यह भी समझाते हैं कि “विचारों से परे हो जाओ” का अर्थ विचारों को जबरन रोकना या निर्विचार अवस्था में पहुँचना नहीं है। असली प्रश्न यह है कि विचार किसके…
वीडियो जानकारी: 08.09.24, संत सरिता, गोवा, विवरण:- बंगाल की खाड़ी में तूफ़ान का खतरा बढ़ रहा है। लेकिन क्या यह सिर्फ़ एक तूफ़ान की खबर है—या उस जलवायु संकट की झलक, जिसका असर हमारी खेती, अर्थव्यवस्था और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर पड़ सकता है? जलवायु परिवर्तन केवल तापमान बढ़ने का नाम नहीं है। बदलता मौसम, समुद्र का गर्म होना, बर्फ का पिघलना और पेड़ों का नष्ट होना ऐसे चक्रों को जन्म दे सकते हैं जो एक-दूसरे को और तेज़ करते जाएँ। और इसका असर वहीं सबसे ज्यादा पड़ सकता है जहाँ खेती, गरीब आबादी और समुद्र के किनारे बसे क्षेत्र एक साथ मौजूद हैं। लेकिन इस संकट के पीछे सिर्फ़ तकनीक या मौसम नहीं है। चर्चा उस…
Video Information: 11.04.2026, Bhagavad Gita (English), VNIT Nagpur, Title: (Gita 31) Krishna Speaks to India’s Asian Games Medalists || Acharya Prashant (2026), Context: In this session Acharya Prashant explains how the ego traps us in false choices, making us believe that we must either compromise or suffer. Through everyday examples, he explores how fear, attachment, and conditioning hide better alternatives. The discussion highlights how desireless action, courage, and freedom from ego make a joyful and meaningful life possible.
वीडियो जानकारी: 26.03.2025, गीता समागम, ग्रेटर नोएडा, विवरण:- क्या चीज़ इंसान को मशीन से अलग बनाती है? अगर एआई आपकी भाषा, व्यवहार, भावनाएँ और यहाँ तक कि आपके रिश्तों की भी नकल कर सकता है, तो फिर इंसान में ऐसा क्या है जिसकी नकल नहीं की जा सकती? चर्चा की शुरुआत एक सरल सवाल से होती है—क्या एआई चेतन हो सकता है? लेकिन चेतना को परिभाषित करना ही मुश्किल हो जाता है। अगर चेतना के प्रमाण व्यवहार, प्रतिक्रिया और दिखाई देने वाले लक्षण हैं, तो एआई इनमें से बहुत कुछ पहले ही प्रदर्शित कर सकता है। इसके बाद सवाल एआई से हटकर हमारी अपनी ज़िंदगी पर आ जाता है। अगर एआई हमारे काम, व्यक्तित्व, रिश्तों और व्यवहार के…
Video Information: 19.02.23, IIT-Guwahati, Title: Can an AI Replace a Guru? || Acharya Prashant, Context: - In this video Acharya Ji explains why answering a spiritual question is not the same as understanding the person asking it. He contrasts programmed responses with a teacher’s ability to respond to the questioner’s condition. The excerpt moves toward a deeper challenge to the very need for many of our questions.
वीडियो जानकारी: 12.04.2025, ग्रेटर नोएडा, विवरण:- इंडोनेशिया के जंगल जल रहे हैं, धुआँ सीमाओं के पार पहुँच रहा है। लेकिन क्या जंगल की आग ही संकट है—या उसके पीछे हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी और विकास की पूरी व्यवस्था भी जुड़ी हुई है? जलवायु परिवर्तन का खतरा धीरे-धीरे बढ़ता है, इसलिए अक्सर दिखाई ही नहीं देता। बदलता तापमान मानसून, खेती और पानी को प्रभावित कर सकता है। जंगल कटते हैं, कार्बन बढ़ता है और एक ऐसा चक्र बनता जाता है जिसे रोकना आसान नहीं। यह चर्चा मांसाहार, वनों की कटाई, पशुपालन और विकास के उस मॉडल तक जाती है जिसमें आज का लाभ दिखाई देता है, लेकिन भविष्य की आर्थिक और मानवीय कीमत अक्सर दिखाई…
वीडियो जानकारी: 04.11.25, गीता समागम, कोलकाता, विवरण:- प्रोटीन चाहिए तो क्या मांस खाना जरूरी है? जब पौधों में भी जीवन है, तो फिर पशुओं को खाने पर सवाल क्यों उठाया जाए? यह चर्चा सिर्फ़ मांस और प्रोटीन तक सीमित नहीं रहती। सामने सवाल आता है—जहाँ हमारे पास चुनाव है, वहाँ हम किस आधार पर चुनते हैं? और क्या किसी अज्ञात संभावना का सहारा लेकर उस पीड़ा को नज़रअंदाज़ किया जा सकता है जो हमारे सामने स्पष्ट दिखाई दे रही है? बात यहीं से दुख, करुणा और सही चुनाव तक पहुँचती है। अगर अपने दुख से मुक्ति चाहिए, तो क्या दूसरे के दुख को अलग मानकर हम सचमुच अपने दुख से मुक्त हो सकते हैं? और क्या सही चुनाव वही है जो…
Video Information: 02.06.2026, Interview with PETA International President Poorva Joshipura, London, UK, Title: Acharya Prashant with PETA International President Poorva Joshipura || London, UK Tour (2026), Context: In this conversation with PETA International President Poorva Joshipura, Acharya Prashant explores the psychological roots of animal exploitation and how ego, culture, tradition, and personal choices justify violence. The discussion connects animal exploitation with consumerism, environmental destruction, and human conditioning, highlighting why self-observation and…
वीडियो जानकारी: 18.10.2025, ग्रेटर नोएडा, विवरण:- बिहार बार-बार बाढ़ में डूबता है, लेकिन क्या असली समस्या सिर्फ़ बाढ़ है? जब लाखों लोग खेती पर निर्भर हों, शिक्षा, रोजगार, बिजली और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएँ पीछे हों, तब चुनाव के मुद्दे क्या होने चाहिए? और क्यों बिहार की असली समस्याएँ अक्सर सत्ता और चुनावी तमाशे के पीछे छूट जाती हैं? यह चर्चा एक और सवाल उठाती है—क्या किसी राज्य की बाहरी स्थिति बदल सकती है, बिना उसके भीतर की सोच बदले?
वीडियो जानकारी: 28.12.2025, संत सरिता सत्र, बेंगलुरु, Title: पैसा और जूता - दुनिया का खेल कैसे खेलें? || आचार्य प्रशांत (2025), विवरण: इस संवाद में आचार्य प्रशांत समझाते हैं कि सच को जानना ही काफ़ी नहीं, उसके लिए ईमानदारी और साहस भी चाहिए। दूसरों की स्वीकृति पाने के लिए अपने सिद्धांतों से समझौता करने के बजाय, सच के साथ दृढ़ता से खड़े होना और समाज में सक्रिय भूमिका निभाना ज़रूरी है।
Video Information: 28.09.2024, VBC, Greater Noida, Title: Gandhi: Assassinated daily, yet Immortal || Acharya Prashant, Context: Why was Gandhi ji assassinated? Why people abuse and defame Gandhi ji? Was Gandhi ji a shrewd politician or a philosopher, a leader? What was Gandhi ji's philosophy? Every year, Gandhi Ji is remembered as a great person on his birthday around the world, but why is he being abused in our own country?
वीडियो जानकारी: 13.09.2026, वेदान्त संहिता, गोवा, विवरण:- जब हमारे सामने कोई इंसान मरता है तो हमें दुख होता है। लेकिन वही दुख किसी बहुत दूर की आपदा या किसी सूक्ष्म जीव की मृत्यु को देखकर उतना क्यों नहीं होता? क्या दुख की तीव्रता सच में इस बात पर निर्भर करती है कि कोई कितना पास है? नेपाल की बाढ़ से लेकर हमारे पैरों तले कुचले जाने वाले छोटे जीव तक, यह चर्चा हमारे दुख और करुणा को देखने का एक अलग तरीका सामने रखती है। आखिर हिंसा केवल किसी के मरने में है, या उसके पीछे कुछ और भी है? हम अक्सर हिंसा और अहिंसा को दिखाई देने वाले कर्मों से जोड़ देते हैं—किसी को बचाना, किसी को मारना, किसी जीव को बचा…
Video Information: 01.11.2025, IIT - Kharagpur, Title: How to Build Good Communication Skills? || Acharya Prashant (2025), Context: Acharya Prashant explains how fear and insecurity make us impatient in conversations. He also discusses why we should question our instincts and emotions rather than blindly follow them.
Video Information: 03.07.2026, Interview with PETA President Mimi Bekhechi, London, UK, Title: Acharya Prashant with PETA Foundation President Mimi Bekhechi || London, UK Tour (2026), Context: What makes human beings violent towards animals? In this conversation with PETA President Mimi Bekhechi, Acharya Prashant explores the deeper psychological roots of animal exploitation, compassion, conditioning and the human ego. The discussion questions whether compassion needs to be taught or whether violence is something that gets taught and reinforced through society. Acharya Prashant explains how…
वीडियो जानकारी: 23.07.2021, ग्रेटर नोएडा, विवरण:- हम अपने खाने को सही ठहराने के लिए कितनी आसानी से तर्क ढूँढ लेते हैं? अंडा वेज है क्योंकि उससे चूजा नहीं निकलता, मांस खाने से विकास हुआ है, और मांसाहारी लोग नोबेल जीतते हैं—लेकिन क्या इन बातों को जोड़कर निकाला गया निष्कर्ष भी सही है? अंडे के पीछे मुर्गी के साथ होने वाली क्रूरता से लेकर मांस के लिए खर्च होने वाले अनाज और पानी तक, चर्चा उन तर्कों की परतें खोलती है जिनसे हम मांसाहार को सही साबित करते हैं। फिर सवाल आता है कि क्या मांस खाने और पश्चिमी देशों के विकास या नोबेल पुरस्कारों के बीच सचमुच कोई कारण-सम्बंध है? क्योंकि दो चीज़ें एक साथ दिखाई…
वीडियो जानकारी: 27.12.2025, भगवद् गीता सत्र, बेंगलुरु, Title: खुलकर घूमें या पैसे बचाएँ? || आचार्य प्रशांत (2025), विवरण: इस संवाद में आचार्य प्रशांत से Gen Z के ट्रैवल के लिए लोन लेने और सुबह 5 बजे उठकर अनुशासित दिनचर्या अपनाने को लेकर सवाल किए गए हैं। चर्चा में समझाया गया है कि न यात्रा करना अपने आप में अच्छा या बुरा है, न ही किसी तय रूटीन को अपनाना सफलता की गारंटी है। असली सवाल यह है कि हम जो कर रहे हैं, उसके पीछे हमारी सोच और उद्देश्य क्या है। बिना अपनी दिशा और जीवन के उद्देश्य को समझे, केवल बाहरी बदलावों और अनुशासन से वास्तविक बदलाव नहीं आता।
Video Information: 01.11.2025, IIT Kharagpur, Title : Who Sold You the Dream Job and Fat Package? || Acharya Prashant, IIT Kharagpur (2025), Context:- Acharya Prashant explores the hidden authority behind words like “must,” “supposed to,” “normal,” and “settle down.” He explains how these seemingly ordinary ideas can quietly dictate our education, career choices, relationships, and entire way of living. The discussion challenges students to question the unseen assumptions they carry and to examine whether their decisions come from love and openness or from fear and conformity.He also…
वीडियो जानकारी: 14.06.24, बातचीत सत्र, ग्रेटर नॉएडा, विवरण:- ब्रिक्स सम्मेलन में विदेशी मेहमानों के लिए शाकाहारी भोजन पर बहस छिड़ी है। लेकिन क्या हमारी थाली में क्या है, यह सिर्फ़ हमारी निजी पसंद का मामला है—या इसका असर उस पृथ्वी पर भी पड़ता है जिस पर हम सब निर्भर हैं? मांसाहार को अक्सर स्वाद, संस्कृति या व्यक्तिगत पसंद से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन अगर हमारे भोजन का संबंध जंगलों, खेती, जानवरों और जलवायु संकट से हो, तो क्या “मेरी मर्ज़ी, मैं कुछ भी खाऊँ” कहकर बात खत्म की जा सकती है? यह चर्चा भोजन से आगे जाकर उस सोच पर सवाल उठाती है जिसमें खाने को केवल निजी मामला माना जाता है। जब खेती का बड़ा…
Video Information: 06.04.2026, Mussoorie International School, Dehradun, Title: Sir, Why Do I Have To Look Pretty? || Acharya Prashant (2026), Context: In this conversation, Acharya Prashant explains how our dependence on others’ opinions comes from not knowing ourselves deeply. When we are clear about who we are, other people’s judgments have much less power over us. The discussion also explores education, parental expectations, exam pressure, and the stress around marks. Acharya Prashant explains that we cannot control the final result, but we can control our intent, effort, and actions.
वीडियो जानकारी: 21.06.24, गीता समागम, ग्रेटर नॉएडा, विवरण:- अगस्त 2026 में गर्मी का रिकॉर्ड टूट रहा है। लेकिन असली सवाल सिर्फ़ तापमान बढ़ने का नहीं है—अगर तापमान इसी तरह बदलता रहा, तो हमारी फसलें, बारिश और नदियाँ कितने समय तक बचेंगी? जलवायु में बदलाव कोई दूर की समस्या नहीं है। तापमान और नमी का संतुलन बिगड़ने से मानसून प्रभावित हो सकता है, फसलें संकट में पड़ सकती हैं और उन छोटी-छोटी प्रजातियों का अस्तित्व खतरे में आ सकता है जिन पर खेती टिकी हुई है। कुछ स्थानीय प्रजातियाँ एक बार मिट गईं, तो क्या वे वापस आ पाएँगी? और नदियों का क्या? ग्लेशियर लगातार सिकुड़ते रहे, तो आज बहती दिखाई दे रही धारा एक…
Video Information: 21.11.2025, Bhagavad Gita (English), Chennai, Context:- A young woman asks Acharya Prashant about the need for female role models. The discussion explores why true greatness goes beyond gender and body identification. It then turns to ego and right company, examining why we sometimes push away what is valuable instead of changing ourselves.
वीडियो जानकारी: 21.05.2024, बोध प्रत्यूषा, ग्रेटर नॉएडा, विवरण:- आप क्रिकेट, खिलाड़ियों और सेलिब्रिटीज़ को घंटों देखते हैं—लेकिन क्या वे आपकी ज़िंदगी के बारे में उतना ही सोचते हैं? आपके पास जो थोड़ा-बहुत खाली समय है, वह किसके नाम हो रहा है? क्रिकेट और सेलिब्रिटी संस्कृति हमारे समय, ध्यान और पैसे का बड़ा हिस्सा ले सकती है, जबकि पानी, जलवायु परिवर्तन, शिक्षा और पर्यावरण जैसे असली मुद्दे पीछे छूट जाते हैं। चर्चा सवाल उठाती है कि जिन लोगों को हम अपना आदर्श बना लेते हैं, क्या वे वास्तव में उन समस्याओं से जुड़े हैं जो हमारी ज़िंदगी को प्रभावित कर रही हैं?और सवाल सिर्फ़ मनोरंजन का नहीं है। जब…
वीडियो जानकारी: 16.08.2026, संत सरिता, गोवा, Title: शादी करी है, ईमान नहीं बेचा है || आचार्य प्रशांत (2026), विवरण: इस संवाद में आचार्य प्रशांत से दिखावे की भूख, दूसरों से खुद को श्रेष्ठ साबित करने की चाह, जानवरों के प्रति मनुष्य के व्यवहार और रिश्तों में अपने मूल्यों को लेकर सवाल किए गए हैं। बातचीत शादी और परिवार तक भी जाती है, जहाँ केवल आकर्षण या सामाजिक पहचान के बजाय जीवनसाथी के विचारों, मूल्यों और मानसिकता को समझने की जरूरत पर चर्चा होती है। साथ ही, रिश्तों में शांति बनाए रखने और अपने मूल्यों से समझौता करने के बीच के अंतर को भी समझाया गया है।
Video Information: 08.06.2026, Oxford University, UK, Title: Oxford QnA: Why Do We Fear The Truth? || Acharya Prashant, UK Tour (2026), Context:- Can technology, policy and science really solve the climate and ecological crisis if the human being who created the crisis remains unchanged? Acharya Prashant explores the deeper cause behind environmental destruction, excessive consumption and the idea of development through the lens of the Ishavasya Upanishad. He questions whether carbon capture, green technology and better policies can be sufficient when the same ego that creates pollution and…
वीडियो जानकारी: 25.02.24, संत सरिता, ग्रेटर नॉएडा, विवरण:- बंगाल की खाड़ी में बना गहरा दबाव ओडिशा और आंध्र प्रदेश की ओर बढ़ रहा है। भारी बारिश, तेज़ हवाओं और बाढ़ का खतरा है। लेकिन अगर मौसम में ऐसी उथल-पुथल लगातार बढ़ती गई, तो क्या हमारे शहर, हमारी व्यवस्थाएँ और हमारी ज़िंदगी उसे झेल पाएँगी? जलवायु परिवर्तन सिर्फ़ गर्मी बढ़ने का नाम नहीं है। बढ़ती गर्मी का असर बारिश, तूफ़ानों, बिजली, यातायात, स्वास्थ्य और हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी तक पहुँच सकता है। कुछ जगहों पर पानी बढ़ेगा, कहीं गर्मी असहनीय होगी—और सबसे ज्यादा कीमत उन लोगों और जीवों को चुकानी पड़ सकती है जो पहले से सबसे कमजोर हैं। लेकिन…
Video Information: 21.11.2025, Bhagavad Gita (English), Chennai, Context:- A young woman asks Acharya Prashant about the need for female role models. The discussion explores why true greatness goes beyond gender and body identification. It then turns to ego and right company, examining why we sometimes push away what is valuable instead of changing ourselves.
Video Information: 3rd Myth Demolition Tour, 28.2.16, Rishikesh, India, Title: Why do Hindus worship idols? || Acharya Prashant, Context: - In this video, Acharya Ji explains the deeper meaning of idol worship in Hinduism. He shows how Hindu thought sees the entire creation as an expression of the Divine. He distinguishes worshipping one limited form as God from seeing divinity in every form. True worship, he explains, is not attachment to an idol but reverence for the limitless through all forms.
वीडियो जानकारी: 21.06.24, गीता समागम, ग्रेटर नॉएडा, विवरण:- मुंबई जैसे तटीय शहरों पर समुद्र का बढ़ता स्तर खतरा बन रहा है, लेकिन उसी समय हम तेज़ GDP growth, ज्यादा urbanisation और बढ़ते consumption को विकास मानकर आगे बढ़ रहे हैं। क्या हम एक ही समय में दो ऐसी दिशाओं में जा रहे हैं जो एक-दूसरे के बिल्कुल खिलाफ हैं? अगर GDP बढ़ रही है, लेकिन उसके साथ प्रदूषण, असमानता और climate crisis भी बढ़ रहे हैं, तो इस growth का फायदा आखिर किसे मिल रहा है? और जिस climate पर हमारी अर्थव्यवस्था और जीवन निर्भर हैं, अगर वही अस्थिर हो जाए तो GDP के ये बड़े-बड़े आंकड़े कितने मायने रखेंगे? सवाल सिर्फ़ EV, smart…
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आचार्य प्रशांत एक लेखक, वेदांत मर्मज्ञ, एवं प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। बेलगाम उपभोगतावाद, बढ़ती व्यापारिकता और आध्यात्मिकता के निरन्तर पतन के बीच, आचार्य प्रशांत 10,000 से अधिक वीडिओज़ के ज़रिए एक नायाब आध्यात्मिक क्रांति कर रहे हैं। आई.आई.टी. दिल्ली एवं आई.आई.एम अहमदाबाद के अलमनस आचार्य प्रशांत, एक पूर्व सिविल सेवा अधिकारी भी रह चुके हैं। अधिक जानकारी हेतु: https://acharyaprashant.org/
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