Episode · आचार्य प्रशांत
“अंडा तो शाकाहारी है, क्यों न खाऊँ” – क्या तर्क है! || आचार्य प्रशांत
30 Sep 2026 · 8 min
Episode · आचार्य प्रशांत
30 Sep 2026 · 8 min
वीडियो जानकारी: 23.07.2021, ग्रेटर नोएडा, विवरण:- हम अपने खाने को सही ठहराने के लिए कितनी आसानी से तर्क ढूँढ लेते हैं? अंडा वेज है क्योंकि उससे चूजा नहीं निकलता, मांस खाने से विकास हुआ है, और मांसाहारी लोग नोबेल जीतते हैं—लेकिन क्या इन बातों को जोड़कर निकाला गया निष्कर्ष भी सही है? अंडे के पीछे मुर्गी के साथ होने वाली क्रूरता से लेकर मांस के लिए खर्च होने वाले अनाज और पानी तक, चर्चा उन तर्कों की परतें खोलती है जिनसे हम मांसाहार को सही साबित करते हैं। फिर सवाल आता है कि क्या मांस खाने और पश्चिमी देशों के विकास या नोबेल पुरस्कारों के बीच सचमुच कोई कारण-सम्बंध है? क्योंकि दो चीज़ें एक साथ दिखाई…
by PrashantAdvait Foundation · Hindi · Devotional & Spiritual
आचार्य प्रशांत एक लेखक, वेदांत मर्मज्ञ, एवं प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन के संस्थापक हैं। बेलगाम उपभोगतावाद, बढ़ती व्यापारिकता और आध्यात्मिकता के निरन्तर पतन के बीच, आचार्य प्रशांत 10,000 से अधिक वीडिओज़ के ज़रिए एक नायाब आध्यात्मिक क्रांति कर रहे हैं। आई.आई.टी. दिल्ली एवं आई.आई.एम अहमदाबाद के अलमनस आचार्य प
1 Oct 2026 · 10 min
वीडियो जानकारी: 13.09.2026, वेदान्त संहिता, गोवा, विवरण:- जब हमारे सामने कोई इंसान मरता है तो हमें दुख होता है। लेकिन वही दुख किसी बहुत दूर की आपदा या किसी सूक्ष्म जीव की मृत्यु को देखकर उतना क्यों नहीं होता? क्या दुख की तीव्रता सच में इस बात पर निर्भर करती है कि कोई कितना पास है? नेपाल की बाढ़ से लेकर हमारे पैरों तले कुचले जाने वाले छोटे जीव तक, यह चर्चा हमारे दुख और करुणा को देखने का एक अलग तरीका सामने रखती है। आखिर हिंसा केवल किसी के मरने में है, या उसके पीछे कुछ और भी है? हम अक्सर हिंसा और अहिंसा को दिखाई देने वाले कर्मों से जोड़ देते हैं—किसी को बचाना, किसी को मारना, किसी जीव को बचा…
30 Sep 2026 · 19 min
Video Information: 01.11.2025, IIT - Kharagpur, Title: How to Build Good Communication Skills? || Acharya Prashant (2025), Context: Acharya Prashant explains how fear and insecurity make us impatient in conversations. He also discusses why we should question our instincts and emotions rather than blindly follow them.
30 Sep 2026 · 1 hr 40 min
Video Information: 03.07.2026, Interview with PETA President Mimi Bekhechi, London, UK, Title: Acharya Prashant with PETA Foundation President Mimi Bekhechi || London, UK Tour (2026), Context: What makes human beings violent towards animals? In this conversation with PETA President Mimi Bekhechi, Acharya Prashant explores the deeper psychological roots of animal exploitation, compassion, conditioning and the human ego. The discussion questions whether compassion needs to be taught or whether violence is something that gets taught and reinforced through society. Acharya Prashant explains how…
29 Sep 2026 · 33 min
वीडियो जानकारी: 27.12.2025, भगवद् गीता सत्र, बेंगलुरु, Title: खुलकर घूमें या पैसे बचाएँ? || आचार्य प्रशांत (2025), विवरण: इस संवाद में आचार्य प्रशांत से Gen Z के ट्रैवल के लिए लोन लेने और सुबह 5 बजे उठकर अनुशासित दिनचर्या अपनाने को लेकर सवाल किए गए हैं। चर्चा में समझाया गया है कि न यात्रा करना अपने आप में अच्छा या बुरा है, न ही किसी तय रूटीन को अपनाना सफलता की गारंटी है। असली सवाल यह है कि हम जो कर रहे हैं, उसके पीछे हमारी सोच और उद्देश्य क्या है। बिना अपनी दिशा और जीवन के उद्देश्य को समझे, केवल बाहरी बदलावों और अनुशासन से वास्तविक बदलाव नहीं आता।
29 Sep 2026 · 35 min
Video Information: 01.11.2025, IIT Kharagpur, Title : Who Sold You the Dream Job and Fat Package? || Acharya Prashant, IIT Kharagpur (2025), Context:- Acharya Prashant explores the hidden authority behind words like “must,” “supposed to,” “normal,” and “settle down.” He explains how these seemingly ordinary ideas can quietly dictate our education, career choices, relationships, and entire way of living. The discussion challenges students to question the unseen assumptions they carry and to examine whether their decisions come from love and openness or from fear and conformity.He also…
29 Sep 2026 · 15 min
वीडियो जानकारी: 14.06.24, बातचीत सत्र, ग्रेटर नॉएडा, विवरण:- ब्रिक्स सम्मेलन में विदेशी मेहमानों के लिए शाकाहारी भोजन पर बहस छिड़ी है। लेकिन क्या हमारी थाली में क्या है, यह सिर्फ़ हमारी निजी पसंद का मामला है—या इसका असर उस पृथ्वी पर भी पड़ता है जिस पर हम सब निर्भर हैं? मांसाहार को अक्सर स्वाद, संस्कृति या व्यक्तिगत पसंद से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन अगर हमारे भोजन का संबंध जंगलों, खेती, जानवरों और जलवायु संकट से हो, तो क्या “मेरी मर्ज़ी, मैं कुछ भी खाऊँ” कहकर बात खत्म की जा सकती है? यह चर्चा भोजन से आगे जाकर उस सोच पर सवाल उठाती है जिसमें खाने को केवल निजी मामला माना जाता है। जब खेती का बड़ा…
8 Oct 2026 · 30 minNew
वीडियो जानकारी: 24.02.2025, संत सरिता, ग्रेटर नोएडा, Title: खाने में इतना समय क्यों बर्बाद करते हो? || आचार्य प्रशांत, विवरण: जिसके जीवन में स्वाद नहीं होता, वह उसकी भरपाई ज़ुबान के स्वाद से करता है। जिनकी ज़िंदगी में असली आग होती है, उन्हें मिर्च वाली आग नहीं चाहिए। मैं स्त्री हूँ या पुरुष - यह बाद की बात है; पहले मैं इंसान हूँ। मेरी ज़िंदगी के छह घंटों की कोई कीमत है या नहीं? घर का खाना सस्ता सिर्फ इसलिए लगता है, क्योंकि उसमें लेबर की कीमत नहीं जोड़ी जाती। एक जी रहा है खाने के लिए, और दूसरी जी रही है बनाने के लिए। जो चीज़ विज्ञान के दायरे में आती है, उसका उत्तर विज्ञान से लो - बाबा जी से…
7 Oct 2026 · 29 minNew
Video Information: 06.04.2026, Mussoorie International School (MIS), Title: School Kids Grill Acharya Prashant || Mussoorie International School (2026), Context: Acharya Prashant explores fundamental questions about identity, self-inquiry, philosophy, perception, and the ego. He explains why our names, roles, achievements, and social identities may not define who we truly are, and why genuine inquiry begins by questioning these identities.
7 Oct 2026 · 21 minNew
Title: महिलाओं के विरुद्ध हिंसा क्यों नहीं रुक रही? || आचार्य प्रशांत विवरण: हर जघन्य घटना के बाद आक्रोश होता है, विरोध प्रदर्शन होते हैं और कठोर सजा की माँग उठती है। लेकिन कुछ समय बाद वैसी ही दूसरी घटना सामने आ जाती है। आखिर महिलाओं के विरुद्ध हिंसा क्यों नहीं रुक रही?क्या इसका कारण केवल कमजोर कानून-व्यवस्था है, या इसकी जड़ हमारे घरों, रिश्तों, मनोरंजन और सामाजिक मान्यताओं में छिपी है? महिलाओं को स्वतंत्र मनुष्य के बजाय उपभोग की वस्तु मानने वाली मानसिकता कैसे बदल सकती है? आचार्य प्रशांत समझाते हैं कि केवल अपराधियों को सजा देने या महिलाओं पर और पाबंदियाँ लगाने से समस्या समाप्त नहीं होगी।…
6 Oct 2026 · 1 hr 58 minNew
वीडियो जानकारी: 03.10.2026, बोध प्रत्युषा सत्र, Title: धर्म के रास्ते के तीन पुराने खतरे और एक चौथा नया विकल्प || आचार्य प्रशांत (2026), विवरण: इस संवाद में आचार्य प्रशांत बताते हैं कि किसी एक परंपरा से चिपक जाना, सभी परंपराओं को बिना समझे अपनाना या सभी परंपराओं को ही नकार देना - तीनों ही तरीकों में समझ का अभाव रह सकता है। वे बताते हैं कि अलग-अलग परंपराओं और दर्शनों के पीछे छिपी मूल बात को समझने के लिए एक सही फ्रेमवर्क की आवश्यकता है। आचार्य जी यह भी समझाते हैं कि “विचारों से परे हो जाओ” का अर्थ विचारों को जबरन रोकना या निर्विचार अवस्था में पहुँचना नहीं है। असली प्रश्न यह है कि विचार किसके…