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Season 1, Episode 4 · Bharat Unscripted

4. Jay & Vijay : Three Lifetimes, One Destiny !

19 Aug 2025 · 7 min

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Episode notes

A tale of two gatekeepers (Jay & Vijay) , a shraap, and the price of ego that echoed across three yugs. A story of karma, devotion, and divine design from the Bhagavata Purana. Cover Art by : Pallavi ( agrawalpallavi11)

Transcript

Read the transcript · about 990 words, follows along as you listen

भारत अनस्क्रिप्टेड में आप सब का स्वागत है। आज की कहानी एक युग में नहीं तीन युगों में है वराह, नरसिंहा, राम और कृष्ण। इनमें कॉमन क्या है ये हम सब जानते हैं। ऑफ कोर्स दी कमोनलिटी इस ये सब भगवान विष्णु के अवतार हैं पर ए लेसर नोन कमोनलिटी इस ऑल्सो दट। इन अवतारों के जो विलेन थे वो भी किसी के अवतार थे। आज की कहानी उन विलेन्स के अवतार की भगवान विष्णु के गेटकीपर की। विष्णु भगवान जहाँ रहते हैं उसे कहा जाता है वैकुंठ वैकुंठ एक ऐसी जगह है जहाँ कुंठ मतलब दुःख या चिंता एग्ज़िस्ट नहीं करती।

इस वैकुंठ के दो द्वारपाल थे जय और विजय। द्वारपाल मीनिंग गेटकीपर। जय और विजय न तो कोई देवता थे न राक्षस। वो सिर्फ सेवक थे और किसी आइडियल गेटकीपर की तरह लॉयल और पावरफुल थे। दी ओनली प्रॉब्लम इस थोड़े घमंडी थे 1 दिन ब्रह्मदेव के चार मानस पुत्र जो ऋषि थे पर दिखते उम्र में छोटे थे। वो विष्णु भगवान से मिलने वैकुंठ आये। चारों तेजस्वी थे, लेकिन वैकुंठ के दरवाजे पर जब आये तो उन्हें बिना किसी कंसिडरेशन अग्रेशन में जय और विजय ने दरवाजे पर ही रोक

दिया। ये बोलकर कि विष्णु भगवान आराम कर रहे हैं और अंदर जाना मना है। चारों ऋषियों ने उन दोनों गेटकीपर को समझाने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि उनका विष्णु भगवान से मिलना जरूरी है। वो दूर से आए हैं पर ऐसे कोई रीसनस, जय और विजय पर काम नहीं आए। उन्होंने फिर भी ऋषियों को अंदर जाने नहीं दिया। ऋषियों को ऑब्वियस्ली ये उनका बहुत बड़ा अपमान लगा। और इस अपमान के बदले उन्होंने जय और विजय को दे दिया श्राप क्योंकि ऋषियों को भगवान से दूर रखा था। श्राप ये था कि वे दोनों द्वारपाल

भी उसी भगवान से दूर रहे। उनका अगला जन्म हो एस असुर जो जय विजय उग्रेशन में थे। वो अब घबरा गए। वो डरकर विष्णु भगवान के पास गए, ये सोचकर कि वो श्राप से बचा लेंगे। विष्णु भगवान ने पूरी कहानी सुनी और बोले गलती तो हुई है, अहंकार भी दिखाया है, अपमान भी हुआ है तो श्राप तो सहना पड़ेगा। पर विष्णु भगवान ये भी जानते थे कि जय और विजय सिर्फ सेवक नहीं थे, उनके भक्त भी थे तो थोड़ा सोचकर भगवान ने उनको दो ऑप्शंस दिए अगले सात जनम लो सिर्फ भक्त बनकर या तीन जनम दुश्मन बनकर। और अगर दुश्मन बने तो तीनों

जन्मों में विष्णु भगवान खुद उन्हें मुक्ति देंगे। जय और विजय बहुत आस लेकर गए थे। भगवान के पास पर आप पूरी तरह फंस गए थे, अपनी गलती का पछतावा तो था पर अब सजा से मुक्ति का रास्ता नहीं दिख रहा था। जो दो ऑप्शन्ज़ उनके पास थे वो थोड़े कॉम्पलिकेटेड भी थे। अगर दूसरा ऑप्शन चूस करते और तीन जन्म लेते तो भगवान के पास पहुंचने का समय कम लगता। साथ लेते तो बहुत ज्यादा, लेकिन अगर तीन जन्म लेते। तो जिन भगवान की भक्ति की थी, जिनकी सेवा की थी, उनसे अब

दुश्मनी करनी पड़ती, वो भी इतनी कि युद्ध में हार से मुक्ति मिले। सात जन्मो में ये प्रॉब्लम नहीं था, पर भक्त बन के साथ जन्म निकालना मतलब सात जन्मो तक दूर रहना। बहुत कॅन्फ़्यूज़न था। काफी डिस्कॅशंस हुए और बहुत डिस्कॅशन के बाद दोनों ने डिसाइड किया तीन जन्म कारण साफ था समय कम और दुश्मन बनकर ही सही, विष्णु भगवान के दर्शन तो होंगे, उनसे सात जन्म दूर नहीं रहना पड़ेगा। वो निराश होकर पहुंचे। विष्णु भगवान के पास और अपना फैसला बताया। श्राप के पहले प्रभाव के रूप में दोनों ने अपना पहला जन्म लिया।

सुरों में जय बने हिरण्यकश्यप और विजय हिरण्यकश्यप दोनों सिबलिंग्स ये था सत्ययुग। हिरण नक्ष ने सारी पृथ्वी को समुद्र में डुबो दिया था और उस समय विष्णु वराह अवतार लेकर पृथ्वी को बचाने आए समुद्र के तल में दोनों के बीच एक महायुद्ध हुआ और अंत में वराह ने अपने प्रहार से हिरण नक्ष का वध किया। हिरण नक्ष के मरने के बाद? उसके भाई हिरण्यकश्यपु ने विष्णु से बदला लेने की कसम खाई और तपस्या करके ब्रह्मदेव से वरदान मांगा कि न उसे कोई मनुष्य मार सके, न पशु, न दिन में, न रात

में, न घर के अंदर, न बाहर। और इसलिए हिरण्यकश्यपु बन गया देओताओं का सबसे बड़ा दुश्मन। विष्णु भगवान ने उसका वध किया, नरसिंहा बनकर अपनी गोदी में सुलाकर और इस तरह श्राप ने उन्हें अगले युग में धकेल दिया। त्रेतायुग, जय और विजय ने फिर जन्म लिया दिस टाइम एस रावण एंड कुंभकरण अगेन एस सिबलिंग्स। विष्णु, भगवान की राम अवतार और रावण और कुंभकर्ण के वध की स्टोरी हमें पता है हमारी दूसरी कहानी में हमने हाल ही में सुना भी है। फिर आया द्वापर युग जय बने शिशुपाल विजय बने दंतवकर दिस टाइम

बोर्न एस कज़िन्स। महाभारत काल में घटे राजसूया यज्ञ में सबके सामने शिशुपाल कृष्ण की निंदा करता रहा। कृष्ण ने शिशुपाल की एक एक करके 100 गलतियाँ माफ़ की, पर जैसे ही 101 भी हुई, सुदर्शन चक्र घूमा और एक पल में शिशुपाल का मस्तक धड़ से अलग हो गया। जय। श्राप से फाइनली मुक्त हुआ तीन जन्मोबाद तीन युगोंबाद फिर आया दंतवक्र वो एक युद्ध में भगवान कृष्ण के पीछे गदा लेकर भागा। भगवान कृष्ण ने उसे टक्कर दी सामने से और एक घुमाव में उसकी गदा तोड़ दी। और दूसरे वार में अपनी कथा से

उसका हृदय तोड़ दिया और इस तरह से विजय भी मुक्त हुआ। तीन युगवार जैसे राम और कृष्ण भगवान को एक लिनेयज है, विष्णु के अवतार हैं। वैसे ही उन स्टोरीज़ के शत्रुओं का भी एक बैकग्राउंड और लिनेयज है, वो है बैकग्राउंड इन दो गेट कीपर्स का। जय और विजय दोनों भगवान विष्णु के भक्त थे और विष्णु के सबसे करीब। लेकिन अहंकार आया और तीन जन्मों तक भटकते रहे। हम कहीं भी हो, कोई भी हो, हमारे कर्म घूम कर हमारे पास आ ही जाते हैं। अच्छे और बुरे दोनों। आशा करता हूँ आपको ये कहानी अच्छी

लगी अगली कहानी में जल्द मिलते हैं।

Transcript supplied by the publisher with the episode.

Podcast

Bharat Unscripted

Parijit Khokle · History · Hindi

Every civilization leaves behind stories. The ones that endure aren't remembered because they're old—they're remembered because they reveal something timeless about being human. Bharat Unscripted explores the lives, choices, and defining moments that shaped India's civilization—not simply to understand the past, but to better understand ourselves. A new story, once every two weeks.

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    0. Introduction

    Bharat Unscripted brings India’s timeless legends, stories, and histories to streaming — told just like our grandparents did: casually, emotionally, and without scripts. From the Ved, Purana, Ramayan, and Mahabharat to the stories of New India — this is history, not as a lesson… but as a kahani.

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