Season 1, Episode 6 · Bharat Unscripted
6. Rishi Dadhichi and The Bones that won the war !
2 Sep 2025 · 10 min
Episode notes
What do a war, a weapon, and a rishi’s bones have in common? This is the tale of Rishi Dadhichi from Bhagavata Purana — the sage who gave up his life so the Dev could win.
Transcript
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भारत अनस्क्रिप्टेड में आप सब का स्वागत है। व्हॉट इफ़ आई टोल्ड यू कि थॉर्की हैमर के जैसा ही थंडरबोल्ट या बिजली जैसा प्रहार करने वाला एक वेपन हमारे भी प्राणों में है। एंड व्हाट इफ आई टोल्ड यू हम सब ने ये वेपन काफी बार देखा है। नॉर्स गॉड थॉर की हैमर किस तरह से अटैक करती है?
ये अब कॉमन नॉलेज है। ऐसा ही एक वेपन देवो के राजा इन्द्र के पास भी है एंड यही वेपन बहुत डिपिक्शन में दुर्गा देवी के हाथ में होता है। ये वेपन है व्र व्र एक तरफ बिजली या थंडर बोल्ट की तरफ प्रहार या अटैक करता है, झटके में एनिमीज़ की राख कर देता है, वहीं दूसरी तरफ वो पत्थर से भी ज्यादा कठोर है इसलिए कभी टूट नहीं सकता। वज्र को अजेय कहा गया है। मीनिंग इट्स इनविंसिबल। ये वज्र बना कैसे और क्यों?
इसकी कहानी एक अल्टीमेट सैक्रिफ़ाइस की कहानी है। हमारे प्राणों में देवों और असुरों के बीच बहुत वार्स का डिस्क्रिप्षन है। शास्त्रों के हिसाब से देव का मतलब नेससेरली भगवान नहीं होता। देव वो होते हैं जो प्रकृति में बैलेंस बनाए रखते हैं। हर एक देव की अलग अलग जिम्मेदारी होती है, वैसे ही असुर नेससेरली डोंट मीन राक्षस। क्या टीवी सीरियल्स में अजीब से दिखने वाले लोग इट्स मोर ए ट्रेट ऑर ए कैरेक्टर। वो लोग जो सिर्फ पावर और ग्रिड से
ड्राइवन होते हैं, जैसे हमारे रावण की कहानी में हमने समझा कि रावण वास् ए ब्राह्मण ब्य बर्थ पर ही वास् एन असुर ब्य कैरेक्टर एक समय था, जब देवो और असुरों के बीच एक बहुत बड़ा युद्ध शुरू हुआ। इस युद्ध में असोरो का लीडर था। वृत्र वृत्र ने देवों को हराने के लिए और उनको डिसट्रैक्ट करने के लिए स्ट्रेटेजी के तौर पर कई इलाकों में पानी रोक रखा था। जैसे आज हम डैम्स बनाते हैं और पानी का फ्लो कंट्रोल करते हैं, वैसे ही वृत्र ने। पानी का बहाव बंद कर दिया था। देव और मनुष्य सब परेशान हो गए
थे, हर जगह सूखा पड़ा था, लोग मर रहे थे, बेहाल हो रहे थे, हर जगह दुःख ही दुःख था पर वृत नहार रहा था, न पानी बहने दे रहा था। इन्द्र जो देवताओं के राजा है। उन्होंने भी बहुत कोशिश की वृत्त को मनाने की, पर वो नहीं माना और इसी वजह से ये युद्ध बन गया। एक बहुत बड़ा महायुद्ध वृत्त खुद बहुत बलवान भी था एंड टु टॉप इट। उसे एक वरदान मिला था कि उसे कोई मेटल, आग या पानी या ऐसी कोई शक्ति मार नहीं सकती। हर दिन देव हार रहे थे और वृत्त और भी मजबूत होता जा रहा था। जीत के साथ असुरों की सेना में और
लोग भर्ती हो रहे थे। पानी रुका ही था। ये घमासान युद्ध रोज़ असुरों के फेवर में जा रहा था। 1 दिन एस दी अल्टीमेट डिफीट फरेन्द्र। वृत्र ने इंद्र का सिंहासन भी छीन लिया। इतने दिन युद्ध में सिर्फ नुकसान देखकर 1 दिन इन्द्र की हिम्मत टूट गयी। देवों के राजा होने के बावजूद पहली बार उन्होंने अपने आप को बिलकुल हेल्पलेस महसूस किया। उन्हें लगा कि शायद स्वर्ग हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। पृथ्वी हमेशा के लिए सूखी पड़ जाएगी और वो कुछ नहीं कर पाएंगे।
एस ए लास्ट रिसॉर्ट मदद मांगने बेचैनी में इंद्र गए भगवान विष्णु के पास और पूछा कि क्या करे? ऐसा क्या हो जिससे ये युद्ध जीता जा सके? भगवान विष्णु ने पूरी कहानी सुनी और इन्द्र को वृत के बारे में बताया। उसके वरदान के बारे में बताया और बोले कि उसे हराना मुश्किल है पर अगर एक नया शस्त्र बनाया जाए। जो कोई मेटल वुड या स्टोन से न बना हो तो उसे हराना पॉसिबल हो सकता है। ये सुनकर देव और निराश हो गए। सोचा अगर मेटल या वुड या स्टोन न हो तो वेपन बनेगा कैसे? तब विष्णु ने एक सुझाव दिया।
ऑफ ए वेपन मेड विथ बोन्स, हड्डियों ऐसी हड्डियों जो किसी महा तपस्वी और ब्रह्मर्षि की हो, जिनका सारा जीवन तपस्या में गया हो, शरीर तेज और ब्रह्म विद्या से भरा हो। विष्णु भगवान के इस जवाब से देवों में थोड़ी उम्मीद वापस आई। पर रियलाइजेशन भी आया कि वो ऐसे किसी महातपस्वी को नहीं जानते और अगर जानते भी हो, तो ऐसा कोई महातपस्वी जिसने अपना पूरा जीवन तपस्या में झोंक दिया हो, वो एक वेपन के लिए अपना जीवन क्यों त्याग करेगा? विष्णु भगवान इंद्र की उलझन समझ
गए थे। उन्होंने ऋषि दधी जीके बारे में बताया। दधी जी एक ब्रह्मर्षि थे। हमारी पहली कहानी में विश्वामित्र और वशिष्ट भी ब्रह्मर्षि थे। बस उन्हीं की तरह उन्हें न राजनीति में रुचि थी, न युद्ध में। उन्होंने जीवन सरस्वती नदी के किनारे तपस्या में लगा दिया था। कहा जाता है कि दधीची वेदिक ज्ञान के महान गुरु थे, एस्ट्रोनोमी और स्पिरिचुअलिटी के काफी सिद्धांतों में उनका योगदान था। दधीची का पूरा बैकग्राउंड सुनकर सहमे हुए इन्द्र। और सारे देव पहुंचे उन ऋषि के पास
और पहुँच कर युद्ध के बारे में बताया। इन्द्र के शब्द थरथरा रहे थे। देवों के राजा की आवाज़ पहली बार कमजोर थी। इनर कॉनफ्लिक्ट आवाज़ में साफ दिख रहा था किसी को उनकी हड्डियों मांग दा। मतलब सीधे सीधे उनका जीवन मांगना है। ये मुश्किल था पर कॉनफ्लिक्ट के साथ इंद्र ने दादी जी को बताया कि युद्ध में देव कैसे रोज़ हार रहे हैं और जीत की उम्मीद हर पल कम होती जा रही है। फिर बताया उनका इंटरैक्शन विष्णु भगवान से बस। यहाँ तक बात आते आते दधीची समझ गए
थे कि ये सब उन्हें क्यों बताया जा रहा है? वो ये भी समझ गए थे कि ये बात सिर्फ युद्ध में कौन जीतता है, उसकी नहीं बल्कि धर्म की है। दी राइट साइड इट शुड ऑल्वेज़ विन जब तक इंद्र कुछ आगे बोल पाते ऋषि ने खुद कहा। कि वो उनका शरीर त्याग करने के लिए तैयार हैं ताकि इंद्र को उनकी हड्डियाँ मिल सके। बस बोले कि उन्हें कुछ समय चाहिए ताकि वो अपनी पूरी शक्ति, अपना लाइफ फोर्स अपने स्पाइनल कॉर्ड में अपनी हड्डियों में केंद्रित कर सके। दधीची का सैक्रिफ़ाइस देख कर देवताओं ने आदर में अपना सर
झुकाया, दधीजी गहन ध्यान में चले गए। ये समय आश्रम में एक अलौकिक शांति ले आया। अगले कुछ दिनों तक उनके आश्रम से एक प्रकाश मंडल निकलता रहा। जैसे उनकी तपस्या की सारी शक्ति अब शरीर के अंदर हड्डियों में सिमट रही हो। अंत में जब समय सही लगा उन्होंने अपनी आँखें बंद की, एक धीमी सी मुस्कान दी और इच्छा मृत्यु से अपने प्राण त्याग दिए। कहा जाता है उस समय आश्रम में एक ऐसी एनर्जी थी जैसे कभी किसी ने देखी ना हो। उनका शरीर निश्चल था पर हड्डियों चमक रही थी जैसे उनमें अग्नि और
बिजली दोनों बंध हो। उनकी ये दिव्य हड्डियों लेकर देवताओं ने और एक कृषि की मदद से वज्र बनाया। जब वज्र बना और इंद्र ने पहली बार उसे यूज़ किया तो ऐसा लगा था कि जैसे पूरे यूनिवर्स की बिजली इन्द्र की मुठ्ठी में हो। इन्द्र अब ये वज्र लेकर युद्ध में वापस गए। वृद्ध सामने था। अपनी पूरी सेना के साथ कॉन्फिडेंट कि उसे कोई हरा नहीं सकता। इंद्र ने वज्र से अटैक किया। उनका हाथ जैसे ही वृत की ओर उठा आकाश चीरते हुए कई थंडरबोल्ट्स निकले और वृत पल में ही राख हो गया।
एक इतना बड़ा प्रहार देखकर असुरों ने अपनी हार मान ली। नदियाँ बहने लगीं, देव जीत गए, स्वर्ग वापस मिला यही वज्र फिर बन गया इंद्रदेव का वेपन हमेशा के लिए। और महिषासुर के वध के लिए इंद्रदेव ने यही वज्र दिया। दुर्गा देवी को कितनी सरप्राइजिंग बात है। हमारे हर सिंबल के पीछे एक इंटरेस्टिंग सी कहानी है त्याग की, हेरोइस्म की, ब्रवेरी की। वज्र को हिंदू धर्म में शक्ति और जीत का प्रतीक माना जाता है और बुद्धिस्म में भी वज्र को एक स्पिरिचुअल सिंबल ऑफ़ अनब्रेकेबल ट्रुथ माना जाता है।
बुद्धिस्म की एक शाखा वज्र एंड बुद्धिस्म इस नेम्ड आफ्टर दी वेपन वज्र ऋषि दधीचि की ये कहानी हम किस तरह देखे? ये हम्पर है एक ऋषि जिन्होंने सैक्रिफ़ाइस कर दिया फॉर दी ग्रेटर गुड ऑर प्रिपेरिंग यूरसेल्फ़ फॉर दी अल्टीमेट पर्पस अगली बार दुर्गा देवी के हाथ में वज्र देखो तो दधीचि और उनके सैक्रिफ़ाइस को जरूर याद करना। मिलते हैं अगली कहानी में जल्दी।
Transcript supplied by the publisher with the episode.
Podcast
Bharat Unscripted
Parijit Khokle · History · Hindi
Every civilization leaves behind stories. The ones that endure aren't remembered because they're old—they're remembered because they reveal something timeless about being human. Bharat Unscripted explores the lives, choices, and defining moments that shaped India's civilization—not simply to understand the past, but to better understand ourselves. A new story, once every two weeks.
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