Skip to content
Melo Podcasts Home
CategoriesLanguagesFollowing

Episode · SyllabuswithRohit

The Wanderer

23 May 2026 · 1 hr 15 min

Play episode WhatsApp Download

Episode notes

00:00:00 THE WANDERER Meeting the stranger, hospitality, patience vs bitterness00:01:33 GARMENTS Beauty and Ugliness swapping clothes, perception vs reality, naked truth00:02:39 THE EAGLE AND THE SKYLARK Arrogance of power, humility, nature's hierarchy, unexpected burdens00:05:09 THE LOVE SONG Poet's sincerity, misunderstood art, vanity vs true feeling00:06:28 TEARS AND LAUGHTER Hyena and Crocodile, misjudging emotions, different perspectives on life00:07:24 AT THE FAIR Vanity, seeking attention, hypocrisy of youth vs age00:09:20 THE TWO PRINCESSES Envy in marriage, the illusion of…

Transcript

Read the transcript · about 10,280 words, follows along as you listen

मैं उसे एक चौराहे पर मिला। एक आदमी जिसके पास सिर्फ एक छद्दर थी, एक लाठी थी और उसके चेहरे पर दुख का पर्दा था। हम दोनों ने एक दूसरे को हैलो कहा और मैंने उससे कहा। मेरे घर आ जाओ, मेहमान बन जाओ, वो आ गया। मेरी वाइफ और मेरे बच्चे हमें दरवाजे पर मिले। उसने उन्हें देखा और मुस्कुराया और उन्हें उसका आना अच्छा लगा। फिर हम सब टेबल पर बैठ गए। और उस आदमी के साथ खुश थे क्योंकि उसमें एक चुप और अजीब सी बात थी और रात को खाना खाने के बाद हम सब आपके पास बैठे और मैंने उससे उसकी यात्रा के बारे में पूछा।

उस रात और अगले दिन। उसने हमें बहुत सारी कहानियों सुनाई लेकिन जो मैं अब लिख रहा हूँ वो उसकी मुश्किल जिंदगी से निकली थी। फिर भी वो आदमी बहुत ही अच्छा था और ये कहानियों उसके रास्ते की मिट्टी और सबर की है। और जब वो 3 दिन बाद चला गया तो हमें ऐसा नहीं लगा कि कोई मेहमान गया है बल्कि लगाया जैसे हम में से कोई अभी भी बाहर बगीचे में है और अभी अंदर आना बाकी है 1 दिन खूबसूरती। और बदसूरती समुद्र के किनारे मिले। दोनों ने एक दूसरे से कहा चलो समुद्र में नहाते हैं।

दोनों ने अपने कपड़े उतारे और पानी में तैरने लगे। थोड़ी देर बाद बदसूरती वापस किनारे आए। और उसने खूबसूरती के कपड़े पहन लिए और चली गई। खूबसूरती भी समुद्र से बाहर आई लेकिन उसके कपड़े वहाँ नहीं थे। वो नंगी होने से शरमाई। इसलिए उसने बस सूती के कपड़े पहन लिए और खूबसूरती भी। अपनी राह पर चल पड़ी। आज तक लोग दोनों को अक्सर गलत समझ लेते हैं, लेकिन कुछ लोग हैं जो खूबसूरती का असली चेहरा देख लेते हैं। चाहे उसने कोई भी कपड़े पहने हो और कुछ लोग हैं जो बस को भी पहचान

लेते हैं चाहे कपड़े। उससे छुपा भी रहे हो? एक चिड़िया और एक बाज एक ऊंची पहाड़ी के पत्थर पर मिले चिड़िया ने कहा, गुड मॉर्निंग सर, बाज ने नीचे देखते हुए धीरे से कहा, गुड मॉर्निंग। चिड़िया ने पूछा आप ठीक हो ना?

सर? बाज ने कहा हाँ, सब ठीक है, लेकिन क्या तुम्हें नहीं पता कि हम चिड़ियों के राजा हैं और तुम्हें हमें बिना हमारे बोलने के बात नहीं करनी चाहिए? चिड़िया ने कहा। मुझे लगता है हम दोनों एक ही परिवार से हैं। बाद ने उस पर घमंड से देखा और कहा, कौन कहता है कि तुम और मैं एक ही परिवार से हैं?

फिर चिड़िया ने कहा, मैं आपको याद दिलाना चाहता हूँ सर कि मैं भी उतना ही ऊंचा उड़ सकता हूँ जितना आप। और मैं गा भी सकता हूँ और दूसरे जीवों को खुशी दे सकता हूँ। तुम ना तो खुशी देते हो, ना ही सुख बाज गुस्से में आ गया और कहा, खुशी और सुख छोटी सी हिम्मत वाली चिड़िया अपनी से एक ही बार में तुम्हें खत्म कर सकता हूँ। तुम तो सिर्फ मेरे पंजे के साइज के हो फिर चिड़िया उड़कर बाज की पीठ पर बैठ गई और उसके पंख मूँचने लगे। बाज परेशान हो गया। वो तेज और ऊंचा उड़ा ताकि छोटी चिड़िया उसके पीठ से उतर जाए,

लेकिन उसे सफलता नहीं। मिली। अंत में बाज वापस उसी पहाड़ के पत्थर पर रह गया और और भी ज्यादा परेशान था क्योंकि चिड़िया अभी भी उसकी पीठ पर थी और बाज अपनी किस्मत को कोस रहा था। तभी वहाँ एक छोटा खुशवा आया। और ये देखकर ज़ोर ज़ोर से हंसने लगा। इतना हंस पड़ा कि लगभग पलट ही गया। बाज ने नीचे देखकर कछुए से पूछा तुम धीरे चलने वाले हमेशा जमीन से चिपके रहते हो तुम किस बात पर हंस रहे हो, कछुए ने कहा। मैंने देखा कि तुम घोड़ा बन गए हो और एक छोटी चिड़िया तुम्हारी

सवारी कर रही है, पर छोटी चिड़िया तुमसे अच्छी है। बाज ने उससे कहा तुम अपने काम पर जाओ, ये हमारा परिवार का मामला है। मेरे भाई चिड़िया और मेरे बीच का। एक कवि ने एक प्रेम गीत लिखा। एक पोयट ने एक लव सॉन्ग लिखा जो बहुत खूबसूरत था। उसने उस सॉन्ग की कई कॉपीज बनाई। और अपने दोस्तों, जान पहचान वालों, औरतों, आदमियों सब को भेज दिया। एक लड़की को भी भेज दिया जिससे वो सिर्फ एक बार मिला था जो पहाड़ों के उस पार रहती थी। एक 2 दिन बाद उस लड़की की तरफ से एक मैसेंजर आया।

और एक लेटर लाया। चिट्ठी में लिखा था मुझे यकीन दिलाइए। आपके लिखे लव सॉन्ग ने मुझे बहुत छू लिया है। अब आइए मेरे माँ बाप से मिलिए, हम सगाई की तैयारी करेंगे। पोएट ने लेटर का जवाब दिया और लिखा, मेरी दोस्त ये सिर्फ एक प्रेम गीत था जो एक पोएट के दिल से निकला था जो हर आदमी हर औरत के लिए गाता है। फिर उस लड़की ने वापस लिखा दिखावा करने वाले और झूठ बोलने वाले। हाथ से लेकर मेरी मौत तक मैं तुम्हारी वजह से सभी कवियों से नफरत करूँगी। नील नदी के किनारे शाम के समय एक

हाइना और एक मगरमच्छ मिले। दोनों रुक गए और एक दूसरे को हैलो कहा। हाईने ने पूछा आपका दिन कैसा जा रहा है सर? क्रोकोडाइल यानी मगरमच्छ ने कहा, मेरा दिन अच्छा नहीं है, कभी कभी दुख और तकलीफ में मैं रोता हूँ और फिर जंगल के सब लोग कहते हैं ये तो बस मगरमच्छ के आंसू हैं। ये बात मुझे बहुत चोट पहुंचाती है। फिर हाईना ने कहा आप अपने दुख की बात कर रहे हैं, लेकिन ज़रा मेरी भी सोचिए, मैं दुनिया की खूबसूरती, उसके चमत्कार और अजीब चीजें देखता हूँ और खुशी में मैं भी हंस पड़ता हूँ जैसे दिन भी हंस

रहा है। लेकिन जंगल के लोग कहते हैं ये तो सिर्फ हाइना की हँसी है। 1 दिन एक गांव की लड़की मेले में आई जो बहुत सुंदर थी। उसके चेहरे पर लीली और फूल की तरह रंग था। उसके बालों में सूरज के ढलने जैसी चमक थी और उसके होठों पर सुबह की मुस्कुराहट थी। जैसे ही ये सुंदर लड़की सबको दिखाई दी, सब जवान लड़की उसके पास आ गए और उसके चारों तरफ घूमने लगे। कोई उसके साथ डांस करना चाहता था, कोई उसकी रिस्पेक्ट में केक काट रहा था, सब उसके गाल पर किस करना चाहते थे।

वैसे भी मेला था लेकिन लड़की को ये सब देख कर बहुत बुरा लगा। वो घबरा गई और लड़कों के बारे में बुरा सोचने लगी। उसने उन्हें डांटा और एक दो को तो थप्पड़ भी मार दिया, फिर वो से बचकर भाग गई। शाम को घर लौटते वक्त उसके दिल में था कि मुझे घिन आ रही है। ये लड़के कितने बदतमीज़ और बेशर्म है। बिल्कुल बर्दाश्त के बाहर है। 1 साल बीत गया। इस दौरान वो सुंदर लड़की अक्सर मेले और लड़कों के बारे में सोचती रही। फिर 1 दिन वही लड़की फिर से मिला आई। उसके चेहरे पर लिली और गुलाब का रंग था बालों में सनसेट था।

क्नॉइस। और होठों पर सुबह की मुस्कुराहट थी पर इस बार जब लड़कों ने उसे देखा तो सब ने उससे नजर हटा ली। पूरा दिन उसके पास कोई नहीं आया और वो अकेली ही रही और शाम को जब वो घर जा रही थी तो उसके दिल में था। मुझे घिन आ रही है ये लड़के कितने बदतमीज़ और बेशरम है बिलकुल बर्दाश्त के बाहर है। शबाकी शहर में एक राजकुमार रहता था और उसे सब लोग प्यार करते थे। आदमी, औरतें, बच्चे सब। जंगल के जानवर भी उससे मिलने आते थे, लेकिन सब लोग कहते थे कि उसकी बीवी, उसकी पत्नी जो राजकुमारी थी, उससे प्यार नहीं करती बल्कि

उससे नफरत करती है। 1 दिन पड़ोसी शहर की एक राजकुमारी। शराकीस की राजकुमारी से मिलने आई दोनों बैठकर बातें करने लगी और बात उनके पति तक आ गई। शराकीस की राजकुमारी ने जज्बात के साथ कहा मैं तुम्हारी खुशी देख कर जलन करती हूँ। तुम अपने राजकुमार के साथ खुश हो। इतने साल की शादी के बाद भी मैं अपने पति से नफरत करती हूँ, वो सिर्फ मेरे नहीं है और मैं बहुत ही दुखी औरत हूँ। तब गेस्ट राजकुमारी ने उसे देखा और कहा मेरी दोस्त। असल बात ये है कि तुम अपने पति से प्यार करती हो, हाँ, और तुम्हारा

प्यार अभी भी पूरा खत्म नहीं हुआ। इसीलिए तुम्हारे अंदर जिंदा है जैसे गार्डन में प्रसंत होता है, लेकिन मुझे और मेरे पति को देखो, हम दोनों सिर्फ चुपचाप। एक दूसरे के साथ रहते हैं। फिर भी तुम और दूसरे लोग इसको खुशी समझते हो?

1 दिन तूफानी मौसम था ये क्रिश्चियन बिशप अपने गिरजाघर में था। क्नॉइस। तब एक ऐसी औरत आई जो क्रिश्चियन नहीं थी, वो उसके सामने खड़ी हो गई और कहीं मैं क्रिश्चियन नहीं हूँ, क्या मुझे भी नरक की आग से बचने का कोई रास्ता है? बिशप ने उस रात को देखा और कहा नहीं सिर्फ वही लोग बच सकते हैं जो पानी और आत्मा से। वेप्टाइज हुए हैं। जैसे ही बिशप एक कह रहा था तभी आसमान से बिजली गिर गई। गिरजाघर में आग लग गई। शहर के लोग दौड़कर आए। उन्होंने उस औरत को बचा लिया,

लेकिन बिशप आग में जल गया। हरे भरे पहाड़ों के बीच एक हर्मिट रहता था। एक तपस्वी उसका मन बहुत साफ था और दिल बिल्कुल शुद्ध था जमीन के सब जानवर और आसमान की सब चिड़िया। जोड़ियों में उसके पास आती थी और वो उनसे बात करता था। सब उसकी बातें खुशी से सुनते थे। उसके पास बैठ जाते थे और तब तक नहीं जाते जब तक रात नहीं हो जाती। रात को तपस्वी उन्हें हवा और जंगल के हवाले करता था। अपनी दुआ के साथ एक शाम जब वो प्यार के बारे में बात कर रहा था, एक तेंदुए ने अपना सर उठाकर पूछा आप हमें प्यार की बात बता रहे

हैं, लेकिन सर आपके साथ ही कहा। तपस्वी ने कहा मेरा कोई साथी नहीं है। ये सुनकर सारे जानवर और चिड़िया बहुत हैरान हो गए और आपस में बोलने लगे। जब इन्होंने खुद प्यार और साथ निभाना नहीं जाना तो ये हमें कैसे सीखा सकते हैं? फिर सब चुपचाप। और थोड़ा घमंड के साथ उससे दूर चले गए। उस रात ने चटाई पर जमीन की तरफ मुँह करके लेट गया और दुख में रोया अपने सीने पर हाथ मारते हुए। 1 दिन प्रॉफिट शरिया एक गार्डन में था। वहाँ एक बच्चा उनके पास आया, बच्चा दौड़ के आया और कहा, गुड मॉर्निंग सर और प्रॉफिट ने भी कहा

गुड मॉर्निंग सर फिर बच्चा बोला मैं देख रहा हूँ कि आप अकेले हैं। बच्चा हंसकर बोला। मुझे अपनी नर्स से छुटकारा पाने में बहुत टाइम लग गया। उसे लगता है मैं उस झाड़ियों के पीछे हूँ पर क्या आप नहीं देख रहे कि मैं यहाँ हूँ?

फिर बचा प्रॉफिट के चेहरे को देखते हुए फिर बोला आप भी अकेले हैं। आपने अपनी नर्स अपने दाई का क्या किया? प्रॉफिट ने जवाब दिया, ये अलग बात है। सच कहूं तो मैं अक्सर अपनी दाई से छुटकारा नहीं पाता, लेकिन अभी जब मैं गार्डन आया वो मुझे झाड़ियों के पीछे ढूंढ रही थी। बच्चा ताली बजाकर बोला तो आप भी मेरी तरह हो, कितना मज़ा आता है, छुपने में है ना?

फिर पूछा आप कौन हो? आदमी ने कहा मुझे प्रॉफिट शरिया कहते हैं और तुम कौन हो? बच्चे ने कहा मैं तो बस में ही हूँ, मेरी दही मुझे ढूंढ रही है। पर उसे पता नहीं मैं कहाँ हूँ तो प्रोफेट ने आसमान की तरफ देखते हुए कहा मैं भी थोड़ी देर के लिए अपनी दायित्व से बच गया हूँ लेकिन वो मुझे ढूंढ ही लेगी। बच्चे ने कहा मुझे भी पता है मेरी दाई मुझे ढूंढ ही लेगी। तभी एक औरत की आवाज आई जो बच्चे के नाम पुकार रही थी। बच्चा बोला देखा मैंने कहा था ना वो मुझे ढूंढ लेगी उसी वक्त एक

दूसरी आवाज आई कहाँ हो शरिया प्रोफेट ने कहा देखो मेरे बच्चे उन्होंने मुझे भी ढूंढ। लिया। और शरिया ने अपना चेहरा ऊपर करते हुए जवाब दिया, मैं यहाँ हूँ ए को एस्टर ने एक सीपी ने अपनी बगल वाली एस्टर से कहा, मुझे अंदर बहुत तेज दर्द हो रहा है, ये दर्द भारी भी है और गोल भी, मैं परेशान हूँ। दूसरी वेस्टर ने घमंड से जवाब दिया आसमान और समंदर का शुक्रिया, मुझे तो कोई दर्द नहीं है। महेंद्र से भी ठीक हूँ, बाहर से भी बिल्कुल ठीक हूँ। तभी वहाँ से एक केकड़ा एक क्रैब गुजरा।

उसने दोनों वेस्टर्स की बात सुनी और जो वेस्टर खुश थी, उसने कहा, हाँ तुम ठीक हो, अंदर बाहर से पूरी हो, लेकिन जो दर्द तुम्हारी पड़ोसी झेल रहा है, वही दर्द एक खूबसूरत मोती बन रहा है। एक आदमी और एक औरत एक खिड़की के पास बैठे थे जहाँ से बाहर बसंत दिख रहा था दोनों एक दूसरे के बहुत पास बैठे थे। औरत बोली मैं तुमसे प्यार करती हूँ, तुम हैंडसम हो। स्मार्ट हो, अमीर हो और हमेशा अच्छे कपड़ों में रहते हो। आदमी ने कहा मैं भी तुमसे प्यार करता हूँ, तुम्हें खूबसूरत सोच

हो, एक ऐसी चीज़ हो जो हाथ में नहीं आती और मेरी सपनों की एक धुन हो, लेकिन औरत नाराज होकर। उससे मुँह फेर कर बोली, सर अब आप यहाँ से चले जाइए, मैं कोई सोच नहीं हूँ, ना ही सपने की एक चीज़ हो। मैं एक औरत हूँ, मैं चाहती हूँ कि आप मुझे अपनी पत्नी और अपने होने वाले बच्चों की माँ समझिए और दोनों अलग हो गए। आदमी अपने मन में सोच रहा था, देखो एक और सपना अब धुंध बन गया और औरत सोच रही थी क्या फायदा ऐसे आदमी का ये मुझे सिर्फ धुंध और सपना समझता है। सादिक राज्य के लोग। अपने राजा के महल को घेरकर

चिल्लाने लगे। सब उसके खिलाफ़ बगावत कर रहे थे। राजा महल की सीढ़ियों उतरकर आया। एक हाथ में ताज था और दूसरे हाथ में राजदंड था। उसकी शान देखकर सब चुप हो गए। राजा ने कहा। मेरे दोस्तों अब तुम मेरे परेशान नहीं हो, मैं अपना ताज और अपना राजदंड तुम्हें दे रहा हूँ, मैं भी तुम्हारे जैसा एक इंसान हूँ, मैं तुम्हारे साथ काम करना चाहता हूँ ताकि हम सबकी ज़िन्दगी बेहतर हो सके। अब किसी राजा की जरूरत नहीं है। चलो सब मिलकर खेतों और बगीचों में काम करते हैं। बस मुझे बताओ कि कौन से खेत या

बगीचे में जाना है। अब तुम सभी राजा हो। लोग हैरान हो गए और सब चुप हो गए क्योंकि जीसको वह अपनी परेशानी की वजह समझ रहे थे। और वही राजा अपना ताज और राजदंड देखकर उनकी तरह बन गया था। फिर सब लोग अपने अपने रास्ते चले गए। राजा भी एक आदमी के साथ खेत की तरफ चला गया। लेकिन साधिक राज्य बिना राजा के भी अच्छा नहीं चला और उदासी? वैसी ही बनी रही। लोग बाजार में चिल्लाने लगे कि उन्हें कोई राजा चाहिए। बुजुर्ग और जवान सब मिलकर बोले हमें अपना राजा चाहिए।

फिर लोगों ने राजा को ढूंढा, देखा कि वो खेत में काम कर रहा था। सब उसको वापस ले आए और उसको फिर। ताज और राज़ दंड दे दिया। सब ने कहा, अब हमें नियम से और इंसाफ के साथ राज्य करिये। राजा ने कहा, मैं तुम्हें जरूर नियम से छलवाऊंगा और ऊपर वाला मेरी मदद करे कि मैं इंसाफ भी कर सकूँ। अब लोग औरत मर्द राजा के पास आए और एक जमींदार की शिकायत की जो उन्हें सताता था और वो लोग सिर्फ मजदूर थे। राजा ने तुरंत जमींदार को बुलाया और कहा एक इंसान की जिंदगी ऊपर

वाले की नजर में उतनी ही कीमती है। जितनी किसी और की तुम्हें ये समझ नहीं आया इसलिए तुम्हें सदी के राज्य से निकाल लिया जाता है। तुम अब कभी यहाँ नहीं रहोगे। अगले दिन कुछ और लोग आए और एक रानी के जुल्म की बात की जो उन्हें दुख दे रही थी। राजा ने तुरंत। रानी को भी बुलाकर कहा और राज्य से निकाल दिया। राजा ने कहा, जो लोग खेतों में काम करते हैं और बगीचे संभाले हैं, वो हमसे ज्यादा इज्जत के लायक है। तुमने ये नहीं समझा इसलिए तुम्हें भी यहाँ से जाना होगा।

फिर कुछ लोग आए और उन्होंने कहा कि पादरी ने उसे पत्थर ढुलवाया गिरिशाघर के लिए काम करवाया पर कुछ दिया नहीं। जबकि पादरी के पास बहुत सोना चांदी था और वो लोग भूखे थे। राजा ने पादरी को बुलाया और कहा। तुम्हारे गले में जो क्रॉस है वो दूसरों की जिंदगी देने के लिए है, लेकिन तुमने तो सिर्फ लिया दिया कुछ नहीं, इसलिए तुम तुम भी अब ये राज़ छोड़ दो और कभी वापस मत आना। इस तरह पूरे एक महीने तक रोज़ कोई ना कोई। दुख सुनाने आता और हर दिन कोई ना कोई जुल्मी व्यक्ति राज़ से निकाल

दिया जाता। लोग हैरान हो गए। सब के दिल खुश हो गए। फिर 1 दिन बुजुर्ग और जवान फिर से राजा के महल के पास आए और उसे बुलाया। राजा ताज और राजदंड लेकर नीचे आया। उसने कहा, अब तुम मुझे क्या कहना चाहते हो?

देखो मैं वो सब कुछ तुम्हें लौटा रहा हूँ जो तुम चाहते थे पर सबने कहा नहीं नहीं, आप ही हमारे असली राजा हैं। आपने राजी को साफ किया है बुरे लोगों को निकाल दिया है। हम आपको ही राजा मानते हैं, ताज आपका है और ये राजधन भी आपका है। राजा ने कहा, मैं नहीं, मैं खुश नहीं हूँ। जब तुम मुझे कमजोर और बुरा समझ रहे थे, तब तुम खुद भी कमजोर और बुरे थे अब जब सब कुछ ठीक है। वो तुम्हारी वजह से है। मैं तो सिर्फ तुम सबके मन की सोच हूँ, मैं सिर्फ तब तक हूँ जब तक तुम कुछ करते हो असली राजा तो तुम सब हो हकीकत में सिर्फ जानता है

जो अपने आपको चलाती। है। फिर राजा अपने महल में वापस चला गया। सब बुजुर्ग और जवान अपने अपने रास्ते चले गए और सब खुश थे और सब ने अपने आप को राजा समझा जैसे एक हाथ में ताज और दूसरे हाथ में राजदंड हो। एक आदमी ने दूसरे आदमी से कहा, बहुत पहले जब समुद्र का पानी चढ़ रहा था, मैंने अपनी लाठी से रेत पर एक लकीर लिखी थी और लोग आज भी रुक कर उसे पढ़ते हैं और ध्यान रखते हैं कि कोई उसे मेंटा न दे। दूसरे आदमी ने कहा मैंने भी रेत पर एक लकीर लिखी थी लेकिन जब समुंदर का पानी कम था तो बड़े

समुंदर की लहरों ने उसे मिटा दिया और बताओ तुमने क्या लिखा था? पहले आदमी ने जवाब दिया, मैंने लिखा था मैं वहीं। हूँ जो हूँ। पर तुमने क्या लिखा? दूसरे आदमी ने कहा मैंने लिखा था मैं सिर्फ इस बड़े समुंदर की एक बूंद हूँ। बचारे शहर में एक अच्छा राजा रहता था जिसे सब लोग प्यार और इज्जत देते थे। लेकिन एक बहुत गरीब आदमी था जो राजा से नाराज रहता था और हमेशा उसकी बुराइ करता रहता था। राजा को ये सब पता था फिर भी वो चुप था और सबर रखता था। फिर 1 दिन राजा ने सोचा और एक

ठंडी रात उस। आदमी के घर पर अपना नौकर भेजा, जिसके हाथ में एक बोरी आटा, एक साबुन और एक चीनी का टुकड़ा था। नौकर ने कहा राजा ने तुम्हारे लिए ये गिफ्ट भेजे हैं। ये तोहफे याद की निशानी के रूप में आदमी खुश हो गया। उसे लगा राजा ने उसकी इज्जत के लिए ये गिफ्ट भेजे हैं। घमंड में वो पादरी के पास गया और कहा, देखो राजा मुझे कितनी इज्जत दिखता है तुम्हें दिख नहीं रहा। विषप ने कहा, पादरी ने कहा कितना समझदार राजा है और तुम कितने अनजान हो?

वो तो बातों में बात करता है, सिंबल्स में, आटा तुम्हारे खाली पेट के लिए है, साबुन तुम्हारे गंदे बदन के लिए है और सीने तुम्हारी कड़वी जुबान के मीठा करने के लिए है। उस दिन के बाद आदमी खुद से भी शर्म आने लगा। उसका राजा के लिए गुस्सा और बढ़ गया और सबसे ज्यादा उसने पादरी को भी नाराजगी से देखना शुरू कर दिया जिसने राजा का राज़ उसके सामने खोल दिया था। लेकिन उसके बाद उसने बुराइ करना बंद कर दिया। तीन कुत्ते। धूप में आराम से बैठे थे और बातें कर रहे थे पहले कुत्ते सपने में

खोकर कहा कितना अच्छा है आजकल कुत्तों की दुनिया में जीना सोचो कितनी आसानी से हम समुद्र के नीचे, जमीन पर और आसमान में सफर कर लेते हैं? और ये भी देखो कितनी चीज़ें बनी हैं सिर्फ हमारे आराम के लिए, हमारी आँखों, कानों और नाक तक के लिए दूसरा कुत्ते ने कहा अब हम कला को भी ज्यादा समझने लगे हैं हम चाँद पर अब पहले से ज्यादा सुर से। भौंक सकते हैं। जब पानी में अपना चेहरा देखते हैं तो लगता है हम आजकल ज्यादा अच्छे दिखते हैं कल के मुकाबले में। फिर तीसरे कुत्ते ने कहा, मुझे तो सबसे ज्यादा ये अच्छा लगता है कि

सब कुत्ते के बीच शांति से समझ बनी हुई है। तभी तीनों कुत्तों ने देखा कि कुत्ते पकड़ने वाले आ रहे हैं। तीनों कुत्ते तुरंत उठकर भाग गए और गली में दौड़ गए और दौड़ते दौड़ते तीसरे कुत्ते ने कहा। भागो भाई, अपनी जान बचाओ। ये सभ्यता ये सिविलाइज़ेशन हमारे पीछे पड़ गई है। एक बार के राजकुमार के दरबार में एक नाचने वाली अपने म्यूजिशियन के साथ है। उसे कोर्ट में बुलाया गया और वो। राजकुमार के सामने लूट फ्लूट और जिधर की धुन पर नाचने लगी, उसने

आंख का डांस किया, तलवार और भाले का डांस किया, सितारों का डांस और आसमान का डांस किया। फिर उसने हवा में फूलों का डांस भी किया। नाच के बाद वो राजकुमार के तख्त के सामने खड़ी हो गई और झुक कर सलाम किया। राजकुमार ने उसे पास बुलाया और कहा सुंदर औरत खुशी और आनंद की बेटी तुम्हारा कला कहाँ से आती है?

तुम कैसे अपने नाच और गीत में सब कुछ चला लेती हो? नचने वाली ने दोबारा झुककर राजकुमार को सलाम किया और कहा, महान और दयालु राजकुमार मुझे आपके सवालों का सही जवाब नहीं पता, बस इतना ही जानती हूँ। सोचने वाली की आत्माउस के शर्म होती है, कवि की आत्माउस के दिल में होती है गाने वाली की आत्माउस के गले के आसपास होती है, लेकिन नाचने वाली की आत्माउस के पूरे शरीर में होती है। एक शाम दो फरिश्ते शहर के गेट पर मिले। दोनों ने एक दूसरे से हैलो कहा और

बातें की। एक फरिश्ते ने पूछा आज कल क्या कर रहे हो? तुम्हें कौन सा काम दिया गया है? दूसरे फरिश्ते ने कहा। मुझे एक ऐसा इंसान का रक्षक एक ऐसे इंसान का गार्डियन बनाया गया है जो बहुत बिगड़ चुका है। नदी के पास रहता है, बड़ा पापी है। ये काम बहुत जरूरी है और मैं मेहनत करता हूँ। पहले फरिश्ते ने कहा ये तो आसान काम है। मैं भी बहुत पापियों का रक्षक बन चुका हूँ। अब मुझे एक अच्छे संत का रक्षक बनाया गया है जो बगीचे में रहता है। ये काम बहुत मुश्किल और चालाकी

वाला है। पहले फरिश्ते ने पूछा ये कैसे हो सकता है? एक संत का गार्डियन बनना पापी के मुकाबले में मुश्किल कैसे हो सकता है? दूसरे फरिश्ते ने गुस्से में कहा मुझे मत सिखाओ, मैं तो सिर्फ सच कह रहा हूँ, मुझे लगता है तुम खुद ही अपने आप को बड़ा समझते हो, फिर दोनों फरिश्ते आपस में पहली बातों से। फिर हाथ और पंख से लड़ने लगे तभी एक बड़ा फरिश्ता वहाँ से गुजरा। उसने दोनों को रोका और कहा क्यों लड़ रहे हो, किस बात पर झगड़ा है ये तुम्हें पता नहीं। गार्डियन फरिश्ते के लिए झगड़ना

अच्छा नहीं लगता? बताओ क्या बात है? दोनों फरिश्ते एक साथ बोलने लगे। हर कोई कहता कि उसका काम ज्यादा मुश्किल है, इसलिए उसे ज्यादा इज्जत मिलनी चाहिए। बड़े फरिश्ते ने सर हिलाया सोचा फिर कहा दोस्तों मैं अभी नहीं कह सकता, कौन ज्यादा इज्जत के लायक है?

लेकिन मेरे पास पावर है तो शांति के लिए और अच्छे गार्डियनशिप के लिए। अब तुम दोनों एक दूसरे का काम करो, अब जाओ और अपने नए काम को एन्जॉय करो। फरिश्ते वहाँ से चले गए, लेकिन दोनों ने पीछे मुड़कर गुस्से से बड़े फरिश्ते को देखा। और दोनों अपने दिल में सोच रहे थे। ये बड़ा फरिश्ता भी ना हर दिन हमारी जिंदगी और मुश्किल कर देता है। लेकिन बड़े फरिश्ता वहाँ खड़ा रहा और फिर सोचा हमें भी अपने गार्डियन फरिश्ते पर नजर रखनी पड़ती है। पहाड़ों में एक आदमी रहता था, उसके पास एक पुरानी मूर्ति थी जो

किसी बड़े कलाकार ने बनाई थी। वो मूर्ति उसके घर के दरवाजे पर उल्टी पड़ी रहती थी और उस आदमी को उसकी कोई परवाह नहीं थी। 1 दिन शहर का एक समझदार आदमी वहाँ से गुजरा। उसने मूर्ति देखी और उस आदमी से पूछा कि क्या वो मूर्ति बेचेगा?

मूर्ति का मालिक हंसकर कह रे ये बोरे और गन्दी पत्थर को कौन खरीदना चाहेगा? शहर वाले आदमी ने कहा मैं तुम्हें इसके लिए एक चांदी का सिक्का दूंगा। पहाड़ी आदमी हैरान भी हुआ और खुश भी। फिर मूर्ति को हाथी पर चढ़ाकर शहर ले जाया गया। काफी दिन बाद वो पहाड़ी आदमी शहर आया तो देखा है एक दुकान के बाहर भीड़ लगी है। वो एक आदमी ज़ोर ज़ोर से कह रहा था। आओ दुनिया की सबसे खूबसूरत सबसे लाजवाब मूर्ति देखो सिर्फ दो चांदी के सिक्के लगते हैं। इस महान कलाकार के काम को देखने के लिए पहाड़ी आदमी ने दो चांदी

के सिक्के दिए और अंदर गया उसी मूर्ति को देखने। जो उसने खुद सिर्फ एक चांदी के सिक्के में बेची थी। एक बार एक चौराहे पर एक गरीब का भी और एक अमीर बेवकूफ मिले और दोनों बातें करने लगे। जो भी दोनों ने कहा उसमें सिर्फ उनकी परेशानी ही दिख रही थी। तभी रोड का एक फरिश्ता वहाँ से गुजरा और उसने दोनों के कंधे पर हाथ रखा और देखो एक चमत्कार हो गया। दोनों ने अपनी चीजें आपस में बदल ली। फिर दोनों अलग हो गए। लेकिन अजीब बात ये थी। कवि ने देखा कि उसके हाथ में

सिर्फ सूखी रेत बच गई थी और बेवकूफ ने अपनी आँखें बंद की और उसके दिल में सिर्फ बादल ही था। एक औरत ने एक आदमी से कहा मैं तुमसे प्यार करती हूँ आदमी ने कहा मेरा दिल चाहता है। कि मैं तुम्हारे प्यार के लायक बन सकूँ। औरत ने कहा, तो क्या तुम मुझे प्यार नहीं करते?

आदमी बस उसे देखता रहा, कुछ नहीं कहा। फिर औरत ज़ोर से बोली मैं तुमसे नफरत करती हूँ। आदमी ने कहा तू मेरा दिल चाहता है। कि मैं तुम्हारी नफरत के भी लायक बन सकूँ। एक आदमी ने सपना देखा और जब वो उठा तो अपने ज्योतिषी के पास गया और बोला कि उसका सपना समझा दे। ज्योतिषी ने कहा। जब तुम जागते हुए सपने देखते हो तो उनका मतलब मैं बता सकता हूँ लेकिन जो सपने तुम सोते हुए देखते हो उनका मतलब ना मेरे ज्ञान में है ना तुम्हारी सोच में। एक पागल खाने के बगीचे में मेरी

मुलाकात एक जवान लड़के से हुई जिसका चेहरा सफ़ेद, खूबसूरत और हैरानी से भरा था। मैं उसके पास ब्रिज पर बैठ गया और पूछा, तुम यहाँ क्यों हो? उसने मुझे हैरानी से देखा और कहा। ये सवाल थोड़ा अजीब है, फिर भी मैं जवाब देता हूँ, मेरे पापा चाहते थे मैं उनकी तरह हो जाऊं। मेरा चाचा भी यही चाहता था। मेरी माँ चाहती थी मैं उसके समंदर पर जाने वाले पति की तरह हो जाऊं जैसे उन्होंने मुझे एक मिसाल लिया था। मेरा भाई चाहता था मैं उसकी तरह एक अच्छा खिलाड़ी बन जाऊं और मेरे

टीचर्स भी फिलॉसफी के डॉक्टर, म्यूसिक, मास्टर और लॉजिक वाले सब चाहते थे। मैं बस उनका ही परछाई बन जाऊं। आईने में उनका ही चेहरा दिखे। इसलिए मैं यहाँ आ गया। यहाँ मुझे ज़्यादा नॉर्मल लगता है। कम से कम मैं अपना असली रूप तो रह सकता हूँ। फिर अचानक उसने मुझसे पूछा लेकिन बताओ क्या तुम्हें भी यहाँ पढ़ाई और अच्छे मशवरे ने ला दिया? मैंने जवाब दिया, नहीं मैं तो बस मेहमान हूँ। वो बोला अच्छा तो तुम उन लोगों में से हो जो दीवार के उस पार वाले पागलखाने में रहते हैं।

एक गर्मियों के दिन एक मेंढक ने अपने साथी से कहा, मुझे लगता है जो लोग किनारे वाले घर में रहते हैं। उन्हें हमारी रात की आवाजों से परेशानी होती होगी। उसके साथी ने कहा तो क्या वो दिन में अपनी बातों से हमारी शांति खराब नहीं करते? फ्रोग ने कहा, लेकिन हमें ये नहीं बोलना चाहिए कि शायद हम रात को ज्यादा गाते हैं। साथी ने कहा और हमें ये भी नहीं भूलना चाहिए कि वो दिनभर बकबक और चिल्लाते रहते हैं। राग ने कहा, और वो बड़ा में ढक्का क्या जो पूरे आसपास में अपनी तेज आवाज से सबको परेशान कर रहा है?

साथी ने कहा। और तुम पॉलिटिशंस पेस्ट्स और साइंटिस्ट का क्या कहना चाहोगे? जो है आकर हवा को शोर से भर देते हैं फ्रॉग ने कहा चलो इंसानों से अच्छा बने, रात को चुप रहे, अपना गाना दिल में ही रखें, चाहे चाँद हमें बुलाए। छह तारे हमें याद करें कम से कम एक दो रात या तीन रात के लिए तो चुप रहे। साथी ने कहा ठीक है, मैं मान गई देखते हैं तुम्हारा दिल क्या करता है। उस रात फ्रॉक्स चुप रहे, दूसरी रात भी चुप रहे। तीसरी रात भी आवाज़ नहीं निकली। लेकिन अजीब बात यह हुई जो बातें

करने वाली औरत ले के किनारे वाले घर में रहती थी। तीसरे दिन ब्रेकफास्ट पर ज़ोर से अपने पति से बोली, मैं 3 दिन से सो नहीं पाई। जब फ्रॉक्स आवाज करते थे तब तो मैं आराम से सोती थी। अब कुछ तो हो गया है फ्रॉक्स तीन रात से नहीं गाये और मैं पागल हो गई हूँ बिना नींद के फ्रोग ने ये सुना अपने साथी की तरफ आंख मार के कहा और हम भी तो चुप रह कर पागल ही हो गए थे, है ना? साथी ने कहा हाँ रात की चुप। हम पर भी भारी थी। अब तो मुझे लगता है हमें दूसरों के सुकून के लिए अपना गाना बंद करने की जरूरत नहीं है जब वो खुद

अपनी खाली ज़िन्दगी शोर से भरते हैं और उस रात चाँद ने उनको बुलाया और तारे भी। और फ्रॉक्स ने फिर से गाना शुरू कर दिया। बहुत सालों पहले एक बड़ा राजा था और वो समझदार भी था। वो चाहता था कि अपने लोगों के लिए कुछ कानून बनाए। उसने 11000 अलग अलग कबीलों के 11000 समझदार लोगों को अपनी राजधानी में बुलाया ताकि वो कानून लिख दे और ये सब हो भी गया। पर जब राजा के सामने वो 1000 पर्सियों पर लिखे हुए 1000 कानून रखे गए और राजा ने उन्हें पढ़ा। तो उसका दिल दुख से भर गया। उसे लगा कि उसने कभी सोचा भी नहीं

था कि उसके राज्य में क्राइम के इतने 1000 तरीके भी होते हैं। फिर राजा ने अपने लिखने वाले आदमी को बुलाया और अपनी मुस्कराहट के साथ खुद ही कानून लिखवाए। और राजा के कानून सिर्फ सात थे। सेवेन वो 1000। समझदार आदमी गुस्से में राजा को छोड़कर वापस अपने अपने कबीलों को चले गए और अपने ही बनाए हुए 1000 कानून अपने लोगों को दे दिए। हर कबीला अपने समझदार आदमी के कानून मानता रहा इसलिए आज तक उनके पास 1000 कानून है। वो एक बड़ा देश है पर उसमें 1000 जेल भी हैं और हर जेल औरत मर्दों

से भरी हुई है, जो उन 1000 कानूनों को तोड़ देते हैं। हाँ, वो एक बड़ा देश है पर उसके लोग 1000 कानून बनाने वालों के वन सज है और सिर्फ एक ही समझदार राजा के। मैंने अपने दोस्त से कहा देखो वो लड़की उस आदमी का हाथ पकड़ कर खड़ी है। कल तक तो वो मेरे हाथ पर ही थी। दोस्त ने कहा और कल वो मेरे हाथ पर होगी, मैंने कहा देखो वो उसके बिल्कुल पास बैठी है, कल तक मेरे पास बैठी थी। दोस्त ने जवाब दिया कल मेरे पास बैठी होगी, मैंने कहा देखो। वो उसके कब से शराब पी रही है कल तक तो वो मेरे कब से पी रही थी?

दोस्त ने कहा कल मेरे कब से पीयेगी फिर मैंने कहा देखो वो उसे प्यार भरी नजर से देख रही है। कल तक मुझे ऐसे ही देखती थी, दोस्त ने कहा कल मुझे ऐसे देखेगी, मैंने पूछा। क्या तुम सुन नहीं रहे? अब वो उसके कान में प्यार भरे गीत गा रही है। कल तक यही गीत मेरे कान में गाई थी। दोस्त ने कहा और कल मेरे कान में गाएगी। मैंने कहा देखो अब तक वो उसे गले लगा रही है, कल तक मुझे ही गले लगा रही थी। दोस्त ने कहा। कल मुझे गले लगाएगी। फिर मैंने कहा ये लड़की कितनी अजीब है।

दोस्त ने कहा वो जिंदगी की तरह है, सबकी है, मौत की तरह सबको अपनाती है और अनंत की तरह रेटरनिटी की तरह सबको अपने अंदर ले लेती है। 1 दिन एक फिलॉसफर पुराने जूतों के साथ मोची की दुकान पर आया। फिलॉसफर ने कहा, मेरे जूते ठीक कर दो। मोशी ने कहा, अभी मैं किसी और के जूते ठीक कर रहा हूँ। और भी कुछ जूते हैं जो पहले ठीक करने हैं पर तुम अपने जूते हैं छोड़ दो और ये दूसरा जोड़ा आज पहन लो कल आना, अपने जूते लेने फिलॉसोफर नाराज हो गया और कहा मैं किसी और के जूते नहीं पहनता, सिर्फ अपने ही पहनता हूँ।

मुंशी ने कहा, तो फिर? क्या तुम सच में फिलॉसफर हो और किसी दूसरे के जूतों में अपने पैर नहीं डाल सकते? इसी रोड पर एक और मोक्ष है, जो फिलॉसफर को मुझसे ज्यादा समझता है। तुम उसके पास चले जाओ, अपने जूते ठीक करवाने। अंठियोज शहर में जहाँ 80 नदी समुद्र से मिलती है, एक पुल बनाया गया था ताकि शहर को दोनों हिस्से को एक दूसरे के करीब लाया जा सके। ये ब्रिज ये पुल बड़े बड़े पत्थरों से बनाया गया था। जो पहाड़ों से एंटीओच के खच्चरों की पीठ पर लाए गए थे। जब पुल तैयार हो गया तो उसके एक

पिलर पर ग्रीक और ऐरमेनिक में लिखा गया ये पुल किंग एंटीओच सेकंड ने बनवाया है। सब लोग सच्चे ब्रिज पर चलकर ऐसी नदी को पार करने लगे। एक शाम एक जवान लड़का जिसे कुछ लोग थोड़ा पागल भी कहते थे उस पिलर के पास गया जहाँ ये लिखा था उसने उस लिखाई को कोयले से ढक दिया और ऊपर लिख दिया इस ब्रिज के पत्थर पहाड़ों से। खच्चरों ने लाए थे। जब तुम इस पर इधर उधर जाते हो तो तुम एन्ट्यूज के खच्चरों की पीठ पर सफर कर रहे हो। जो इस पुल के असली बिल्डर हैं। लोगों ने जब ये पढ़ा, कुछ हंस पड़े, कुछ हैरान हो गए।

कुछ ने कहा हाँ हम जानते हैं किसने ये लिखा है। क्या ये थोड़ा पागल नहीं है? लेकिन एक खच्चर ने दूसरे खच्चर से हंसकर कहा याद है, हमने ही ये पत्थर उठवाए थे। फिर भी अब तक तो यही बोला जा रहा था कि पुल राजा ने बनवाया है। जाट के रास्ते पर एक मुसाफिर एक गांव वाले आदमी से मिला। मुसाफिर ने एक बड़ा खेत दिखाते हुए पूछा क्या यही वो जगह है जहाँ राजा हेलाम ने अपने दुश्मनों को हरा दिया था?

गांव वाले ने जवाब दिया ये कभी भी युद्ध का मैदान नहीं था। इस खेत पर एक समय जाद का एक बड़ा शहर था जो जलकर राख हो गया, लेकिन अब तो अच्छा खेत है, है ना? फिर मुसाफिर और आदमी अलग हो गए। आधे मिल आगे मुसाफिर को एक और आदमी मिला। उसने फिर से उसी खेत की तरफ इशारा करके पूछा तो यही है जगह यहाँ जाद का बड़ा शहर था। आदमी ने जवाब दिया, यहाँ कभी कोई शहर नहीं था, लेकिन एक समय यहाँ एक मठ था। जो साउथ कंट्री के लोगों ने बर्बाद कर दिया था। थोड़ी देर बाद मुसाफिर को तीसरा आदमी मिला और फिर से खेत की तरफ

दिखा कर बोला, क्या ये सच है की यहाँ एक बड़ी मठ थी। आदमी ने जवाब दिया, इस इलाके में कभी कोई मठ नहीं था। लेकिन हमारे दादा परदादा कहते थे कि एक समय यहाँ एक बड़ा आसमानी पत्थर गिरा था। मुसाफिर हैरान होकर आगे चला। फिर उसने एक बहुत बूढ़े आदमी से मिला उसे सलाम किया और कहा, सर। मैंने इस रास्ते पर यहाँ के तीन अलग अलग लोगों से खेत के बारे में पूछा पर हर किसी ने दूसरी की बात को छूटा दिया और हर किसी ने एक नई कहानी सुनाई जो दूसरे ने नहीं सुनाई।

बूढ़ा आदमी सर उठाकर कहा मेरे दोस्त। इन सब लोगों ने वही सच बताया जिन्होंने जाना, लेकिन बहुत कम लोग हैं जो अलग अलग सच को जोड़कर एक पूरी सच्चाई बना सकते हैं। 1 दिन दो आदमी रास्ते पर मिले अलमरकर। सलामी शहर की तरफ चल पड़े। दोपहर में वह दोनों एक बड़े नदी के पास आए। यहाँ पुल नहीं था, या तो उन्हें तैरकर पर जाना था या कोई नया रास्ता ढूंढना था जो उन्हें पता नहीं था। दोनों ने एक दूसरे से कहा चलो तैरकर पार करते हैं। वैसे भी नदी इतनी भी चौड़ी नहीं

है। फिर दोनों पानी में कूद गए और तैरने लगे। एक आदमी जो हमेशा नदियों को जानता था, बीच में जाकर परेशान हो गया और तेज पानी के साथ बहने लगा। दूसरा आदमी जिसे कभी तैरना नहीं आता था, सीधा नदी पार कर गया। और दूसरे किनारे पर खड़ा हो गया। उसने देखा उसका साथी अभी भी नदी में संघर्ष कर रहा है तो फिर से पानी में कूदा और उसे भी सुरक्षित किनारे ले आया, जिसे पानी बहाकर ले जा रहा था। उसने पूछा, पर तुमने तो बोला था कि तुम्हें तैरना नहीं आता?

फिर तुम? इतनी आसानी से नदी कैसे पार करके दूसरे आदमी ने कहा मेरे दोस्त क्या तुम ये बेल्ट देख रहे हो जो मैंने बांध रखी है? इसमें सोने के सीके हैं जो मैंने अपनी पत्नी और बच्चों के लिए 1 साल मेहनत करके कमाए हैं। इसी बेल्ट के वजह से मुझे नदी पार करवा दिया। क्योंकि मेरी बीवी और बच्चे मेरे कंधे पर थे जब मैं तैर रहा था और फिर दोनों मिलकर सलामी इसकी तरफ बढ़ गए। एक पेड़ ने एक आदमी से। कहा, मेरी जड़ गहरी लाल मिट्टी में है और मैं तुम्हें। अपने फल दूंगा।

आदमी ने पेड़ से कहा हम दोनों कितने मिलते जुलते हैं। मेरी जड़ भी लाल मिट्टी में ही है। लाल मिट्टी तुम्हें ताकत देती है ताकि तुम मुझे फल दे सको और लाल मिट्टी मुझे ये सिखाती है कि मैं तुमसे। शुक्रिया के साथ फल ले सको, पूर्णिमा की रात थी चाँद अपनी रौशनी में शहर पर चमक रहा था और शहर के सभी कुत्ते चाँद को देख कर भौंकने लगे सिर्फ एक। कुत्ता नहीं भांका। और उसने सब कुत्तों से गंभीर आवाज में कहा शांति को उसकी नींद से मत जगाओ और अपनी भौंक से चाँद को जमीन पर मत लाओ।

तब सब कुत्ते चुप हो गए और माहौल में एक गहन सन्नाटा छा गया। लेकिन इस कुत्ते ने सबको चुप होने को कहा था। वही कुत्ता पूरी रात उस सन्नाटे के लिए खुद भौंकता रहा। एक तपस्वी प्रॉफिट रहता था और हर महीने में तीन बार वो बड़े शहर जाकर बाजार में लोगों को देने। और बांटने की बात नहीं करता था। वो बहुत अच्छा बोलता था और उसकी बड़ाई दूर दूर तक फैली थी। एक शाम तीन आदमी उसके झोपड़ी में आए। उसने उनका स्वागत किया। उन्होंने कहा, तुम लोगों को देने और बांटने की बात सिखाते हो? और जिनको ज्यादा मिला है उन्हें

सिखाते हो कि वो कम वालों को दे, हम यही करते हैं कि तुम्हें भी तुम्हारी बड़ाई से कुछ दौलत मिली होगी। अब तुम हमें अपने दौलत से कुछ दे दो क्योंकि हम जरूरतमंद हैं हर्मिट ने तपस्वी ने जवाब दिया। दोस्तों मेरे पास सिर्फ ये बेड है, ये चटाई और पानी का एक घड़ा है। अगर तुम्हें चाहिए तो ले लो। मेरे पास सोना या चांदी कुछ भी नहीं है। तब उन्होंने उसको ऊपर से नीचे देखा, नफरत से मुँह फेर लिया और आखिरी आदमी कुछ देर। दरवाजे पर खड़ा रहा। फिर बोला अरे तुम तो धोखेबाज हो,

झूठे हो तुम वो सब सिखाते हो जो खुद कभी नहीं करते। एक अमीर आदमी था जो अपने वाइन रखने की जगह और वहाँ की वाइन पर बहुत गर्व करता था। उसके पास एक पुरानी वाइन का जग था, एक वाइन का मटका था जो सिर्फ किसी खास मौके के लिए संभाल कर रखा था, जो सिर्फ उसको ही पता था। 1 दिन राज्य का गवर्नर उसके घर आया और उसने सोचा ये मटका सिर्फ एक गवर्नर के लिए नहीं खोला जाएगा। फिर पादरी आया, लेकिन उसने सोचा नहीं मैं यह मटका नहीं खोलूंगा, पादरी को इसकी कीमत समझ नहीं

आएगी, न ही उसके नाक तक इसकी खुशबू जाएगी। फिर राजकुमार उसके साथ खाना खाने आया और उसने सोचा। ये व्हाई नेक छोटे राजकुमार के लिए ज्यादा खास है। जब उसके भतीजे की शादी हुई उसके नेफ्यू की तब भी उसने सोचा नहीं ये मटका इन मेहमानों के लिए नहीं खोलूंगा। साल बीत गए, वह आदमी बूढ़ा हो गया और उसकी मौत हो गई और बाकी सब बीच। और एक कॉर्न की तरह वो भी जमीन में दफनाया गया। उसकी मौत के दिन वो पुराना मटका, बाकी मटकों के साथ निकाला गया और आसपास के गांव के आम लोगों ने

बांट लिया। कोई नहीं जानता था कि ये मटका कितना पुराना है उन लोगों के लिए। जो भी प्याले में डाला जाता है, वो सिर्फ शराब ही है। कई सदियों पहले एथेंस जाने वाले रास्ते पर दो कवि मिले और दोनों मिलकर खुश हो गए। एक कवि ने दूसरे से पूछा। आजकल क्या लिखा है तुमने और तुम्हारा बजाने का साहस कैसा चल रहा है?

दूसरे कवि ने गर्व से जवाब दिया, मैंने अभी अभी अपनी सबसे बड़ी कविता पूरी की है। शायद ग्रीक में लिखी गई सबसे बड़ी कविता है। ये ज्यूस की प्रार्थना। है। फिर उसने अपने चौगे के अपने क्लो के नीचे से एक कागज़ निकाला और कहा, ये देखो मेरे पास है, मैं तुम्हें सुनाना चाहता हूँ। चलो उस सफेद सिप्रस के पेड़ के साये में बैठते हैं। कवि ने अपनी कविता पढ़कर सुनाई। ये बहुत लंबी कविता थी। दूसरे कवि ने प्यार से कहा ये बहुत बढ़िया कविता है। ये सदियों तक जिंदा रहेंगी और

तुम्हारा नाम इसमें अमर हो जाएगा। पहले कवि ने शांति से पूछा और तुमने आजकल क्या लिखा? दूसरे कवि ने कहा मैंने बस थोड़ा लिखा है सिर्फ आठ लाइन। एक बच्चे की याद में लिखी जो गार्डन में खेल रहा था और उसने वो लाइन सुनाई। पहले कवि ने कहा इतनी बुरी भी नहीं ठीक है और दोनों अलग हो गए और अब 2000 साल बाद दूसरे कवि की वो आठ लाइन हर जुबान में पढ़ी जाती है। सबको पसंद और प्यारी लगती है और पहले कवि की बड़ी कविता लाइब्रेरी और स्कॉलर्स के कमरे में जरूर रखी

है। लोगों को याद है लेकिन ना वो प्यार से पढ़ी जाती है ना किसी को पसंद आती है। तीन आदमी दूर से एक सफेद घर को देख रहे थे जो एक हरी पहाड़ी पर अकेले खड़ा था। उनमें शेख ने कहा, ये लेडी रूथ का घर है, वो एक बूढ़ी जादूगरनी है। दूसरे ने कहा तुम गलत हो। लेडी रूथ एक खूबसूरत औरत थी जो अपने सपनों में ही रहती थी। तीसरे ने कहा दोनों गलत हो। लेडी रूथ इस बड़े खेत की मालिक है और अपने मज़दूरों का खून चूस लेती थी। तीनों चलते चलते लेडी रूस के बारे में बातें करते रहे।

फिर एक। चौराहा पर उनकी मुलाकात एक बूढ़े आदमी से हुई और उनमें सेठ ने पूछा, ज़रा हमें बताओ लेडी रूस कौन थी जो सफेद घर में रहती थी? बूढ़े आदमी ने मुस्कराया और कहा, मैं 90 साल का हूँ और मुझे याद है जब मैं छोटा था, लेडी रूस को देखा था। लेकिन लेडीज तो 80 साल पहले ही मर चुकी है। अब तो घर खाली है। वहाँ बस उल्लू रात को बोलते हैं और लोग कहते हैं कि वो जगह भूतिया है। एक शाम एक कवि और एक किसान मिले। कवि थोड़ा दूर दूर था और किसान शर्मिला था। फिर भी दोनों बात करने लगे। किसान ने कहा, मैं तुम्हें एक

छोटी सी कहानी सुनाता हूँ जो मैंने अभी अभी सुनी। एक चूहा एक जाल में फंस गया और जब वो खुशी खुशी वहाँ रखी चीज़ खा रहा था, एक बिल्ली उसके पास आ गई। चूहा थोड़ा। डरा लेकिन उसे पता था कि वो जाल के अंदर सेफ है तो बिल्ली बोली ये तुम्हारा आखिरी खाना है मेरे दोस्त चूहे ने कहा हाँ मेरी एक ही जिंदगी है तो एक ही मौत होगी लेकिन तुम्हारा क्या मैंने सुना है तुम्हारी नौ जिंदगी होती है? नाइन?

क्या इसका मतलब तुम्हें नौ बार मरना पड़ेगा? किसान ने कवि की तरफ देखा और कहा ये कहानी कितनी अजीब है, है ना? कवि ने कुछ जवाब नहीं दिया। बस चला गया और अपने दिल में सोचता रहा सच्ची बात है। हमारी भी नौ जिंदगियां हैं, नौ बार मरना भी पड़ेगा। शायद बेहतर होता एक ही जिंदगी हो, जाल में फंसी हो और आखिरी खाना मिल जाए ये किसान की जिंदगी की तरह जिसके पास अंतिम खाने के लिए थोड़ी चीज़ हो पर फिर भी क्या हम भी रेगिस्तान और जंगल के शेर जैसे नहीं हैं?

एक समुद्र के बूढ़े आदमी ने मुझसे कहा। 30 साल पहले एक जहाजी एक सेलर मेरी बेटी को लेकर भाग गया था। मैंने दोनों को दिल से बददुआ दी क्योंकि पूरी दुनिया में मुझे सिर्फ अपनी बेटी से ही प्यार था कुछ दिन बाद। वो सेलर वो जहाजी अपने शिप के साथ समंदर में डूब गया और उसके साथ मेरी प्यारी बेटी भी मुझसे हमेशा के लिए चली गई। अब मुझे देखो मैं एक नौजवान और एक लड़की का कातिल हूँ, मेरी बदुआ ने ही उन्हें बर्बाद कर दिया। अब जब जिंदगी के अंतिम सफर पे हूँ

तब बस ऊपर वाले से माफी मांग रहा हूँ ये सब बूढ़े आदमी ने कहा लेकिन उसकी बातों में कुछ घमंड भी था। ऐसा लगा जैसे अभी भी अपने बद्दुआ की ताकत पर उसको थोड़ा गर्व है। एक आदमी था जिसके बाग में बहुत सारे अनार के पेड़ थे। हर साल पतझड़ में वह अपने घर के बाहर चांदी की थालियों पर अनार रख देता था और उन थालियों पर एक बोर्ड लगा देता था जिसमें लिखा होता था एक ले लो, कुछ भी देना हो तो दे दो। आपका स्वागत है, लेकिन लोग आते जाते रहे, किसी ने भी अना नहीं

लिया। फिर उस आदमी ने सोचा और अगले साल में उसने घर के बाहर अनार नहीं रखे। सिर्फ एक बड़ा बोर्ड लगा दिया। यहाँ मिलते हैं देश के सबसे अच्छे अनार। लेकिन ये किसी भी दूसरे या नाट से ज़्यादा कीमती है और अब देखो आसपास के सब लोग, औरतें और आदमी दौड़कर अनार खरीदने आ गए। किलाफिश शहर में एक सोचने वाला मंदिर की सीढ़ियों पर खड़ा होकर। बहुत सारे देवताओं की बात करता था। लोग अपने दिल में सोचते थे ये सब तो हम जानते हैं कि ये देवता हमारे साथ नहीं रहते, जहाँ भी हम

जाते हैं। थोड़े दिन बाद एक और आदमी बाजार में आया और लोगों से कहा कोई भगवान नहीं है। और बहुत से लोग ये सुनकर खुश हो गए क्योंकि वो भगवान से डरते थे। फिर 1 दिन एक और आदमी आया जो बहुत अच्छा बोलता था। उसने कहा सिर्फ एक ही भगवान है। अब लोग घबरा गए क्योंकि उनके दिल में एक भगवान के न्याय का डर कई भगवानों से भी ज़्यादा था। उसी समय एक और आदमी आया और लोगों से कहा, तीन भगवान हैं जो हवा पर एक साथ रहते हैं और उनकी एक बड़ी दयालु माँ है जो उनकी साथी और बहन

भी है। सब लोग सुकून में आ गए क्योंकि उन्होंने सोचा। तीन भगवान एक ही बात पर कभी नहीं मिलेंगे तो हमारी गलतियाँ पर शायद माफी मिल जाए और उनकी माँ हमारी तरफदार बन जाएंगी। लेकिन आज भी खिलाफी शहर में लोग एक दूसरे से लड़ते रहते हैं। किसी को बहुत सारे भगवानो की बात अच्छी लगती है। किसी को किसी भगवान की नहीं, किसी को सिर्फ एक ही भगवान का विश्वास है, किसी को तीन भगवान एक साथ चाहिए, तो किसी को उनकी माँ एक अमीर आदमी था। उसकी एक जवान बीवी थी जो बिल्कुल बेहरी थी।

1 दिन सुबह जब दोनों नाश्ता कर रहे थे, बीवी बोली कल मैं बाजार गई थी। वहाँ डेमेस्कस से लाए हुए रेशम के कपड़े, इंडिया के दुपट्टे, परसिया के हार और यमन के कंगन बिक रहे थे। लगता है नए सौदागर ये सब ले आए हैं। और देखो मैं तो फटे कपड़ों में हूँ, फिर भी एक अमीर आदमी की बीवी हूँ, मुझे भी वो खूबसूरत चीजें चाहिए। हस्बैंड अपनी चाय पीते हुए कहा डियर कोई वजह नहीं कि तुम बाजार जा कर जो चाहो न खरीदो। बेहेरी बीवी बोली नहीं। तुम हमेशा कहते हो नहीं, नहीं

क्या मुझे अपने दोस्तों के सामने ये पुराने कपड़ों में जाके तुम्हारी दौलत और अपनी इज्जत को शर्मिंदा करना होगा? हस्बैंड ने कहा, मैंने नहीं नहीं कहा, तुम आराम से बाजार जाकर सबसे सुंदर कपड़े और गहने ले सकती हो जो यहाँ आए हैं। लेकिन बेबी फिर उसकी बात समझ नहीं पाई और बोली सभी अमीर आदमियों में तुम सबसे कंजूस हो। तुम मुझे कुछ भी खूबसूरत चीजें लेने नहीं देते, जबकि मेरी उम्र की दूसरी औरतें शहर के बगीचे में अच्छी पोशाक पहनकर चलती हैं और वो रोने लगी।

आंसू गिरते हुए बोली तुम मुझे हमेशा नहीं नहीं कहते हो, जब मुझे कोई कपडा या गहना चाहिए होता है तब हस्बैंड ने पिघल कर वो खड़ा हुआ, अपनी जेब से सोने के सिक्के निकाले और उसके सामने रख दिए प्यार से कहा जाओ बाजार जो चाहे ले आओ। उस दिन के बाद से बहरी जवान बीवी जब भी कुछ चाहती, तो आंसू भरी आंख से हज़्बंड के पास आ जाती और हज़्बंड चुपचाप सोने के सिक्के उसकी गोदी में रख देता। फिर हुआ ये वो जवान औरत एक ऐसे लड़के से प्यार कर बैठी जो हमेशा लंबी यात्रा पर रहता था।

जब भी वो लड़का शहर से दूर होता तो बीवी खिड़की पर बैठकर रोती रहती। जब हस्बैंड उसको ऐसे रोता देखता तो सोचता शायद कोई नया सौदागर आए हैं और बाजार में नए कपड़े और गहने आए हैं और वो चुपचाप सोने के सिक्के निकालकर उसके सामने रख देता। 1000 साल पहले लेबनन की पहाड़ियों पर दो फिलॉसफर मिले। एक ने दूसरे से पूछा तुम कहाँ जा रहे हो? दूसरे ने जवाब दिया, मैं जवानी के झरने की तलाश में हूँ। फाउंटेन ऑफ़ युथ की जो मुझे लगता है कि यही पहाड़ियों में कहीं है। मैंने कुछ लिखित पढ़े हैं।

इसमें लिखा है कि ये झरना सूरज की तरफ बहता है और तुम क्या ढूंढ रहे हो? पहले आदमी ने कहा मैं मौत के राज़ की तलाश में हूँ। फिर दोनों सोचने लगे कि सामने वाले को असली ज्ञान के कुछ नहीं पता और दोनों झगड़ा करने लगे। एक दूसरे पर अंत विश्वास का इलज़ाम लगाने लगे। तभी एक अनजान आदमी जो अपने गांव में सीधा साधा माना जाता था, वहाँ से गुजरा। उसने दोनों की तेज बहस सुनी। थोड़ी देर रुका और फिर उनके पास जाकर कहा, दोस्तों, मुझे लगता है तुम दोनों एक ही स्कूल ऑफ फिलॉसोफी से हो, बस अलग शब्दों

में बात कर रहे हो, एक जवानी के झरने को ढूंढ रहा है एक मौत के राज़ को, पर सच में ये दोनों एक ही हैं। दोनों तुम्हारे अंदर ही हैं। फिर वो आदमी हँसा बोला। अलविदा ज्ञानी और चला गया दोनों फिलॉसोफर कुछ पल छुप रहे फिर एक दूसरे को देख कर हंस दिए। उनमें से एक ने कहा, चलो क्यों न अब हम साथ मिलकर खोज करें। एक राजा ने अपनी रानी से कहा, मैडम तुम सच में रानी नहीं हो। तुम बहुत साधारण और बदतमीज हो, मेरे लायक साथी नहीं हो। रानी बोली जना आप खुद को राजा

समझते हैं, पर असल में आप सिर्फ एक बेकार आदमी है। ये बात सुनकर राजा को गुस्सा आ गया। उसने अपना राजदंड हाथ में लिया और सोने के। राजदंड से रानी के माथे पर मार दिया। तभी राजमहल का मुख्य सेवक अंदर आया और बोला अरे महाराज ये राजदंड हमारे देश का सबसे बड़ा कलाकार ने बनाया था। अफसोस एक दिनाब और रानी दोनों भूल जाएंगे। लेकिन ये राजदंड एक खूबसूरत चीज़ के रूप में पीढ़ी दर पीढ़ी संभाल कर रखा जाएगा। अब जब आपने अपनी रानी के सिर से खून निकाल लिया तो ये राजदंड और भी यादगार हो जाएगा।

पहाड़ियों के बीच एक औरत अपने बेटे के साथ रहती थी। और वो उसका पहला और अकेला बेटा था। लड़का बुखार से मर गया जब डॉक्टर उसके पास था। माँ गम में पागल सी हो गई और डॉक्टर से रोकर बोली बताओ बताओ क्या था जिसने उसकी कोशिश को चुप कर दिया और उसकी आवाज को खामोश कर दिया। डॉक्टर ने कहा वो बुखार था, माँ बोली बुखार क्या होता है? डॉक्टर ने जवाब दिया मैं समझा नहीं सकता। ये एक बहुत छोटी चीज़ है जो शरीर में आती है और हम अपनी आँखों से उसे देख नहीं सकते।

डॉक्टर चला गया औरत बस अपने आप से कहती रही। कुछ बहुत छोटा हम अपनी आँखों से नहीं देख सकते। शाम को पंडित उसकी तसल्ली देने आया। औरत फिर से रोकर बोली मेरा बेटा मेरा इकलौता बेटा मुझे क्यों छोड़ गया? पंडित ने कहा बेटी ये सब ऊपर वाले की मर्ज़ी है। औरत बोली ऊपर वाला क्या है?

और। ऊपर वाला कहाँ है? मैं ऊपर वाले को देखना चाहती हूँ ताकि अपना दिल पहाड़ कर उनके सामने रख सकूँ, अपने दिल का खून उनके पैरों में बहा सकूँ। बताइए मैं उन्हें कहाँ ढूंढूं पंडित ने कहा, ऊपर वाला बहुत बड़ा है उसे हम अपनी आँखों से नहीं देख सकते। तब औरत छींक कर बोली एक बहुत छोटी चीज़ ने मेरे बेटे को मार दिया एक बहुत बड़े भगवान की मर्जी से तो हम हैं क्या, हम क्या हैं?

उस वक्त उस औरत की माँ अंदर आई, उसके हाथ में बेटे के लिए कफन था। और उसने पंडित की बातें और बेटी की चीख सुन ली। उसने कफन रख दिया। बेटी का हाथ अपने हाथ में लेकर बोली बेटी हम ही बहुत छोटे भी हैं और बहुत बड़े भी। हम ही दोनों के बीच का रास्ता है। एक शाम एक आदमी और एक औरत एक घोड़ा गाड़ी में साथ सफर कर रहे थे। दोनों पहले भी मिल चूके थे। बाद में एक कवि था और जैसे ही वो औरत के पास बैठा उसने उसको खुश करने के लिए कई कहानियों सुनाई। कुछ अपनी लिखी हुई और कुछ दूसरों की।

लेकिन जब वो बात कर रहा था तभी वो औरत सो गई। अचानक गाड़ी झटका खा गई और वो उठ गई। फिर बोली मुझे तुम्हारा ज़ोना और व्हेल वाली कहानी का तरीका बहुत पसंद आया। कवि ने कहा, लेकिन मैडम मैं तो आपको अपनी खुद की कहानी सुना रहा था। एक बटरफ्लाई और एक सफ़ेद गुलाब की और कैसे दोनों एक दूसरे के साथ बिहेव् करते हैं। 1 जून के दिन घास ने एक पेड़ की छाया से कहा, तुम कभी दाएं, कभी बाएं घूमते रहते हो, इससे मेरी शांति खराब होती है। छाया ने जवाब दिया। मैं नहीं, मैं नहीं ऊपर देखो वहाँ एक पेड़ है जो हवा में इधर उधर

हिलता है। सूरज और जमीन के बीच तब घास ने ऊपर देखा और पहली बार पेड़ को देखा। उसने अपने दिल में सोचा रे, ये तो मुझसे भी बड़ी घास है और घास चुप हो गई। एक ब्रांच जिसमें फूल लगे थे, उसने पास वाली ब्रांच से कहा आज का दिन कितना बेकार और सोना लग रहा है। दूसरी ब्रांच ने भी कहा, हाँ, सच में सोना और बेकार है। तभी एक चिड़िया आई और एक ब्रांच पर बैठ गई। फिर एक और चिड़िया आई जो पास ही बैठी। थी। एक चिड़िया बोली, मेरा साथी मुझे छोड़कर चला गया। दूसरी चिड़िया ने फिर कहा, मेरा भी साथी चला गया और अब वो वापस

नहीं आएगा पर मुझे क्या फर्क पड़ता है? फिर दोनों चिड़ियाएं चहचहाने और झगड़ने लगी। ज़ोर ज़ोर से आबास करने लगी। अचानक दो और चिड़ियाए आसमान से उड़ी हुई हैं और वो दोनों चिड़ियों के पास शांत होकर बैठ गई और वहाँ सुकून और शांति हो गई। फिर वो चारों चिड़ियाए जोड़ियों में उड़ गई। तब पहली ब्रांच ने अपनी पड़ोसी ब्रांच से कहा। ये कितना तीखा सा जिगजग शोर था?

दूसरी ब्रांच ने कहा कुछ भी बोलो अब यहाँ दोनों तरफ सुकून और खुलापन है। अगर ऊपर आसमान में इतनी शांति हो सकती है तो मुझे लगता है नीचे रहने वाले भी शांति कर सकते हैं। क्या तुम हवा में? थोड़ा मेरे पास नहीं आओगे। पहली ब्रांच ने कहा शायद शांति के लिए जब तक ये बसंत खत्म नहीं होता और फिर वो तेज हवा के साथ झुककर अपने पड़ोसी ब्रांच को गले लगाने लगी। जवान कवि ने राजकुमारी से कहा मैं तुमसे प्यार करता हूँ राजकुमारी बोली मैं भी तुमसे प्यार करती हूँ

मेरे बच्चे कवि ने कहा, पर मैं तुम्हारा बच्चा नहीं हूँ, मैं एक आदमी हूँ और मैं तुमसे प्यार करता हूँ, राजकुमारी ने कहा, मैं तो। बेटा बेटियों की माँ हूँ और वो सभी अब अपने बच्चों के माँ बाप हैं। मेरी एक बेटी का बेटा तुमसे भी बड़ा है पर कवि ने फिर कहा लेकिन मैं तो तुमसे प्यार करता हूँ। ज्यादा वक़्त नहीं गुजरा। राजकुमारी की मौत हो गई पर जब उनका अंतिम सास जमीन के हवाले हो रहा था। तो उन्होंने अपने दिल में कहा मेरे प्यारे मेरे अकेले बेटे,

मेरे जवान कबी शायद 1 दिन हम फिर मिलेंगे और मैं तब 70 की नहीं होऊंगी। दो आदमी घाटी में चल रहे थे। एक आदमी ने ऊँगली से पहाड़ की तरफ इशारा किया और कहा। वहाँ जो छोटी झोपड़ी दिखती है उसमें एक ऐसा आदमी रहता है जो दुनिया से अलग हो चुका है। अब तो वो सिर्फ ऊपर वाले की तलाश में है और कुछ भी नहीं चाहता। दूसरा आदमी बोला वो ऊपर वाले को तब तक नहीं पाएगा जब तक वो अपनी झोपड़ी और अकेलापन छोड़कर। वापस हमारे बीच नहीं आता। हमारे सुख दुख में शामिल नहीं

होता। शादी में हमारे साथ नाश्ता नहीं या किसी की मौत पर हमारे साथ आंसू नहीं बहाता पहला आदमी अंदर से उसकी बातों से सहमत हो गया, पर फिर भी बोला मैं तुम्हारी बात मान लेता हूँ। लेकिन मुझे लगता है वो तपस्वी, वो हर अच्छा आदमी है। क्या ये भी नहीं हो सकता कि एक अच्छा आदमी अपनी दूरी से भी उतना ही फायदा करे जितना बहुत सारे दिखावा करने वाले अच्छे लोग करते हैं?

कदीशा घाटी में जहाँ एक बड़ी नदी बहती थी, वहाँ दो छोटी नदियां मिलीं और एक दूसरे से बात की। एक नदी ने कहा तू कैसे आए दोस्त तेरा रास्ता के साथ है। दूसरी नदी ने जवाब दिया, मेरा रास्ता बहुत मुश्किल। था। चक्की के पहिए टूट गए थे और वो किसान जो मुझे अपने पौधों तक ले जाता था, अब नहीं रहा। मैं धूप में आलस और गंदगी के साथ बस किसी तरह नीचे तक पहुंची। पर तेरा रास्ता कैसा था भाई?

पहली नदी ने कहा, मेरा रास्ता अलग था। मैं पहाड़ों से खुशबूदार फूलों और शर्मिले वीपिंग वीलोस के बीच से आई औरतें और आदमी मुझे चांदी के ग्लास से पीते थे। छोटे बच्चे अपने गुलाबी पांव मेरे किनारे पर डुबोते थे, हर तरफ हँसी थी और मीठी गाने सुनाई देते। थे। काश तेरा रास्ता भी तो नाखुश था तभी नदी जो बड़ी नदी थी वो ज़ोर से बोली आओ आओ हम सब समुद्र जा रहे हैं अब कुछ मत बोलो सिर्फ मेरे साथ आओ यहाँ आकर तुम अपना पूरा सफर चाहे वो उदासी वाला हो या खुशी वाला सब भूल जाओगे। आओ, हम दोनों अपने रास्ते भूल

जाएं जब हम अपनी माँ समंदर के दिल तक पहुँच जाएंगे। 1 दिन मई के महीने में खुशी और गम एक झील के किनारे मिले। दोनों ने एक दूसरे को सलाम किया और शांत पानी के पास बैठकर बातें करने लगे। खुशी ने दुनिया की खूबसूरती जंगल और पहाड़ों में हर दिन की नहीं ताजगी और सुबह शाम के गीतों की बात की। गम ने भी बात की और हर बात से सहमत हुआ क्योंकि गम भी उस पल के जादू और खूबसूरती को समझता था। गम ने भी खेतों और पहाड़ों की मई की बातें बड़े प्यार से की। खुशी और गम लंबी देर तक बात करते रहे और जो कुछ भी दोनों जानते थे

उस सब पर सहमत हो गए। तभी झील के दूसरे किनारे से दो शिकारी गुजर रहे थे। उनमें से एक ने पानी के उस पार देखकर कहा। ये दोनों कौन है? दूसरे ने कहा तुमने दोनों कहा, मैं तो सिर्फ एक ही देख रहा हूँ। पहले शिकारी ने कहा पर मैं तो दो देख रहा हूँ, दूसरे ने कहा मुझे तो बस एक ही नजर आ रहा है और पानी में भी एक ही चीज़ रिफ्लेक्शन है। पहले ने फिर कहा नहीं। दो हैं और पानी में भी दो ही चेहरे दिख रहे हैं। दूसरे ने कहा, मुझे तो बस एक ही दिखता है। पहले ने दोबारा कहा पर मुझे तो दो

बहुत साफ दिख रहे हैं और आज तक एक शिकारी कहता है कि दूसरा दो दो दिखता है जबकि दूसरा कहता है। मेरा दोस्त थोड़ा अंधा है। एक बार मेरी मुलाकात एक और मुसाफिर से हुई। वो भी थोड़ा पागल सा था और मुझसे कहा मैं एक वंडर हूँ, मैं एक घुमक्कड़ हूँ। मुझे अक्सर लगता है कि मैं जमीन पर बौनों के बीच चल रहा हूँ। क्योंकि मेरा सर उनके मुकाबले जमीन से 70 बिट ज्यादा ऊंचा है तो मेरे विचार भी उनसे ज्यादा ऊंचे और आजाद हो जाते हैं। लेकिन असल में मैं इंसानों के बीच

नहीं, उनके ऊपर चल रहा हूँ और वो बस मेरे पांव के निशान ही देख पाते हैं। जो मैं उनके खुले मैदानों में छोड़ जाता हूँ और मैंने अक्सर सुना है वो मेरे निशाने को लेकर बहस करते हैं। कुछ कहते हैं ये तो किसी बहुत पुराने हाथी के निशान है जो कभी जमीन पर घूमता था और कुछ कहते हैं नहीं। ये तो दूर सितारों से घिरे हुए की जगह है, पर तुम दोस्त तुम अच्छी तरह जानते हो कि ये सब बस एक घुमरकर के पांव के निशान हैं, एक वंडर के पांव के निशान हैं।

Transcript supplied by the publisher with the episode.

Podcast

SyllabuswithRohit

SyllabuswithRohit · Learning · Hindi

My channel covers a variety of subjects—books, stories, and more, all in Hindi. I share knowledge, ideas, and learning beyond the syllabus. For new episodes, please visit: https://www.youtube.com/@SyllabuswithRohit

More from SyllabuswithRohit All episodes →

  1. 28 May 2026 · 25 min

    Return to Tipasa (Hindi/हिंदी में)

    For five days, Algiers was drowned in unceasing rain. The city of summers had become a liquid gray landscape, its white walls steaming in the damp. Having fled the "night of Europe" and the weary, winter faces of the post-war years, I walked the wet streets, waiting. I saw my own aging reflected in the faces of men I had known in youth. I waited with a singular purpose: to return to Tipasa.It is often foolish to revisit the sites of one’s youth, to attempt to relive at forty the freedom of twenty. I knew this risk. I had returned once before, shortly after the war, hoping to rediscover the…

  2. 27 May 2026 · 10 min

    The Code of Reality (Hindi/हिंदी में)

    The Universe's Code: Are We Living in a Mathematical Simulation?1. The Illusion of Stuff Look at your hand. It feels solid and warm. You think you are touching "stuff." You are wrong. Physics says atoms are mostly empty space. That solid feeling is just a "force field" (the Pauli Exclusion Principle). It’s a mathematical rule that keeps particles apart. When you touch a table, you aren't touching it; your electrons are just pushing away its electrons. If you zoom in, molecules become atoms, then subatomic particles, then energy fields. At the bottom, "stuff" disappears. Only numbers remain.…

  3. 26 May 2026 · 1 hr 29 min

    The Apology (Hindi/हिंदी में)

    Long ago, in the city of Athens, a man named Socrates was put on trial. He was accused of two things: teaching bad ideas to young people and not believing in the gods of the city. Socrates stood before the judges and citizens and tried to explain himself. This speech was called The Apology, but it was not really saying “I’m sorry.” It was a defense speech, where he tried to show he had done nothing wrong.Socrates began by saying that his accusers had spoken very smoothly and very well, so well that even he almost forgot who he was. But he said that they had spoken many lies. They told the…

  4. 25 May 2026 · 26 min

    The Science of Gratitude & How to Build a Gratitude Practice

    Original Episode: https://www.youtube.com/watch?v=9gJLWk3W5GQScientists have learned a lot about gratitude. Gratitude means noticing and appreciating the good things that happen in life. It can help both mental health and physical health in many strong and lasting ways.Many people think gratitude practice means writing a list of things you are thankful for. But research shows that this is not the most effective way. Real gratitude practice works very differently, and the science behind it is surprising.Why Gratitude MattersStudies show that doing a gratitude practice once, twice, or a few…

  5. 24 May 2026 · 11 min

    Media Aur Power

    Mass media looks free, fair, and honest from the outside. It says it tells the truth and supports democracy. But inside, most media works in a way that helps powerful people. These powerful people include the government, big companies, rich owners, and strong leaders. Because of this, the media often chooses news that is safe for power and avoids news that can cause trouble for power.The big question is: who decides what becomes news? Who decides what is shown again and again, what is hidden, and how a story is told? Many times, stories that challenge powerful people are ignored or shown in…

  6. 22 May 2026 · 11 hr 35 min

    Foundations of Engineering

    📌 Notes / ScriptDesktop Version: https://docs.google.com/document/d/1lX05hTMYB0WRwDgj-iFY2Up5mZCD3Fhm/edit?usp=drive_link&ouid=100280508896591360428&rtpof=true&sd=trueMobile-Readable Format: https://drive.google.com/file/d/1aLn2_fBrlrOAMEs35si_BN7B9cpzOeuL/view?usp=drive_link---00:00:00 Introduction00:15:09 PART I: FOUNDATIONS OF ENGINEERING00:15:11 What Is Engineering?01:17:06 The Engineering Mindset & Process02:35:35 Models, Mathematics & Data04:07:18 PART II: CORE PHYSICAL DOMAINS04:07:20 Mechanics & Structures05:32:45 Materials & Manufacturing06:51:30 Fluids, Heat & Energy08:20:24…

  7. 21 May 2026 · 4 hr 9 min

    Notes from Underground (Complete Story) | Hindi/हिंदी | Fyodor Dostoevsky

    Published in 1864, Notes from Underground (Zapiski iz podpolya) is considered one of the most important works of 19th-century literature. It is often cited as the first "existentialist" novel, preceding the works of Sartre, Camus, and Nietzsche by decades.It marked a turning point in Dostoevsky’s career. Before this, he wrote more traditional social realism; after this, he produced his great "murder and God" masterpieces like Crime and Punishment and The Brothers Karamazov. Notes from Underground serves as the philosophical laboratory where he first tested the dark, complex psychology that…

  8. 20 May 2026 · 1 hr 50 min

    S*X AT DAWN (Hindi/हिंदी में)

    In the modern world, we are surrounded by a specific "Standard Narrative" about how humans are supposed to live. We are told that we are naturally designed for lifelong, exclusive pairings and that anything outside of this is a moral or personal failure. However, despite our best efforts, divorce rates remain high, and many long-term partners struggle with a loss of "spark" or "novelty" over time."S*x at Dawn" challenges this entire story. It argues that the friction we feel in modern relationships isn't because we are "broken" individuals, but because our biological hardware is in a…

  9. 19 May 2026 · 3 hr 8 min

    Selected English Poems Compilation | 137 Poems in Hindi

    All Shorts poems combined into one long video.00:00:00 If - Kipling00:02:06 Brahma - Emerson00:03:19 The Apology - Emerson00:04:19 Because I could not stop for Death - Dickinson00:05:32 Don'T Go Far Off - Neruda00:06:41 On The World - Quarles00:07:18 Heaven has different Signs to me - Dickinson00:08:17 Hope is the thing with feathers - Dickinson00:08:54 The Listeners - Walter de La Mare00:11:01 The Lake Isle of Innisfree - W.B. Yeats00:11:57 Dulce et Decorum Est - Owen00:13:55 And The Moon And The Stars And The World - Bukowski00:14:11 Not Waving but Drowning - Stevie Smith00:14:54 The…

  10. 18 May 2026 · 4 hr 22 min

    The Brothers Karamazov: Book I & II (Hindi/हिंदी में)

    FAMILY SETUPFyodor Pavlovich Karamazov→ selfish, careless father→ loves money and pleasure→ neglects his childrenSONSDmitri (Mitya)→ emotional and impulsive→ fights with father→ believes father stole his money→ both desire the same womanIvan→ intelligent and quiet→ questions God and justice→ observes more than he speaksAlyosha→ kind and faithful→ lives in a monastery→ student of Elder Zosima→ wants peace in the familyBOOK I: HISTORY OF THE FAMILYFyodor’s behavior→ bad father→ sons raised apart→ no family unityResult→ brothers are strangers→ hidden anger and tensionBOOK II: THE MONASTERY…

Take it with you

The Melo app keeps playing with the screen off, works in the car and on your watch, wakes you to your station, and browses the whole catalogue offline. Free, no ads, no account.

Get it on Google Play