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Season 1, Episode 72 · India Unveiled

ASHOKA AND NINE UNKNOWNS| Part 1

14 Oct 2024 · 33 min

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Episode notes

illuminati is the only secret group in the world? how Ashoka is connected with the 9 unknowns? was Chanakya a part of THE 9 UNKNOWNS? is illuminati and 9 unknown same? let's know about what is it actually. . listen, like, share, connect @me.rakeshh, @indiaunveiled.podcast [email protected]

Transcript

Read the transcript · about 5,500 words, follows along as you listen

हैलो एंड वेलकम बेक टु इंडिया अनवेल्ड और आज हम बात करेंगे एक ऐसे सीक्रेट सोसाइटी के बारे में। ये हजारों सालों से अपनी रहस्यमयी नॉलेज को छुपा कर रखी हुई है। दी नाइन अननोन्स ये कॉन्सेप्ट एक कहानी नहीं बल्कि एक लेजेंड है जो। एनशिएंट इंडिया से शुरू होता है और फिर दुनिया भर के स्टोरीज़ और कल्चर में अपनी जगह बनाता है। इस एपिसोड में हम एक्सप्लोर करेंगे इसका ओरिजिन इसके कनेक्षन्स विथ अशोक और कैसे ये सीक्रेट सोसाइटी एक मिस्टीरियस और क्रियेट करती है और आज भी लोगों

को फैसिनेट करती है। तो चलिए शुरू करते हैं सफर एक ऐसी दुनिया की ओर जहाँ नॉलेज इतनी पावरफुल थी की उसे दुनिया से छुपाकर रखा गया। तो कहानी शुरू होती है भारत के महान सम्राट अशोक से, जिनकी जिंदगी का एक मोड़ उन्हें एक अलग रास्ते पर ले जाता है। आइए। सबसे पहले हम सम्राट अशोक के बारे में थोड़ा जान लेते है। सम्राट अशोक का जन्म 304 बी सी के आसपास हुआ, जो कि मौर्य साम्राज्य के राजा चन्द्रगुप्त मौर्य के वंशज थे। अशोक का जीवन काफी गहन रहा। बचपन में ही उन्होंने अपने पिता

के प्रशासन को देखा और उनके जीवन का प्रथम अध्ययन युद्ध। और राजनीति पर हुआ। एक कहानी के अनुसार अशोक अपने चार भाइयों के साथ कभी कभी युद्ध खेलते थे और ये उनका अभ्यास उन्हें साम्राज्य के असली कार्यवाही में मदद करता था। उन्होंने शुरुआत में काफी तेजी से अपनी शक्ति और प्रभाव पढ़ाये। अशोक के बारे में प्राचीन इतिहासकारों ने। जैसे की ने उनके यात्रा को दर्शाया है कि कैसे उन्होंने अपने साम्राज्य को व्यवस्थित और मजबूत किया। आजम सब अशोक को दी ग्रेट एक महान सम्राट के रूप में जानते हैं,

लेकिन उनका राज्यकाल सिर्फ एक्सपैंशन और विजय तक सीमित नहीं था। अशोक का जीवन एक स्पिरिचुअल और एथिकल जर्नी का एग्ज़ैम्पल था। उनका सफर एक क्रूल रूलर जिसे चाँद अशोक के नाम से जाना जाता था, से शुरू हुआ और फिर एक कम्पैशनेट और स्पिरिचुअल रूलर तक ले जाता है। सम्राट अशोक का ये ट्रांसफॉर्मेशन इतना गहरा था कि उन्होंने अपने साम्राज्य के इतिहास को ही बदल दिया। एक बार जब उनका साम्राज्य बढ़ गया तो उन्होंने कलिंगा पर विशेष ध्यान दिया। कलिंगा जो की एक उनकी साम्राज्य की सीमाओं के बाहर था लेकिन

उन्होंने उसे अपनी बुद्धिमता और हिम्मत के जरिए अपने साम्राज्य में शामिल करने का फैसला किया। कलिंगा की जन्म 261 बीसी यानी 2601 बीसी में हुई थी। और ये युद्ध अशोक के लिए एक विशेष घटना बन गई। इस युद्ध में उन्होंने अपनी शक्तिशाली सेना को भेजा लेकिन इस युद्ध का परिणाम उन्हें हमेशा याद रहने वाला था। कलिंगा के लोगों ने अपने अधिकारों के लिए लड़ाई की, लेकिन अशोक ने अपने पुरुषार्थ से उन्हें साम्राज्यिक शक्ति से झुका दिया। क्नॉइस कलिंगा युद्ध के बाद अशोक

ने देखा कि कितने लोगों की जान गई और कितने घर बर्बाद हुए। कलिंगा का युद्ध भारत के इतिहास में एक ऐसा लम्हा था जो सिर्फ एक राज्य विस्तार का संकेत नहीं था बल्कि एक सम्राट के दिल और दिमाग के अंदर के जंग का भी प्रतीक था। जब अशोक ने कलिंगा को जीता तो ये जीत सिर्फ राज्य पर कब्जा नहीं थी। बल्कि ये उनके अंदर के इंसान की हार की शुरुआत थी। कलिंगा के युद्ध में लगभग 1,00,000 लोगों की जान चली गई थी और डेढ़ लाख लोगों को गुलामी में भेज दिया गया। जब अशोक ने युद्ध के मैदान में इस विनाशक दशा को देखा, उन्होंने

अपनी जीत में अपनी हार देखी। वो इस परिणाम को देखकर अपने अंदर के खालीपन को समझने लगे। उन्होंने बयान दिया, ये जो मैंने किया, ये मेरे लिए किसी भी तरह से सम्मान की बात नहीं है। युद्ध सिर्फ शक्ति के लिए नहीं बल्कि व्यक्ति और समाज के लिए खुद से किया गया युद्ध है। ये बयान उनकी कहानी का एक महत्वपूर्ण पहलू है जिसमें उन्होंने ये समझा कि शक्ति से शांति नहीं मिलती कलिंगा के जंग में अशोक को एक विशेष ड्रामा दिया। इस युद्ध की कठिनाइयों ने उनके

मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाला। एक समर्थक ऐतिहासिक लेखक का कहना है कि। अशोक ने समझा कि उनकी शक्ति उनकी जिम्मेदारी है और इस प्रकार से उन्होंने धर्म और अहिंसा की तरफ अपने कदम बढ़ाया। इस प्रकार के विचार उन्हें एक नए रास्ते पर ले गए। उन्होंने अपने साम्राज्य के लोगों के साथ संवाद किया और उनका दुख दर्द समझा। ये वही समय था। जब उन्होंने धर्म को अपनाया जो उनका नैतिक और धार्मिक मार्ग बन गया, उन्होंने ये प्रस्तावित किया कि समाज में सभी व्यक्तियों को एक

दूसरे का सम्मान करना चाहिए और अब तो अशोक के प्रजातंत्र के प्रतीक बन गए जिसमें उन्होंने प्रभु नीती, धर्म और अहिंसा के महत्त्व को दर्शाया। इस प्रकार से। उन्होंने अपनी प्रशासन की नीती को एक नए ढंग से बदला। यहीं से शुरू होता है अशोक के जीवन का सबसे बड़ा बदलाव। क्रोध और विजय की लालसा से लेकर शांति और धर्म के मार्ग तक ये सब कुछ देखने के बाद अशोक ने एक ऐसे साम्राज्य बनाने की सोंची क्नॉइस। जहाँ लोगों की सुख शांति सबसे महत्वपूर्ण उन्होंने अपने

आधिकारिक ज्ञान को छुपा कर नहीं रखा बल्कि उसका उपयोग किया कि कैसे ये समाज के लिए लाभदायक हो सके। अशोक का धर्म जो कि बुद्धिस्म पर आधारित था उनके लिए एक रहस्य का जैसे प्रदर्शक था, क्नॉइस। उन्होंने अपने ज़िन्दगी का एक नया आयमन प्राप्त किया। उन्होंने बुद्ध के युक्ति को अपनाया। सभी प्राणियों के प्रति करुणा और दयालु होना चाहिए। इस प्रकार यह अशोक के राजा के रूप में एक नया रूप था जो एक शक्तिशाली सम्राट से एक दयालु राजा बन गए क्नॉइस उन्होंने अपने साम्राज्य में धर्म, सामाजिक

न्याय और सभी के लिए एक समान अवसर का प्रचार किया। अशोक का ये मनोवैज्ञानिक परिवर्तन उन्हें इतिहास में एक प्रभावशाली व्यक्ति बना गया। ये कहानी सिर्फ अशोक की नहीं है। अन्य शासकों की भी कहानी है जो युद्ध के बाद व्यक्तिगत परिवर्तन के शिकार हुए। जैसे की रोमन सम्राट कंस्टेंटाइन ने युद्ध के बाद अपने धार्मिक विचारों को बदला और क्रिस्टियानिटी को अपनाया। उनका विकास भी ये दर्शाता है कि कैसे युद्ध के बाद एक व्यक्ति अपने अस्तित्व और समाज के प्रति

अपनी ज़िम्मेदारियों को समझता है। अशोक के एथिक्स ने समाज में एक नया प्रदर्शन किया, जिसे लोगों ने समझा कि धर्म और अहिंसा के मार्ग पर चलना कितना महत्वपूर्ण है। आखिर में अशोक का ये परिवर्तन उनके बाद के इतिहास पर भी प्रभाव डाल गया। उन्होंने जहाँ एक नया धार्मिक मार्ग प्रदर्शित किया, वहीं उनका नाम भी। अमर हो गया। उनका प्रभाव उनके एथिक्स के माध्यम से आज तक महसूस किया जाता है। अशोक के ज्ञान को समझने के लिए आज के समय में भी उनकी कहानी एक प्रेरणा है।

उनका साम्राज्य चलता रहा और उनके आदि धार्मिक विचार आज भी दुनिया में प्रशंसित किए जाते हैं। उनके बाद के सम्राटों ने भी उनकी को अपनाया जिससे एक साफ और न्यायपूर्ण समाज का विकास हुआ की कहानी ये दर्शाती है कि एक व्यक्ति का परिवर्तन कभी भी संभव है, चाहे वो किसी भी स्थिति में क्यों ना हो। इनका ये कथन है कि धर्म ही सब कुछ है। आज भी हमें याद दिलाता है कि हमें अपने जीवन में धर्म को प्राथमिकता देनी चाहिए। धर्म से मेरा मतलब कोई रिलिजन नहीं है। आपका जो कर्म है वो धर्म के

अनुसार होना चाहिए। यहाँ पे अहिंसा। और सबके साथ इक्वलिटी इनका धर्म था। जब अशोक ने अपने अंदर का बदलाव महसूस किया तब उन्होंने अपनी बाकी जिंदगी शांति, धर्म और बुद्ध के उपदेशों को फॉलो करने में लगा दिया। लेकिन एक और चीज़ थी जो उनके मन में घटी। जब अशोक ने अपनी विनाशक। शक्ति को देखा। उन्होंने सोचा कि यदि इंसान के पास ज्यादा नॉलेज हो और पावर हो तो वो इसे गलत तरीके से यूज़ कर सकता है। अशोक को ये एहसास हुआ कि कुछ चीजें दुनिया के सामने नहीं आनी चाहिए।

इस बात ने एक ऐसे सीक्रेट सोसाइटी को जन्म दिया। जो दुनिया की सबसे पावरफुल और डेंजरस नॉलेज को छुपाकर रखेगी। ये सीक्रेट सोसाइटी थी। दी नाइन अननोन। जब हम दी नाइन अननोन की बात करते हैं तो हमें समझना चाहिए कि यह कहानी कैसे शुरू हुई। इस कहानी का जड़ सम्राट अशोक के समय से जुड़ा है, जब उन्होंने अपने साम्राज्य को संरक्षित करने के लिए एक विशेष समाज का गठन किया। कहानी के मुताबिक अशोक ने इस समाज का गठन किया ताकि उनके साम्राज्य में किसी भी प्रकार के विशेष ज्ञान को दूसरे लोगों तक ना

पहुंचने दे। क्नॉइस इस ज्ञान को अपने साम्राज्य की रक्षा करने के लिए एक रहस्य के रूप में रखा गया। अशोक के साम्राज्य के बारे में समझने के लिए हमें उस समय के राजनीतिक और सामाजिक परिपेक्ष को देखना होगा। उनका साम्राज्य एक बड़ा और विविध साम्राज्य था। इसमें अलग अलग सभ्यताएं और संस्कृतियां शामिल थी। अशोक ने इस साम्राज्य को एक शांत समाज में परिवर्तित करने की कोशिश की लेकिन उन्हें ये समझना था कि इस ज्ञान को समाज में कैसे रखे जिसे ये किसी भी प्रकार के हानि से दूर रहे।

अशोक ने अपने समय में जो विचार किया था वो ये था कि ये दुनिया कुछ नॉलेज के लिए। अभी तैयार नहीं है, लेकिन वो इस नॉलेज को खोना भी नहीं चाहते थे क्योंकि ह्यूमन एवोल्यूशन के लिए भी जरूरी था। इसलिए अशोक ने डिसैड किया कि इस नॉलेज को सिर्फ नौ लोगों के हाथों में दिया जाए। ये लोग ऐसे नौ स्कॉलर्स थे जो अलग अलग फ़ील्ड्स के एक्स्पर्ट थे। लेजेंड के अनुसार क्नॉइस ये नौ लोगों को दुनिया के अलग अलग रहस्य की रक्षा करने का काम दिया गया। हर एक व्यक्ति एक अलग फील्ड में

एक्स्पर्ट था और इन फ़ील्ड्स का स्कोप इतना वस्त था की ये पूरे ह्यूमन सिविलाइज़ेशन को बदलने की कैपेसिटी रखता था। ये नौ लोगों के बारे में कहा जाता है कि ये लोग सिर्फ सीक्रेट नॉलेज के गार्डियन्स नहीं बल्कि क्नॉइस। इस नॉलेज के कस्टडींस भी थे। अशोक ने इन्हें एक ऐसा सिस्टम दिया जिसमें ये अपनी ऐडेंटिटी को सीक्रेट रखे और अपने स्टूडेंट्स के साथ अपनी नॉलेज पास करे। ये कहानी समय के साथ बदलती गयी और प्राचीन ऐतिहासिक स्रोतों के अलावा। आदि युग के लेखेकों ने इस कहानी

को अपनी तरह से देखा। ये कहानी कैसा मैदान बन गई जहाँ हर व्यक्ति अपने अपने विचारों और धारणाओं को डाल सकता था? ये समाज सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। ऐसे कई अन्य प्राचीन समाज है जो इस प्रकार के रहस्यमयी ज्ञान के लिए प्रसिद्ध है। इस एपिसोड में क्नॉइस। हम इन सभी समाजों के विचार को जानने की कोशिश करेंगे। इनमे सबसे पहले हम बात करेंगे प्लाटो की ऐकैडॅमि की एक प्राचीन ग्रीक समाज थी जहाँ ज्ञान और दर्शन का अध्ययन होता था। यहाँ पर लोगों को अलग अलग प्रकार के विचार प्रदान किए जाते थे और

उन्हें ये सीखने को मिलता था। कि कैसे वे समाज और ज्ञान को बढ़ावा दे सकते हैं। प्लाटों के समाज का मकसद भी ये था कि ज्ञान को समाज में व्यवस्थित करना है, जिससे लोगों को उसका लाभ मिले। यहाँ पर भी ज्ञान एक प्रकार का रहस्य था जो कि सिर्फ उन लोगों के लिए था जो इस समाज का हिस्सा बन सकते थे। इसके अलावा ईजिप्शियन मिस्ट्री स्कूल्स भी एक ऐसे समाज के रूप में देखे जा सकते हैं जहाँ लोगों को ज्ञान प्रदान किया जाता था। यहाँ पर ज्ञान को छुपा कर रखा

जाता था और एक प्रकार की सामाजिक और धार्मिक व्यवस्था थी। इस समाज का मकसद भी ज्ञान को एक विशेष समुदाय तक सीमित रखना था। इजिप्शियन मिस्ट्री स्कूल्स का प्रभाव इतना गहरा था कि उन्होंने समय के साथ कई सभ्यताओं को प्रभावित किया। फ्री एजेंट्स का विकास भी इस प्रकार के रहस्यमयी समाजों के साथ संबंधित है। ये एक समाज है जो सिर्फ उन लोगों के लिए खुली है जिन्होंने सामाजिक और व्यावसायिक मामलों में एक स्थल। प्राप्त किया है। उनका ज्ञान भी विशेष रूप से छुपाया जाता है जिससे सिर्फ कुछ

चुने हुए लोग ही जान सकते हैं। ये समाज भी व्यक्ति को एक ऐसी सामाजिक पहचान देने की कोशिश करता है जिससे वो अपने समुदाय के लिए प्रभावशाली बन सके। इन सभी समाजों में एक सामान्य धारणा है कि ज्ञान को व्यक्ति के हाथ में देना खतरनाक हो सकता है। हर एक समाज अपने ज्ञान को एक रहस्यमय और अलग ढंग से प्रस्तुत करता है, जिससे सिर्फ कुछ चुने हुए लोग ही इस ज्ञान को समझ सकें। इस प्रकार के समाजों की कहानियों हमेशा से ही लोगों को प्रभावित करते रहे। क्योंकि यहाँ पर ज्ञान के 771

सामाजिक और धार्मिक पहलू भी होता है। ये कहानी लोगों को ये समझती है कि ज्ञान कभी भी एक समाज तक सीमित नहीं होता बल्कि इसका प्रभाव दुनियाभर के हर समुदाय पे होता है जैसा जैसा समय बदला, लोगों ने इन कहानियों को नए तरीके से देखना शुरू किया क्नॉइस इस प्रकार दी नाइन अननोन के चरित्रों की महत्वपूर्ण अनुकरण किए गए और इन्हें समय के परिपेक्ष्य में समझा गया। आज के समय में इस कहानी के प्रभाव सैबर कल्चर और कॉन्स्पिरेसी थियरीज पर भी देखा जा सकता है।

क्नॉइस इंटरनेट के जमाने में जब लोग अक्सर सीक्रेट सोसाइटी और हिडन नॉलेज की तलाश में रहते है। दी नाइन अननोन की कहानी एक विशेष महत्त्व रखती है। इस कहानी को लेकर कई डॉक्यूमेंट्री और फिल्म्स भी बनाई गई है जैसे एक मॉडर्न ट्विस्ट देती है। लोगों में इस कहानी के प्रति क्यूरियोसिटी और एक्साइटमेंट होती है क्योंकि। ये उन्हें एक ऐसे ज्ञान की तलाश में ले जाती है जो समाज में प्रचलित नहीं है। ये कहानी हमेशा से ही लोगों को प्रभावित करती रही है और आज भी एक रहस्यमय और एंगेजिंग टॉपिक बना

हुआ है। अब बात करते है उन फ़ील्ड्स की जो नाइन को दिया गया था। सबसे पहला फील्ड जिसे हम डीटेल में समझेंगे वो है। भारत में अलकमी जिसे रस शास्त्र कहा जाता है, काफी समृद्ध इतिहास है जो मानसिक और अध्यात्मिक परिवर्तन के लिए धातुओं और रसायनों की खोज में जुड़ा हुआ है। रस शास्त्र के प्रैक्टिशनर्स जिन्हें रसवादी कहा जाता है। निर्धातु और मिनेरल की प्रॉपर्टीस को समझने की कोशिश की ताकि प्रोटेंट मेडिसिन्स और अलक्ज़र्स बनाये जा सके। रस रत्न समुच्य केमिकल प्रोसेसर जैसे डिस्टिलेशन और के

सोफिस्टिकेटेड मेथोडोलोगीस को दर्शाते है। इनका मकसद महर्ष यानी अल्टीमेट मेटल प्राप्त करना है। क्नॉइस जिससे अमर और सवस्थ रहने की प्राप्ति हो। ये खोज भारत के एलोकेमिकल प्रैक्टिसेज़ की गहन दार्शनिक मूलों को दर्शाती है जो कि शारीरिक परिवर्तन और आध्यात्मिक विकास दोनों को जोड़ दिया। प्राचीन काल में एलोकेमिकल से जोड़ा गया। ये सिर्फ धातुओं को परिवर्तन पर केंद्रित नहीं थी बल्कि क्नॉइस। अमर होने की खोज पर भी थी। ने इंटरनल अल्कमी यानी नीडम पर ध्यान दिया।

यहाँ शरीर की इंटरनल एनर्जीज़ को मेडिटेशन ब्रीडिंग एक्सरसाइज़ेस और फ्री प्रैक्टिसेज़ के माध्यम से कल्टीवेट किया गया दी। सीक्रेट ऑफ़ गोल्डन फ्लावर में एनलाइटनमेंट और शारीरिक लोंजिविटी पाने के लिए प्रोसेसेस का वर्णन है। चीन में एक्सटर्नल प्रैक्टिसेज़ भी शामिल थी, जहाँ हर्बल मिक्सचर और मिनरल्स कम्पाउंड्स का उपयोग किया जाता जिससे औषधियों बनाई जाती थी जो हेल्त के लिए और अच्छी थी। इस्लामिक गोल्डन एज ने अल्केमिकल विचार में एक महत्वपूर्ण विकास

किया जबीर इब्नहिन् जैसे स्कॉलर्स अक्सर फादर ऑफ़ केमिस्ट्री के रूप में जाना जाता है। जिन्होंने अपने काम से मॉडर्न साइंटिफिक इन्क्वायरी के लिए आधार बना दिया। अमिक अल्केमिस्ट ने ग्रीक, ईजिप्शियन और इंडियन ट्रेडिशन को मिला कर जेनिक ब्लंट बना दिया। मध्यकाल में अल्केमी, मिस्टिसिस्म और फिलॉसोफी से जुड़े रहे अल्केमिस्ट जैसे। और निकोलस फ्लैम ने प्रकृति के रहस्य को समझने की कोशिश की। विश्वास करते हुए की। बेस मेटल्स को गोल्ड में बदलना

संभव है। ऐसा करने से उन्होंने जीवन के ज्ञान को भी समझना चाहा। अल्कमीष कॉन्टेक्स्ट में सिर्फ केमिस्ट्री का पहला रूप नहीं था बल्कि ये एक स्पिरिचुअल और फिलॉसोफिकल जोनी थी। जिसका मकसद व्यक्ति का सुधार था। अल्केमिकल ट्रस्ट में सिम्बोलिज़्म अक्सर पर्सनल डेवलपमेंट के अलग अलग स्टेजेस को दर्शाता था। एक ऐसा फील्ड था जो पुराना और नया दोनों था। अल्केमी को हमाज के जमाने में केमिस्ट्री का प्री कर्सर मानते है, लेकिन पुराने जमाने में अल्केमी का मतलब सिर्फ मेटल्स को

गोल्ड में बदलना नहीं था। इसका एक स्पिरिचुअल और फिलॉसोफिकल मीनिंग भी था, जो अभी हमने समझा अल्केमिस्ट ये समझते थे की मेटल को गोल्ड में कॉनवर्ट करने का प्रोसेसर इंसान अपने अंदर भी कर सकता है। स्पिरिचुअल एनलाइटनमेंट पा सकता है। अशोक के समय यही मतलब था अल्केमिका। ह्यूमन कॉन्शॅस के ट्रांसफर्मेशन ये कहानी कहती है की दी फर्स्ट अननोन के पास का पूरा सीक्रेट था। इस नॉलेज का एक पार्ट था मेडल्स को प्यूरीफाई करना और गोल्ड में कॉनवर्ट करना। लेकिन इसका बड़ा हिस्सा था अमृत

या अलेक्जहर ऑफ़ लाइफ। अगला फील्ड था माइक्रोबायोलॉजी। चरक संहिता में रस के अलग अलग प्रकार और उनकी औषधि के रूप में उपयोग का उल्लेख है, जो आज के एंटीबायोटिक्स और हेर्बल मेडिसिन के जैसे ही है। सुश्रुत संहिता में भी एक क्लासिक टेस्ट है जो सर्जरी और चिकित्सा में ज्ञान प्रदान करती है। इसमें के लक्षण और उनका उपचार है। क्नॉइस। का काफी विस्तार से वर्णन किया गया है। सुश्रुत ने अपने ग्रंथ में अक्सेप्टिक टेक्नीक्स का उल्लेख किया है, जो आज के समय में मॉडर्न सर्जिकल प्रैक्टिसेज़ से जुड़ा

है। सुश्रुत ने जिसमें शुष्क और अशष्क वैधिक प्रमाणीकरण किया, वहीं पर आज के समय में भी ऐसे टेक्नीक्स का प्रत्यक्ष उपयोग होता है। क्नॉइस इससे ये साफ होता है कि कैसे प्राचीन समय से लेकर आज तक ज्ञान लगभग सेम ही है। आज के समय में आयुर्वेद का ज्ञान हर वेल मेडिसिन के रूप में उपयोग होता है। औषधियों का इस्तेमाल सिर्फ व्याधियों के उपचार के लिए नहीं बल्कि व्यक्ति की इम्युनिटी को बढ़ावा देने के लिए भी होता है। क्नॉइस आयुर्वेद के अनुसार विशेष

औषधियों के प्रभाव को समझना आज की मॉडर्न मेडिसिन के लिए भी जरूरी है। ये देखा गया है कि प्राचीन सभ्यताओं के पास व्याधियों और उनके उपचार के लिए समझ होती थी, जो आज की माइक्रो बायोलोजी के कॉन्सेप्ट से जुड़ा है। औषधियों के प्रभाव और उनकी सही इस्तेमाल की टेक्नीक्स आज भी प्रभावित करती हैं। क्नॉइस आज के समय में आयुर्वेद और हर्बल मेडिसिन के लिए प्राचीन टेक्स्ट्स का उपयोग किया जा रहा है, जिससे आज के मॉडर्न, ऐंटी बायोटेक और ट्रीटमेंट्स से समझा

जा सकता है। आयुर्वेद का ज्ञान सिर्फ व्याधियों के उपचार तक ही सीमित नहीं है, बल्कि एक होलिस्टिक एप्रोच है जिसमें व्यक्ति की पूरी स्वास्थ्य का परवाह किया जाता है। क्नॉइस आज के माइक्रोबायोलॉजी का ज्ञान ऐसे टेक्नीक्स पर आधारित है जो प्राचीन अल्केमिस्ट ने इस्तेमाल किए थे। जैसे की अल्केमिकल प्रोसेसेस में शारीरिक औषधियों को समझना और उनका उपयोग करना शामिल है। वैसे ही आज के माइक्रोबायोलॉजी में भी माइक्रोबियल कल्चर्स और उनकी प्रॉपर्टीस को समझने पर

केंद्रित है। आज की माइक्रोबायोलॉजी ने ये दर्शाया है कि कैसे कुछ औषधियों एंटीमाइक्रोबियल प्रॉपर्टीस रखती है। प्राचीन सभ्यताओ ने इन प्रॉपर्टीस को पहचाना और उनका इस्तेमाल भी किया। जैसे कि नीम के पत्ते को व्याधियों के उपचार में इस्तेमाल किया जाता है। आज भी इसके एंटीमाइक्रोबियल प्रॉपर्टीस के लिए रिसर्च चल रहे हैं। सोंची अशोक के समय में डिसीसेस को समझना और उनका इलाज करना कितना मुश्किल होगा। जब माइक्रोस्कोप जैसे टूल्स नहीं

थे। लेकिन पुरानी सिविलाइज़ेशन में भी कई ऐसे राज़ थे जिससे हम आज के से मैच कर सकते हैं। ये कहा जाता है कि एक और अननोन के पास माइक्रोबायोलॉजी का सीक्रेट था। इसका मतलब था। माइक्रो ऑर्गनिज्म और डिसीसेस को समझना और उनका इलाज करना। भारतीय आयुर्वेद में कई ऐसा टेक्नीक्स और हेर्बल रेमेडीस का जिक्र है जो आज के मॉडर्न एंटीबायोटिक से मिलते जुलते हैं। इसलिए कई रिसर्चर्स मानते हैं कि शायद ये एनशिएंट माइक्रोबायोलॉजी का नॉलेज है जो बाद में हम तक पहुंचा।

अब हम आते है तीसरे फील्ड पर, जो और भी मैएंड कंट्रोल और साइकोलॉजी उपनिषद जो की वेदिक लिटरेचर का एक हिस्सा है, मन और आत्मा के संबंध पर गहरा चिंतन करते है। इन टेक्स्ट्स में ये बताया गया है कि मन कैसे अनेक अवस्थाओं में रह सकता है और कैसे इसे समझना जरूरी है। चाँद के उपनिषद में मन को एक पावरफुल टूल के रूप में देखा गया है, जिससे व्यक्ति अपने आत्मा को समझ सकता है। यहाँ पर तत्वमसीह का ज्ञान दिया गया है जो की ये बताता है की व्यक्ति और आत्मा अलग नहीं है।

वो दोनों एक ही है। इसे ये समझना आसान होता है कि मन कैसे व्यक्ति के व्यवहार और विचारों को प्रभावित करता है। मंडुक के उपनिषद में मन की तीन अवस्थाएं जागृत, स्वप्न और शुष्यपति के बारे में चर्चा की गई है। ये विचार इससे प्रकट करते है कि मन के अलग अलग व्यवस्था को समझ कर व्यक्ति अपने आत्मा की अश्लील स्थिति तक पहुँच सकता है। भागवत गीता एक महत्वपूर्ण धार्मिक और दार्शनिक टेक्स्ट है, जिसमें कृष्ण और अर्जुन के बीच की बातें प्रस्तुत की गई है।

यहाँ पर मन और समस्याओं के बीच संबंध को समझाया गया है। चॅप्टर सिक्स में मेडिटेशन के माध्यम से मन के नियंत्रण करने का विचार है। कृष्ण कहते हैं, योगिक प्रैक्टिस से मन को समझना और कंट्रोल करना आसान होता है। यहाँ पर ध्यान को एक पावरफुल टूल के रूप में समझा गया है जो कि व्यक्ति को, अपने विचारों और भावनाओं को। प्रभावित करने की शक्ति देता है योग अचित्त वृत्ति निरोधा इसका मतलब है कि योग मन के फ्लक्चुएशन्स का निरोध है। यहाँ पर योग को एक टेकनीक के रूप में देखा गया है, जिससे मन के

फ्लक्चुएशन्स को समझा और कंट्रोल किया जा सके। योगसूत्र में ध्यान के विभिन्न मेथड्स है जैसे कॉन्सन्ट्रेशन और मेडिटेशन इन पर बहुत प्रकाश डाला गया है। ये टेक्नीक्स व्यक्ति को अपने अंतर्मन को समझने और मन को कंट्रोल करने के लिए काफी उपयोगी साबित होती है। हम देखेंगे कैसे भारतीय स्पिरिचुअल प्रैक्टिसेज़, खास तौर पर ध्यान और मेडिटेशन। को मन के कंट्रोल टेक्नीक्स के रूप में देखा जा सकता है। मेडिटेशन का प्राचीन इतिहास है और ये ना सिर्फ भारतीय सभ्यताओ में बल्कि दुनिया भर में विकसित हुआ

है। मेडिटेशन का प्राचीन मकसद व्यक्ति के मन को कंट्रोल करना और उससे शांत करना था। आज के समय में मिंडफुलनेस मेडिटेशन का विकास हुआ है। जो कि मन को शांत करने और उसे एक सही दिशा में लगाने में मदद करता है। इसमें व्यक्ति को अपने विचारों पर ध्यान केन्द्रित करना होता है जिससे व्यक्ति अपने भावों और विचारों को समझ सकता है। आज के जमाने में माइन कंट्रोल को हम साइंस फिक्शन और स्पाई मूवीज़ के साथ जोड़कर देख सकते हैं। लेकिन एनशिएंट भारत में इस कॉन्सेप्ट को एक अलग नजरिये से

देखा जाता था। मैएंड कंट्रोल के कॉन्सेप्ट को सिर्फ एक इंडीविजुअल के मैएंड को मैनिपुलेट करने तक सीमित नहीं थे, बल्कि ये सोसाइटी और मासिस को इन्फ्लुयेन्स करने के टूल्स थे और जो लोग इस फील्ड में एक्सप्लोर होते थे, वो समझते थे की कैसे एक व्यक्ति के विचार भावना और मनोविज्ञान को कंट्रोल किया जा सकता है। ये कहा जाता है कि थर्ड अननोन के पास माइन कंट्रोल और साइकोलॉजी का ज्ञान था। अशोक ने देखा था कि वॉर के दौरान कैसे एक व्यक्ति के विचार और

इमोशन्स को कंट्रोल करने से पूरा बैटलफील्ड चेंज हो सकता है। इसलिए उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति को चुना जो इस नॉलेज को समझ सके और इसे मिसयूज होने से बचा सके। आपको ये सुनकर हैरानी होगी कि अनशन भारत में मेडिटेशन और मैएंड कंट्रोल की कई टेक्नीक्स आज भी प्रैक्टिस की जाती है। प्राणायाम, ध्यान और मंत्र चांडिंग को एक व्यक्ति के मानसिक स्थिति को कंट्रोल करने के टूल्स के रूप में। समझा जाता था। क्या ये टेकनिक से एक व्यक्ति के मैएंड को मैनिपुलेट करने का टूल

हो सकती है? क्या अनशन भारत में ये सोच थी की इंसान के विचार और इमोशन्स को इन्फ्लुयेन्स किया जा सकता है। इस टॉपिक पर आज भी कॉलर्स डिबेट करते है। मैएंड कंट्रोल का एक और अगल है मास मैनिपुलेशन का। जब हम पुराने राजाओं और साम्राज्य के बारे में सोचते हैं या सुनते हैं या पढ़ते हैं तो हमें ये समझना पड़ता है कि ये रूलर्स कैसे अपने विचारों को अपने सब्जेक्ट्स तक पहुंचाते थे?

क्या ये एक फॉर्म ऑफ़ मैएंड कंट्रोल नहीं था? एनशिएंट किंग्स है सिंबल्स रिचुअल्स, अरे नैरेटिव एक तरह से प्रोपागंडा और मैएंड कंट्रोल्स। जिनका इस्तेमाल वो अपने राज्य को मेंटेन करने के लिए करते थे। अब हम चलते हैं एक और फैसिनेटिंग और मिस्टीरियस फील्ड के तरफ। सीक्रेट साइंस और टेक्नोलॉजी सबसे पहले आप बात करते हैं कुछ एक्स्ट्रा आर्डिनरी टेक्नोलॉजीज की जो एशियन सिविलाइज़ेशन ने छेड़ी है। चीजें जो अपने टाइम से काफी आगे थी, जैसे की इंडस वैली

सिविलाइज़ेशन की इरिगेशन सिस्टम्स। हजारों साल पहले हड़प्पा और मोहन के लोगों ने एक सोफिस्टिकेटेड ड्रेनेज सिस्टम बनाया था। आप अगर इंडस वैली सिविलाइज़ेशन के बारे में सुनना चाहते हैं तो आप जाइए लिस्ट में आपको बहुत डीटेल्स मिलेंगे। तो उनके शहरों में अंडरग्राउंड थे। वेल प्लान्ड स्ट्रीट थी, जो मॉडर्न सिटीज़ में सिर्फ नाइन्टीन्थ सेंचुरी में देखे गए। इंडस वैली का इरिगेशन सिस्टम इतना अडवांस्ड था की आज के शहरों से कंपेर किया जा सकता है। वो लोग अपने सिटीज़ को इस तरह

डिज़ैन करते थे, जो सस्टेनेबल थी, वो भी बिना मॉडर्न टूल्स के। फिर अगर आई मेन्शन्ड ईजिप्ट की बात करे तो पिरामिड का कंस्ट्रक्शन अब तक एक मिस्ट्री है इन मैसिव स्टोन ब्लॉक्स को जो हजारों टर्न वेक करते है। इतनी प्रिसिशन के साथ कैसे रखे गए ग्रेट पिरामिड ऑफ़ गीज़ा को परफेक्ट अलाइन्मन्ट के साथ बनाया गया है, जो आज भी मॉडर्न टेक्नोलॉजी के लिए मुश्किल है। कुछ थियरीज कहती है कि उनके पास ज्योमैट्री और एस्ट्रोनॉमी की ऐसी नॉलेज थी जो बहुत बाद में रेडिस्कवर की गई।

पिरामिड के कंस्ट्रक्शन को समझना बहुत मुश्किल है। इतनी बड़ी स्ट्रक्चर को बिना मॉडर्न टूल्स के बनाने के लिए एनशिएंट के पास कौन सी सीक्रेट नॉलेज थी? हमारे इंजीनियर्स के लिए आज भी इस स्केल पर इतना प्रोसीशन लाना मुश्किल होता है अगर बात की जाए और इंजीनियरिंग की और रोमांस ने अपने टाइम के मोस्ट अडवांस्ड ऑफ़ वॉर मशीन्स बनाए जैसे बेलिस्टा और ट्रिब्यूटेड ये मशीन्स मैसिव प्रोजेक्टाइल्स को काफी दूर तक लॉन्च कर सकती थी। ये मशीन्स काफी इम्पोर्टेन्ट थी

सेज वारफेयर में और इनका यूज़ करके वॉल्स और को तोड़ दिया जाता था जो पहले इम्पनट्रिब्ले थी। ग्रीक और रोमन सिविलाइज़ेशन ने अपने वारफेयर को डोमिनेट करने के लिए ऐसी अडवांस्ड मशीन्स बनायीं जो मैकेनिकली बहुत आगे थी। परिस्टा और ट्रिब्यूश जैसी मशीन वो अपने एनिमीज़ को फोर्स तोड़ने के लिए इस्तेमाल करते थे और मेटलर्जी में ये लोग बहुत अडवांस्ड है। इंडिया में और ने भी मेटलर्जी और सिटी प्लानिंग में इम्प्रेसिव टेक्नोलॉजीज डेवलप की थी। स्पेशल एनशिएंट इंडियन स्टील जिसे

वुड्स स्टील कहते है। वास् वॅन ऑफ़ दी फाइनेस्ट मेटलर्जिकल अचीवमेंट। ये स्टील इतना स्ट्रांग और ड्यूरेबल था की इससे दमस्क स्वर्स बनाई जाती थी जो दुनिया भर के वॉरियर्स के बीच फेमस थी। एनशिएंट इंडिया के मेटलर्जिक का एग्ज़ैम्पल वुड स्टील से लिया जा सकता है, जो दुनिया के बेस्ट स्टील में से एक है। दमस्कर स्टीवर्ट्स को इस स्टील से बनाया जाता था और ये अपनी शार्पनेस और स्ट्रेंथ के लिए वुल्फ मस्ती अगर बात की जाए विमान की यानी एरोप्लेन्स की जो एनशिएंट

इंडियन टेक्स्ट्स में फ्लाइंग मशीन्स के रूप में डिस्क्राइब की गई है। वेदिक स्क्रिप्चर्स और वैमानिका शास्त्र में विमान का जिक्र आता है। जिसमें इन मशीन्स के स्ट्रक्चर ऑफ़ फ्लाइइंग टेक्नीक्स के बारे में डिटेल्ड डिस्क्रिप्शन है। ये मशीन्स ना सिर्फ आसानी से स्पीड बड़ा सकती है, बल्कि डायरेक्शंस चेंज कर सकती है और हवा की डिफरेंट डायमेंशन्स में भी ट्रैवेल कर सकते है। इमेजिन के तोउसानडस ऑफ़ यौर्स पहले ऐसे फ्राइंग मशीन्स का

डिस्क्रिप्षन दिया गया था, जो आज के टाइम के लिए भी फ्यूचरिस्टिक लगती है। विमानिका शास्त्र में डिटेल्ड ब्लूप्रिंट्स दिए गए हैं। कैसे ये मशीन्स ऐंटी ग्रेविटी का यूज़ करके फ्लाइट ले सकती थी? ऐसे मशीन्स का कॉन्सेप्ट आज के भी एरोस्पेस इंजीनियर्स के लिए एक ड्रीम जैसा लगता है। नॉट ओनली इन इंडिया। लेकिन ऐसे फ्लाइइंग ऑब्जेक्ट्स का जिक्र हमें और एनशिएंट कल्चर्स में भी मिलते है। एनशिएंट ईजिप्ट में कुछ हाइरोग्लब्स् ऐसे मिले है जो

फ्लाइइंग मशीन्स की तरह देखते है। और साउथ अमेरिकन सिविलाइज़ेशन में भी कुछ स्ट्रेंज चर्विंग्स है, जो इस ऐडिया को सपोर्ट करती है। क्या ये पॉसिबल है? की उन एनशिएंट कल्चर्स के पास अडवांस्ड एरोडाइनैमिक्स की नॉलेज थी जो हम अब तक रेडिस्कवर नहीं कर पाए है। ये क्वेश्चन और भी फैसिनेटिंग हो जाता है जब हम देखते हैं कि डिफरेंट एनशिएंट कल्चर्स ने एक तरह की अडवांस्ड फ्लाइइंग मशीन्स को डिपिक किया है। क्या ये सिर्फ इमेजिनेशन थी कुछ? और ये कहा जाता है कि फॉर्थ अननोन

के पास ऐसा साइंटिफिक और टेक्नोलॉजिकल एंड नॉलेज का रहस्य था। जो अपना टाइम से कई साल आगे था एंड भारत में कई अडवांस टेक्नोलॉजीज का जिक्र किया गया है, जो आज के समय में भी मार्वल मानी जाती है। विमान जैसे की मैंने बताया एक या फिर ऐसे के बारे में महाभारत और रामायण में भी लिखा गया है। इवन पुष्पक विमान जो की रामायण में वर्णित है। ये भी एक बहुत बड़ा एग्ज़ैम्पल है। इस बात का कोई सॉलिड प्रूफ तो नहीं है लेकिन कई रिसर्चर्स मानते है की शायद कुछ ऐसी नॉलेज थी जो

टाइम के साथ खो गयी। एक पॉसिबिलिटी है की अशोक के नाइन अननोन में एक के पास ये रहस्य था। शायद ये सोचने में आज हमें मज़ा आया। बट एनसीएनटी हिस्टरी में ऐसे बहुत सारे एग्ज़ैम्पल्स है जो दिखाते है की नॉलेज ह्यूमेनिटी के लिए इतनी डेंजरस हो सकती थी की उनको छुपा के रखना ही बेटर था और यू नाइन अननोन की स्टोरी एक रिमाइंडर है की कुछ चीज़े शायद हमेशा मिस्त्री ही रहेंगी। अब तक तो हमने सुना की नाइन के पास कौन सी नॉलेज थी, लेकिन और बड़ा सवाल ये है की क्या ये

सीक्रेट सोसाइटी आज भी एक्सिस्ट करती है? ये टॉपिक है कॉन्स्पिरेसी, थियरी से कम नहीं कई रिसर्चर्स और राइटर्स कहते है की ये लोग। आज भी कहीं ना कहीं छुपे हुए है। लाइक दी जेनरेशन ऑफ़ दोज़, नाइन पीपल और अपने नॉलेज को प्रोटेक्ट कर रहे है। कई बार ऐसे इन्सिडेंट्स सामने आए है जो इस बात को सिग्नल करते है की ये सीक्रेट सोसाइटी अब भी अपना काम कर रही है। एक पॉपुलर थियरी कहती है की हर जेनरेशन में ये नौ लोग अपनी जगह है, नए स्कॉलर्स को देते है।

ये नॉलेज जेनरेशन टु जेनरेशन पास होती जा रही है, लेकिन इस नॉलेज को दुनिया के सामने नहीं लाएगा। कहीं कॉन्स्पिरेसी थियरीज ये मानते हैं कि इस सीक्रेट सोसाइटी का रोल आज के अडवांस्ड साइंटिफिक डेवलपमेंट्स ऑर न्यू वर्ल्ड के ऑर्डर के पीछे हो सकता है। एक और इंटरेस्टिंग अगल ये है की दी नाइन अननोन को मॉडर्न टाइम्स की सीक्रेट ऑर्गेनाइजेशन से जोड़ कर देखते है। जैसे की फ्री में या इलुमिनिटीज ये ऑर्गेनाइजेशन भी सीक्रेट सोसाइटी के रूप में देखी जा सकती है जो दुनिया के डिसीजंस को

इन्फ्लुयेन्स करती है। अवामित फिलॉसोफिकल डिस्कॅशन की तरफ आते हैं। क्या कुछ नॉलेज को सीक्रेट रखना जरूरी होता भी है? जी नाइन अननोन का कॉन्सेप्ट और ऐडिया था की कुछ चीज़े दुनिया के लिए इतनी पावरफुल हो सकती है की उन्हें छुपाना चाहिए। स्टॉपिक में डिबेट्स हुई है। कुछ फिलोसोफर्स मानते है की नॉलेज को छुपा कर रखना बहुत अच्छी बात है। और कुछ लोग मानते है की इस इससे पावर का मिसयूज होता है। जैसे आज के जमाने में भी कई ऐसे साइंटिफिक डेवलपमेंट्स है जो पब्लिक के लिए अक्सेसिबल नहीं है,

चाहे वो नुक्लेअर वेपन्स हो या बायोटेक्नोलॉजी। गवर्नमेंट इस नॉलेज को पब्लिक से छुपा कर रखती है, ताकि मिसयूज न हो। तो ये सर अबाउट नाइन अननोन। हमने देखा कि कैसे ये कहानी सम्राट अशोक से शुरू होती है। कैसे एक महान सम्राट ने अपनी क्रूल्टी और कांग्रेस से शांति और धर्म का मार्ग चुन लिया और कैसे उस डिसीजन में एक सीक्रेट सोसाइटी को जन्म दिया जो दुनिया के लिए आज तक एक रहस्य बनी हुई है। खैर ये हमारा पहला एपिसोड था इस नाइन अननोन सीरीज का।

हमने ये भी देखा की कैसे नाइन अननोन के पास अलग अलग फ़ील्ड्स के ज्ञान थे। खैर, हमने सिर्फ माइक्रोबायोलॉजी, मैएंड कंट्रोल, अडवांस्ड साइंस एंड टेक्नोलॉजी साइकोलॉजी और साथ ही हमने एनशिएंट इंडिया के साइक को भी समझा। लेकिन ये सिर्फ शुरुआत है। ये लेजेंड सिर्फ एक सीक्रेट सोसाइटी की कहानी नहीं बल्कि ह्यूमन सिविलाइज़ेशन की क्वेस्ट फॉर नॉलेज ऑफ़ विस्डम का एक डीपर रिफ्लेक्शन भी है। और ये क्वेश्चन हमेशा रेलेवेंट रहेगा की क्या कुछ नॉलेज दुनिया

के सामने आनी चाहिए या क्या हमें कुछ चीजें छुपा कर रखनी चाहिए? जब हम एनशिएंट सिबिलाइजेशन के बारे में बात करते है तो उनके पास जो ज्ञान और रहस्य थे वो आज भी हमारे लिए एक मिस्त्री है। ये रहस्य अभी खुला नहीं है लेकिन हमारे सामने कई और क्वेश्चन्स अभी भी खड़े है। जैसे की क्या एनशिएंट भारत का ज्ञान किसी और दुनिया से आया था। क्या हमारे पास जो टेक्नोलॉजीज है, वह एनशिएंट टाइम्स में भी एग्ज़िस्ट करती थी?

और क्या ये पॉसिबल है की हम आज भी इन अननोनमेंट के इन्फ्लुयेन्स में तो इस एपिसोड को कंटिन्यू करेंगे? अगले पार्ट्स में टिल देन कीप लिसनिंग टु इंडिया अनवेल्ड और जो भी क्वेरीज है जो भी फीडबैक है, सजेशन्स है। प्लीज़ ड्रॉप इट डाउन ऑन माइ इंस्टाग्राम हैंडल विच इज़ इंडिया अनवेल्ड डॉट पोडकास्ट ऑर माइ इमेल विच इज़ इंडिया अनवेल्ड पोडकास्ट@जीमेल.कॉम आई विल सी यू रीयल सून इन दी नेक्स्ट एपिसोड टिल देन दी गुड केयर ऑफ यूर हेल्थ दिस इज़ राकेश साइनिंग ऑफ फ्रॉम इंडिया अनवेल्ड।

Transcript supplied by the publisher with the episode.

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Rakesh Soni · History · Hindi

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