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Season 1, Episode 74 · India Unveiled

The Nine Unknowns | Fields of knowledge 1

23 Jan 2025 · 26 min

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Episode notes

What are the nine fields of knowledge of the nine unknowns? Are these knowledges still used in this era? How the ancient India was more developed than that of todays India? Know everything about the Nine Unknowns. connect Mail: [email protected] I.G: indiaunveiled.podcast scripting: https://www.linkedin.com/in/lavisha-gupta-544aaa304?utm_source=share&utm_campaign=share_via&utm_content=profile&utm_medium=android_app

Transcript

Read the transcript · about 4,140 words, follows along as you listen

हैलो एंड वेलकम बेक। टु इंडिया एनफील्ड पिछले एपिसोड में हमने तलबोट मंडी के बारे में जाना और समझा तलबोट मंडी का टाइमलेस क्रियेशन दी। नाइन अननोन मैन को भी समझा आज एपिसोड फ्री में। जिसका टाइटल है दी। नाइन फ़ील्ड्स ऑफ़ नॉलेज हम। ये डिस्कॅस करने वाले है कहा जाता है। की ये वो फ़ील्ड्स है जिनकी नॉलेज नाइन अननोन मैन ने अपने पास सेंचुरीज़ से संभल। कर रखी है। हर फील्ड में कोई एक मेंबर। स्पेशलाइज करता था और। यही नॉलेज आज। भी मिस्टीरियस है। आज हम डीप डाइव करेंगे।

उन फ़ील्ड्स में जो की साइंस और मिस्ट्री का परफेक्ट ब्लेंड है। क्नॉइस। हर एक फील्ड की जर्नी को ट्रेस करेंगे फ्रम माइथोलॉजिकल रूट्स टु मॉडर्न साइंटिफिक प्रोस्पेक्टस बिना किसी देर के। शुरुआत करते हैं। फील्ड वॅन से। पहला फील्ड है अल्कनी एक ऐसी साइंस जिसे हम हिस्टरी में। बहुत सालों से पढ़ते हैं क्नॉइस। अल्केमी का कॉन्सेप्ट एनशिएंट सिविलाइज़ेशन से ही। पॉपुलर है जैसे की। चाइना और ईजिप्ट में मेटल्स को गोल्ड में कॉनवर्ट। करना।

लेकिन क्या आपको पता है की। यही अल्केमी मॉडर्न केमिस्ट्री। काफी बेस बन गया। आज के साइंटिस्ट्स कहते है की अल्केमी के कुछ प्रिंसिपल्स। जैसे। की ट्रांसमिटेशन और प्यूरीफिकेशन क्नॉइस। मॉडर्न डे केमिकल रिएक्शन्स के कॉन्सेप्ट से मैच करते है जैसे हम। पीरियाडिक टेबल का यूज़। करते थे। एलिमेंट्स के बीच रिलेशनशिप समझने के लिए वैसा ही कुछ एनसीएंट अल्केमिस्ट भी सोचते थे मैजिक। और स्पिरिचुअलिटी के ब्रेड। के साथ अल्केमी को हम शुरुआत से

देखें तो ये एक ऐसी एनसीएंट साइंस रही। है। जो मेटल्स को ट्रांसम्यूट करने यानी एक मेटल को दूसरे मेटल में बदलने। और। फिलॉसोफर स्टोन बनाने की। कोशिश करती थी फिलॉसोफर? स्टोन एक मिथिकल सबस्टैंस माना जाता है। जो लीड को गोल्ड में बदल सकता है और जिसे अलेक्जहर ऑफ़ लाइफ भी बन सकता है, जिससे अमर होने का सपना पूरा हो सकता है। पहले अननोन मन का काम था के सीक्रेट को समझना और कंट्रोल करना। उनके पास ऐसे फ़ॉर्मूला और मेथड्स थे जो आम आदमी के लिए बियॉन्ड

कॉम्बिनेशन है और में सिर्फ मेटल्स ही नहीं पर ह्यूमन सोल और साइकी बरबी एक्सपेरिमेंट्स होते थे, एक सिम्बोलिक जॉर्नी थी। इस मेटल को पूरे गोल्ड में बदलने का मतलब था इंसान के फ्लॉज़ को प्यूरीफाई करना और उसे एनलाइटनमेंट तक ले जाना की स्टडीज़ में मेटल्स की नेचर और एनर्जी ट्रान्स्फर्मेशन के कॉन्सेप्टस है, जो मॉडर्न साइंस में थर्मोडाइनमिक्स और एनर्जी कन्ज़र्वेशन के रूल्स के साथ भी रीड किया जा सकते है। एल चेमिस्ट उस समय एक्सपेरिमेंटल और मेटाफिसिकल दोनों ही अगल से

चीजों को देखते थे, जिससे आज हम साइकोलॉजी और केमिस्ट्री में स्प्लिट करते है। पहले अननोन मैन के रिसर्च और डिस्कवरीज़ के रिकॉर्ड्स अगर कभी दुनिया में आए तो उनसे साइंस और फिलॉसोफी दोनों में आए डाइमेंशन्स जुड़ सकते है। अल्कमी में बार बार ये एम्फासिस आता है की कैसे एक इंडीविजुअल अपने अंदर के कॉन्फ्लिक्ट्स और नेगेटिव एनर्जीज़ को ट्रांसफार्म करके हायर स्टेट ऑफ़ कान्शस्नस तक पहुँच सकता है?

इन नाइन अननोनमेंट के रिकॉर्ड्स में ये एनशिएंट विस्डम और एसोटेरिक नॉलेज। इन चप्सुलते है जो इंसान को सिर्फ मटेरियल प्रोस्परिटी नहीं बल्कि स्पिरिचुअल एनलाइटनमेंट भी दे सकती है। ये सिर्फ एक शुरुआत है कॉन्सेप्ट को समझने की। अगर और डेप्त चाहिए तो फिलॉसोफर स्टोन के सिंबल्स मरकरी और सल्फर के केमिकल के सिंबल्स और। इनके डीप ऑफ फिलॉसोफिकल मीनिंग पर भी बात की जा सकती है। तो ये था अल्कमी का छोटा सा रिव्यु अगले फील्ड की तरफ चलते हैं, जो है माइक्रोबायोलॉजी तो अब हम बात करते हैं माइक्रोबायोलॉजी

की और ये कैसे एनशिएंट लोग डिजीज और इन्फेक्शंस को समझते थे बिना माइक्रोस्कोप्स के। सोचिए आज के मॉडर्न लैब्स और माइक्रोस्कोप्स के बिना वो लोग इलनेस को कैसे इंटरप्रेट करते थे?

एंड शट इंडिया ईजिप्ट और चीन में लोग डिजीज को इनविजिबल फोर्सस की तरह देखते थे और उन्होंने कुछ अर्ली हैजीन और प्रिवेंटिव मेथड्स भी डेवलॅप किया। एक एग्ज़ैम्पल है आयुर्वेद और यूनानी सिस्टम्स। जिसमे कुछ ऐसे हैजीन और डाइटरी प्रैक्टिसेज़ बताए गए है जो माइक्रोबियल इन्फेक्शंस को इनडैरेक्टली रोकने में हेल्प करते है। कुछ हिस्टोरिकल टेस्ट्स में बात की जाती है की जर्मस और कंटैमिनेशन के कॉन्सेप्टस इनडैरेक्टली समझे जा सकते है।

यही माइक्रोबायोलॉजी की फील्ड आज की मोर एंड मेडिसिन का फाउंडेशन है। आज हम वैक्सीन एंटीबायोटिक्स और इम्यूनोलोजी का कॉन्सेप्टस का यूज़ करते हैं, जो बैक्टीरिया और वाइरस को प्रिवेंट करते हैं। ऐसे देखते हैं की कैसे पुराने टेक्नीक्स और आज की माइक्रोबायोलॉजी के बीच एक ब्रिज है जो एनशिएंट नॉलेज और मॉडर्न साइंस को जोड़ता है। चलिए, माइक्रोबायोलॉजी के बेसिक पिलर्स को समझते है। माइक्रो ओर्गनिस्म्ज़ छोटे इनविजिबल बीइंग्स है जैसे

बैक्टीरिया वाइरस। ये माइक्रोर्गनिस्म्ज़ किसी भी एनवायरनमेंट में अडैप्ट हो जाते है और कुछ तो हमारे बॉडी के एसेंशियल फंक्शन्स में मदद भी करते है। लेकिन इंटरेस्टिंग बात ये है की अगर किसी के पास इनका कंप्लीट कंट्रोल हो तो वो इंसान कुछ भी कर सकता है, इंसान के हेल्त को इम्प्रूव कर सकता है या डेंजरस बीमारियां क्रियेट कर सकता है। सोचो अगर एक एनशिएंट किताब में लिखा हो कैसे स्पेसिफिक बैक्टीरिया डिसीसेस को क्यूर कर सकते है या फिर बायोलॉजिकल वेपन्स

बन सकते है। कितना पावरफुल और डेंजरस नॉलेज होगा अभी हम रिसेंट अगर देखे चोविद् 19 वास् थिस ओनली चलिए बैक्टीरिया से शुरू करते हैं। ये ऐसे माइक्रो ओर्गेनिस्म्ज़ है जो हमें दोनों तरीके से इफेक्ट कर सकते हैं। पॉसिटीव्ली ऑर नेगतिवेली? बेनेफिशियल बैक्टीरिया हम जिसे हम कहते है ये हमारे डायजेस्टिव सिस्टम्स को स्ट्रांग बनाते है। गुड हेल्त में बैक्टीरिया का रोल इतना इम्पोर्टेन्ट है की आज के साइंटिस्ट इसपे काफी रिसर्च कर रहे है लेकिन बैक्टीरिया का डार्क

साइड भी है कुछ हार्मफुल बैक्टीरिया जैसे। इंसान की हेल्त को सिविल डॅमेज कर सकते है और कुछ ऐसे भी है, जो प्लेक जैसे मैसिव एपिडेमिक्स कॉज कर सकते है। जस्ट इमेजिन अगर ये डेंजरस पैथोजन्स किसी गलत हाथ में चले जाए तो कितना बड़ा डिस्ट्रक्शन हो सकता है?

यही रीसन था कि मंडी के स्टोरी में नॉलेज को सीक्रेट रखना जरूरी था। अब हम बात करते हैं वाइरस। इसकी ये माइक्रो ओर्गेनिस्म्ज़ का एक और इंटरेस्टिंग ग्रुप है। ये बैक्टीरिया से भी छोटे और ज्यादा डेंजरस हो सकते हैं। सब को ज्यादा ही होगा कोविड 19 का वाइरस, जो पूरी दुनिया में केयोस लाया था वाइरस टेक्निकली जिंदा भी नहीं होते, लेकिन जब ये होस्ट के सेल्स के अंदर चले जाते हैं। तो रेप्लिकेट होने लगते है। फुंजाइबी माइक्रो ओर्गनिस्म् का इम्पोर्टेन्ट और मिस्टीरियस ग्रुप

है। हम फुंजाइ को इन्फेक्शन और डिजीज को एसोसिएट करते है जैसे एथलीट्स फुट और रिंगवर्म लेकिन फुंजाइ के कुछ स्ट्रेन्स एंटीबायोटिक्स के सोर्सेस भी है जैसे पेनिसिलिन जोलेक्सेंडा फ्लेमिंग ने डिस्कवरी किया था। और जिसने मेडिकल साइंस में रेवोल्यूशन लाने में मदद की, जस्ट इमेजिन दी नाइन नोन के मेंबर के पास फुंजाइ की हीलिंग और दिस्त्रुच्तिवे पावर कर नॉलेज वो फुंजाइ के इन्फेक्शस डिजीज को ट्रीट कर सकते है और फुंजाइ जो बायो वेपन की तरह यूज़ हो सकते

है? यही रीसन है कि माइक्रोबायोलॉजी में? फंजाइ का स्टडी आज भी एक मिस्ट्री है क्योंकि फंजाइ के कुछ स्पीशीज़ हमेशा अनप्रेडिक्टेबल होते है। इवन इफ यू से मशरूम्स, वो भी फंजाइ है। आज की दुनिया में माइक्रोबायोलॉजी और टेक्नोलॉजी में इतने अडवांसमेंट्स हो चूके है की हम जिन एडिटिंग, सिन्थेटिक बायोलोजी और बायो इंजीनियरिंग कर सकते है। लेकिन हर नई डिस्कवरी के साथ एथिकल क्वेश्चन्स भी उठते है। अगर हम किसी बैक्टीरिया को जेनेटिक मॉडिफाई करके मेडिसिन बना सकते है तो हम उस बैक्टीरिया को

वेपन भी बना सकते है। ना? ये कॉन्सेप्ट आज भी रेलेवेंट है। माइक्रोबायोलॉजी जिसे हम ज़िन्दगी और मौत के बीच का साइंस कह सकते है। वो एक डेलिकेट बैलेंस है जैसे मंडी ने अपनी कहानी में दिखाया कि नॉलेज पावरफुल है पर ज़रूरी नहीं कि सेफ हो हमारी रिस्पांसिबिलिटी है कि हम इसका यूज़ कैसे कर रहे हैं। हमें इसका यूज़ ह्यूमानिटी के बेनिफिट के लिए करना चाहिए, जो सेफ और एथिकुलम। चलिए इसी के साथ बढ़ते हैं अपने अगले और काफी मिस्टीरियस फील्ड की तरफ मैएंड कंट्रोल मैएंड कंट्रोल

यानी कि किसी के थॉट्स इमोशन्स और बेहेवियर को कंट्रोल करना। आज के मॉडर्न साइकोलॉजी, न्यूरो साइंस टेक्नोलॉजी के माध्यम से हम कुछ चीजें समझते हैं। तो चलिए इस जर्नी को एक्सप्लोर करते हैं। तो पहले मैएंड कंट्रोल को थोड़ा समझते है। ये कॉन्सेप्ट एनशिएंट टाइम से प्रेसेंट है मंत्र, हिप्नोसिस और सजेशन के द्वारा किसी के मैएंड को इन्फ्लुयेन्स करना हम आज भी मैएंड कंट्रोल को टेक्निकली अचीव कर सकते है। हिप्नोसिस सबलिमिनल मैसेजिंग और

बेहेवियर कंडीशनिंग के जरिये। मैएंड कंट्रोल का सबसे पहला और सिंपल टूल है हिप्नोसिस हिप्नोसिस एक ऐसा मेथड है जिसमें किसी को डीपली रिलैक्स करके उनके सब कॉन्शॅस मैएंड को अक्टिवेट किया जा सकता है ताकि वो सजेशन्स को बिना कॉन्शॅस्ली रेजिस्ट किए एक्सेप्ट कर सके। आज के जमाने में थेरेपी के लिए यूज़ होता है ये। लेकिन सोचो अगर कोई एनशिएंट मस्ट इसको वारफेयर या किसी किसी भी नेगेटिव चीज़ के लिए यूज़ करे तो इमेजिन करो। दी नाइन अननोन के एक मेंबर के पास

ऐसी किताब हो जो हिप्नोटिक टेक्नीक्स को वारफेयर में यूज़ कर सके की टेक्नीक्स किसी से भी ऐसे काम करवा सकती है जो। कॉन्सियसली वो कभी न करे यही है मैएंड कंट्रोल का एक डेंजरस एस्पेक्ट मॉडर्न टेक्नोलॉजी के एरा में मैएंड कंट्रोल के और भी अडवांस्ड मेथड्स है। अब हमने डिस्कवरी किये है ब्रेन वेस्ट और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फ़ील्ड्स के साथ मैएंड को इन्फ्लुयेन्स कर सकना। कुछ साइंटिस्ट ऐसे डिवाइसेज़ पर काम कर रहे हैं जो ब्रेन को स्टिमुलेट करके मूड अटेंशन ऑर थॉट

को चेंज कर सकते हैं। बट नाइन अननोन के पास एनशिएंट टाइम्स में शायद बिना किसी गैजेट के ही दिमाग को कंट्रोल करने का तरीका होता था। बिना किसी ट्रेस के। आज जो हम बिना कॅाटाक्ट के मैएंड कंट्रोल के पॉसिबिलिटीज़ देखते है, वो किसी भी इंसान के बेहेवियर और थॉट्स को बिना उनके पास जाए इन्फ्लुयेन्स कर सकती है। मैएंड कंट्रोल का एक और डार्क और शटल तरीका है सब लिमिटल मैसेजिंग के मैंने बताया यानी की ऐसे हिडन मैसेजस जो कन्स्यूस मैएंड को डाइरेक्टली हिट नहीं करते।

लेकिन। सबकॉन्षियस मैएंड पर इफेक्ट डालते है आज के अड्वर्टाइज़िंग में इसका काफी यूज़ होता है। ब्रांड्स आपको बिना डाइरेक्टली इन्फ्लुयेन्स किये कुछ स्पेसिफिक चीजें फील करवा सकते है। मैएंड कंट्रोल का एक और इंटरेस्टिंग कॉन्सेप्ट है न्यूरोलिंग्विस्टिक प्रोग्रामिंग। एन एलपी। जो की लैंगुएज ऑर कम्यूनिकेशन के थ्रू किसी के थिंकिंग ऑर बेहेवियर पैटर्न्स को ऑल्टर कर सकता है। एन एलपी का यूज़ आज के कोचेस और थेरेपिस्ट करते है, लेकिन सोचो,

अगर तब जो एन एलपी की ऐसे अडवांस टेक्नीक्स सिखाए जो किसी भी इंसान का माइंडसेट चेंज कर सके। और जब हम ब्रेन वॉशिंग की बात करते हैं तो ये एक ऐसा प्रोसेसर है जिसमें किसी इंसान को रेपितेद्ली कंडीशन किया जाता है ताकि वो अपने आपको बदल दे या नई बिलीफ्स एक्सेप्ट कर ले। ये आज के दिन में पोलिटिकल और साइकोलॉजिकल वारफेयर में यूज़ होता है। सच अगर उनके पास ब्रेन वॉशिंग कैसे?

किसी भी सोसाइटी या आर्मी को कंट्रोल कर सके तो कैसा होगा? ये फील्ड सुनने में ही इंट्रिगिंग लगता है। मैएंड कंट्रोल सोचिए प्राचीन समय में भी लोग एक दूसरे के थॉट और बेहेवियर को इन्फ्लुयेन्स करने की टेकनीक जानते थे। एनशिएंट कल्चर्स में स्पिरिचुअल प्रैक्टिसेज़ और मेडिटेशन को मैएंड कंट्रोल का एक फॉर्म माना जाता है। लोगों को मानसिक तौर पर ट्रैन करना और उनके विचारधारा को इन्फ्लुयेन्स करना एक अहम टेकनिक थी जो स्पिरिचुअल गुरूजीस और

हीलर्स यूज़ करते थे। दोस्तों, आज के जमाने में मैएंड कंट्रोल का कॉन्सेप्ट मॉडर्न न्यूरो साइंस और साइकोलॉजी के साथ इवॉल्व हो चुका है। ये सोचना काफी फैसिनेटिंग है कि शायद एनशिएंट नॉलेज इसमें भी काफी आगे था। अगले फील्ड पर चलते हैं, जो इससे काफी रिलेटेड है। प्रोपेगंडा और मीडिया मैनिपुलेशन सो। जस्ट इमेजिन। अगर किसी के पास ऐसा नॉलेज हो, जो मैसेस को कंट्रोल कर सके, उनके सोचने का तरीका बदल सके, एक ऐसी नॉलेज जो किसी भी सोसाइटी को इन्फ्लुयेन्स कर सकती है, चाहे वो

सच हो या झूठ पॉलिटिशंस याद आ गए। प्रोपेगंडा का मतलब है सेलेक्टिवली इन्फॉर्मेशन और मीडिया का यूज़ करके किसी का परसेप्शन और बेहेवियर कंट्रोल करना। ये एनशिएंट टाइम्स में भी था और आज भी पोलिटिकल कैंपेन अड्वर्टाइज़िंग, सोशल मीडिया और बहुत सारी चीजों में बहुत बड़ा इम्पैक्ट डालता है। प्रोपेगंडा का कॉन्सेप्ट एनशिएंट टाइम से है। लीडर्स और किंग अपनी पावर ऑर इमेज को सस्टेन करने के लिए अलग अलग तरीके इस्तेमाल करते थे। आज के सोशल मीडिया में भी हम देखते है की इन्फॉर्मेशन को कैसे

मैनिपुलेट किया जाता है। नाइन अननोन के पास शायद वो स्किल्स ऑर अंडरस्टैंडिंग थी जिससे वो किसी भी मैसेज को किसी भी क्राउड के इमोशन्स ऑर बिलीफ्स के साथ। कर सकते थे। आज की दुनिया में मीडिया मैनिपुलेशन काफी अडवांस्ड हो गई है। ये तरीके से सिर्फ न्यूस और टी वि तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल वर्ल्ड में भी बहुत पावरफुल हो गई है कुछ टेक्नीक्स जिसमें फॅक्ट ऑफ़ फिक्शन को मिक्स करके एक नैरेटिव क्रियेट किया जाता है, जो मास को अपनी तरफ खींचता है। दी।

नाइन अननोन में से एक के पास ऐसे टूल्स और स्ट्रेटेजीज थी जो लोगों को साइकोलॉजिकली डीप्ली समझ सके। जैसे फ्रेमिंग सेलेक्टिव इन्फॉर्मेशन शेयरिंग और एमोशनल अपील से भी किसी भी मैसेज को पावरफुल और इम्पैक्टफुल बना सकते थे। यही मीडिया मैनिपुलेशन का सेंस है। एक ऐसा इन्फ्लुयेन्स जो अपनी लोगों को अपनी सोच और व्यूस को सलौली शिफ्ट करता है। प्रोपागंडा का एक और पावरफुल एस्पेक्ट है फियर ऑर होप का यूज़ हिस्टरी में कई बार हमने देखा है की कैसे फियर को क्रियेट करके मैसेस को कंट्रोल किया गया है,

चाहे वो के टाइम पे हो या पोलिटिकल कैंपेनस में। एक ऐसी पावर है जो किसी भी सोसाइटी में अनरेस्ट या कंट्रोल क्रियेट कर सकता है। ये नॉलेज बिना किसी वेपन के एक पावरफुल इन्फ्लुयेन्स क्रियेट कर सकती है, क्योंकि जब लोगों के इमोशन्स कंट्रोल में होते है तो उनके अक्शॅन्स तो ऑब्वियस्ली कंट्रोल में हो जाएंगे। आज के जमाने में इन्फॉर्मेशन वारफेयर का एक नया प्लेटफार्म है। सोशल मीडिया, सोशल मीडिया पे किसी भी नैरेटिव को वैरल बनाया जा सकता है।

फेक न्यूस मिस इन्फॉर्मेशन का इस्तेमाल करके ये प्रोपागंडा का एक और पावरफुल टूल बन गया है, जिसे दुनिया भर में इन्फ्लुयेन्स क्रियेट किया जा सकता है। जहाज हम अलगोरिथ और डेटा माइनिंग के थ्रू ट्रेंडस ऑर पैटर्न समझते हैं। वहीं अगर एनशिएंट टाइम्स में भी ऐसे शटल मैनिपुलेशन टूल्स होते तो उसका इम्पैक्ट क्या होता ये सोचा भी नहीं जा सकता। प्रोपरगंडा और मीडिया मैनिपुलेशन एक डेंजरस कॉन्सेप्ट है। जब सच और झूठ के बीच का डिफरेंस इरीस हो जाता है, तो हमारा दिमाग

काम ही नहीं करेगा। आज के टाइम में फेक न्यूस और प्रोपरगंडा इतना कामन हो चूका है की सच्चाई और मिस इन्फॉर्मेशन के बीच एक पतली सी लाइन रह गयी है। बस यही रीसन था की दी नाइन अननोन का ज्ञान स्ट्रिक्टली प्रोटेक्ट किया गया था। क्योंकि नॉलेज और ट्रुथ का मिसयूज इसिली हो सकता है। पावर और इन्फ्लुयेन्स के साथ रिस्पांसिबिलिटी का होना भी उतना ही जरूरी है। हर नई इन्फॉर्मेशन और न्यूस के साथ हमारी रिस्पांसिबिलिटी है की हम उसकी सच्चाई और इंटेंट को समझे

और आगे शेयर करे। हिस्टरी में देखा गया है की एनशिएंट ट्रूलर्स ऑर किंग अपने आइडियास ऑर बिलीफ्स को लोगों तक पहुंचाने के लिए काफी स्ट्रांग मेसेजिंग ऑर सिंबल्स का यूज़ करते थे। आपको याद है?

रोमन एम्पायर और इवन इंडियन एम्पायर्स में भी ऐसे सिस्टम्स थे जिनके थ्रू एक स्ट्रक्चर्ड प्रोपागंडा कैंपेन चलाया जाता था। टेम्पल्स आर्ट और इवन स्टोरी टेलिंग में प्रोपागंडा के एलिमेंट्स होती थी, जो आज के अड्वर्टाइज़िंग और ब्रांडिंग से सिमिलर है। आज का ज़माना तो पूरा डिजिटल है जिसमे सोशल मीडिया, न्यूस चैनल और इवन मूवीज़ के थ्रू लोगों के थॉट प्रोसेसर को इन्फ्लुयेन्स किया जाता है। फेक न्यूस और टारगेटेड ऐड्स भी प्रोपरगंडा के ही पार्ट्स है, जो

मॉडर्न टूल्स के थ्रू लोगों तक पहुंचाया जाता है तो ये फील एनशिएंट और मॉडर्न वर्ल्ड का एक स्ट्रांग कनेक्शन बनाता है। अब अगले कुछ फ़ील्ड्स में भी कुछ ऐसे ही एलिमेंट्स है जिनकी अपनी एक कहानी है। आइये मैंने भी सुनते है अगला फील्ड है कम्यूनिकेशन दी कॉन्सेप्ट में कहा जाता है की नॉलेज को सिर्फ समझना नहीं है बल्कि इफेक्टिवली कन्वे भी करना है। ये कला है। जैसे वो नॉलेज आगे बढ़े और और पावरफुल बन सके। कम्यूनिकेशन का मतलब सिर्फ बातें करना नहीं है।

ये इमोशन्स आइडियास और पर्सपेक्टिव को कन्वे करने का एक तरीका है जो किसी इंसान को इन्फ्लुयेन्स कर सकता है और इससे। ये पता चलता है कि कैसे कैसे के माइंड और हार्ट को कनेक्ट करके उनके थॉट्स और अक्शॅन्स को अफेक्ट किया जा सकता है। कम्यूनिकेशन का पहला और सबसे बेसिक एस्पेक्ट है ह्यूमन कनेक्शन। जब दो इंसान एक दूसरे से कम्यूनिकेट करते हैं तो वो सिर्फ शब्दों के जरिए नहीं बल्कि इमोशन्स और बॉडी लैंगुएज के थ्रू भी एक बांड क्रियेट करते हैं।

ये कैसा प्रोसेसर है जो ट्रस्ट ऑर अंडरस्टैंडिंग के बेस को बनाता है? बिल्ड करता है। शायद नॉलेज था जो ये समझता था और समझाता था कि कैसे लोगों के अंदर एम्पथी और कनेक्शन डेवलॅप किया जा सकता है जिससे वो अपने आइडियास ऑर बिलीफ्स को। एक सिक्योर और इम्पैक्टफुल तरीके से शेयर कर सके। वर्बल कम्यूनिकेशन के अलावा नॉन वर्बल कम्यूनिकेशन जिसमे बॉडी लैंगुएज, चेस्चर्स और आइ कॅाटाक्ट शामिल है, एक पावरफुल टूल है नॉन वर्बल क्यूस का राइट यूज़।

किसी भी मैसेज के इम्पैक्ट को दोगुना कर सकता है। ये सिग्नल से कन्वे करते है की कम्यूनिकेटर का इंटेंट क्या है? और इनके कॉन्फिडेंस और तृथफुलनेस को एनहान्स कर सकते है। आज भी बॉडी लैंग्वेज एक्सपर्ट्स ऑर साइकोलॉजिस्ट अब इसपे काम कर रहे है, लेकिन दी नाइन अननोन के मेंबर्स को शायद एनशिएंट टाइम से ही कैसे बिना बोले अपने मैसेज ऑर इम्पैक्ट?

को कम्यूनिकेट किया जाए। ये भी कम्यूनिकेशन के रेल में एक अलग लेवल है जो किसी भी डायलॉग या निगोशिएशन एक अडवांटेज में बदल सकता है। पर्सुएशन यानी दूसरों को अपने आइडियास और बिलीफ्स को एक्सेप्ट करने के लिए इन्फ्लुयेन्स करना भी कम्यूनिकेशन का एक पावरफुल एस्पेक्ट है। एक ऐसी स्किल है जो किसी भी लीडरशिप, डिप्लोमेसी और नेगोशिएशन में काम आती है। इफेक्टिव पर्सुलेशन के कुछ प्रिंसिपल जैसे रेसिप्रोसिटी अथॉरिटी और कन्सिस्टेन्सी, जो

किसी भी कन्वर्सेशन को एक स्पेसिफिक डायरेक्शन में कर सकते है। ये टेक्नीक्स किसी भी इंसान के थॉट प्रोसेसर को बिना फोर्स किये बदल सकती है जिससे वो कम्यूनिकेटर के व्यूपॉइंट को एफर्टलेसली एक्सेप्ट करले। ये आठ पोलिटिकल लीडर्स फिलोसोफर और डिप्लोमैट्स के लिए काफी वैल्युएबल थी और ऑब्वियस्ली आज भी है। स्टोरी टेलिंग कम्यूनिकेशन का एक और एनशिएंट और इम्पैक्टफुल तरीका है। एक पावरफुल स्टोरी किसी भी ड्राई इन्फॉर्मेशन को रीलेटबल और मेमोरेबल बना सकती है।

जस्ट लाइक युअर लिसनिंग टु इट स्टोरी टेलिंग का राइट यूज़ किसी भी कॉम्प्लिकेटेड कॉन्सेप्ट या मैसेज को ऐसे डेलिवर कर सकता है की वो ऑडिएंस के मैएंड में रजिस्टर हो जाए। और उनके इमोशन्स को भी टॅच करें। कहानियों हमेशा से नॉलेज को पास ऑन करने का एक आसान और इफेक्टिव तरीका रहा है और आज भी स्टोरी टेलिंग की टेक्नीक्स जैसे मेटाफोर, ऐनालॉजीज और का यूज़ किया जाता है। ताकि लोगों तक नॉलेज इसिली पहुंचे और वो उसे कनेक्ट भी कर पाए। आज के टाइम में कम्यूनिकेशन का एक

इम्पोर्टेन्ट एस्पेक्ट है। डिजिटल प्लैटफॉर्म्स के थ्रू जैसे फास्ट इन्फॉर्मेशन एक्स्चेंज होता है। टेक्नोलॉजी के साथ हमें इन्स्टंट मेसेजिंग और सोशल मीडिया के जरिए वर्ल्डवाईड आउटरीच का अडवांटेज मिला है, लेकिन इस फास्ट पेस डिजिटल कम्यूनिकेशन के साथ एक रिस्क भी है। मिस इंटरप्रेशन और। मिस इन्फॉर्मेशन क्विक कम्यूनिकेशन के साथ सबसे इम्पोर्टेन्ट एस्पेक्ट है। क्लैरिटी और ऑथेंटिसिटी का। जब नॉलेज स्पीड के साथ वाइड्ली शेयर होती है तो उसकी क्रेडिबिलिटी और इंटेंट पे ध्यान

देना और भी जरूरी होता है। आखिर में कम्यूनिकेशन की यही है कि वो नॉलेज को शेप और स्प्रेड कर सके। नॉलेज का कम्यूनिकेशन इतना जरूरी है जितना उसे अक्वायर करना, क्योंकि यही वो प्रोसेसर है, जो नॉलेज को इम्पैक्टफुल और लास्टिंग बनाता है। वरना सब कुछ कोलैप्स हो जाएगा। ह्यूमन सोसाइटी के लिए कम्यूनिकेशन एक जरूरी चीज़ है। और इसके बिना तो सिविलाइज़ेशन का ग्रो होना पॉसिबल ही नहीं है। आज हम डिजिटल कम्यूनिकेशन और इन्स्टंट मेसेजिंग में जीते है

लेकिन प्राचीन समय में भी कम्यूनिकेशन अडवांस्ड था एनशिएंट सिविलाइज़ेशन में, जैसे की और ईजिप्ट में और इंडस वैली सिविलाइज़ेशन में। लोगों ने सिंबल्स और राइटिंग्स का यूज़ करना शुरू कर दिया था और ये एक स्ट्रक्चर्ड कम्यूनिकेशन सिस्टम बन गया था। यहाँ तक की कुछ सिविलाइज़ेशन में अर्ली फॉर्म्स ऑफ़ पोस्टल सर्विसेज भी डेवलप हो गए थे। अगर आप जानना चाहते है तो हेड अप टु दी एपिसोड सिविलाइज़ेशन यू विल गेट इमेंस। इन्फॉर्मेशन अबाउट एव्रीथिंग इन

दी सिविलाइज़ेशन आज के टाइम में डिजिटल टूल्स इंटरनेट सॅटीलाइट कम्यूनिकेशन ने हमारे कम्यूनिकेशन को स्पीड अप कर दिया है और हमारे रीच को भी बहुत इम्प्रूव कर दिया है। पर ये सोचना इंटरेस्टिंग है कि शायद एनसिएंट टाइम्स में भी कम्यूनिकेशन की नॉलेज को प्रोटेक्ट किया जाता था। ये फील्ड दी नाइन अननोन के लिए एक और मिस्टीरियस बट इम्पोर्टेन्ट रिस्पांसिबिलिटी थी। हमारी नेक्स्ट फील्ड है वारफेयर टेक्नोलॉजी वारफेयर का मतलब है एस ए टूल्स स्ट्रेटेजीज एंड वेपन्स

जो बैटलफील्ड में किसी भी आर्मी को स्ट्रेटेजिक अडवांटेज दे सकते है। इसमें एनशिएंट टाइम्स के लेथल वेपन्स से लेकर मॉडर्न डे रोबॉटिक्स और ए आई के ऐप्लिकेशंस शामिल है। वारफेयर के एनशिएंट नॉलेज काफी पावरफुल ऑर सिम्बोलिक माना जाता है, जो वारफेयर की साइकोलॉजिकल और स्ट्रैटेजिक एस्पेक्ट्स को समझने में हेल्प करते थे। एनशिएंट वारियर जिससे आज हम। शायद सुपरस्टीशन या टैक्टिक्स समझते है उनका असली एसेंस वारफेयर के साइकोलॉजिकल इम्पैक्ट में होता

है। ये टेकनीक किसी भी आर्मी की मुराल और करेज को डीपली अफेक्ट कर सकते है। एनशिएंट टाइम्स में ऐसे वेपन्स और स्ट्रेटेजीज भी होते थे जो विज़ुअली टेरिफाइइंग और साइकोलॉजिकली देस्ट्रक्टिवे थे। की किताबों में ये नॉलेज सिर्फ और फेर से रिलेटेड नहीं बल्कि उनके साइकोलॉजिकल और स्पिरिचुअल एस्पेक्ट्स का भी राज़ होल्ड करती थी, जो किसी भी आर्मी के माइंडसेट को डाइरेक्टली इन्फ्लुयेन्स कर सकती थी। वारफेयर टेक्नोलॉजी का एक डार्क और अडवांस साइड है। केमिकल ऑर बायोलॉजिकल वेपन्स का

इस्तेमाल। एनशिएंट टाइम्स में ये टेक्निक अर्ली स्टेजेस में होती थी जैसे पॉइज़न नैरोस, पॉइज़न वाटर सप्लाइज या एपिडेमिक टैक्टिक्स। लेकिन नाइन नोन के पास वो डीपर साइंटिफिक अंडरस्टैंडिंग थी, जो समझे की कैसे किसी भी इंसानी दुश्मन के अगेंस्ट बायोलॉजिकल या केमिकल एजेंट्स यूज़ किया जा सकता है? बिना किसी ट्रेस के?

एनशिएंट ऑर मॉडर्न मोर फेयर में टेल्स ऑर सर्वेलेंस टेक्नीक्स का बहुत बड़ा रोल होता है। ये टेक्नीक्स अलाउ करती है की एक आर्मी अपने दुश्मन के मूवमेंट्स ऑर प्लेन्स को बिना उन्हें पता चले ट्रैक कर सके। एनशिएंट फोर फेयर में स्काउट ऑर स्पाइस का रोल इम्पोर्टेन्ट था, ऐसे टेक्नीक्स थी। जो किसी भी एनिमी के इन्फॉर्मेशन और मूवमेंट्स को बिना फिजिकल प्रेसेंट्स के अंडरस्टैंड कर सके। आज के मॉडर्न जमाने में स्टिल्स, टेक्नोलॉजी और ड्रोन्स का इस्तेमाल होता है।

लेकिन शायद के नॉलेज में स्टिल का एक और ही सटल और अडवांस लेयर था, जो परसेप्शन और इनविजिबिलिटी के कॉन्सेप्ट को इफेक्टिवली यूज़ कर सकता था। कि नॉलेज किसी भी एनिमी को बिना उनके प्रजेंस के कंप्लीट्ली वल्नरेबल बना सकता है। वारफेयर टेक्नोलॉजी में साइकोलॉजिकल वारफेयर का एस्पेक्ट भी उतना ही क्रूशियल है। साइकोलॉजिकल वारफेयर के टेक्नीक्स किसी भी आर्मी या सोसाइटी को एमोशनली और मेंटली कंट्रोल करने के लिए यूज़ होती है। आज भी साइकोलॉजिकल ऑपरेशन्स का

यूज़ मिलिट्री और इन्टेलिजेन्स एजेंसीज करती है। लेकिन दी नाइन अननोन के सीक्रेट नॉलेज में ऐसे अडवांस्ड माइंड इन्फ्लुयेन्स टेक्नीक्स थी जो बिना दिखाए उन्हें मेंटली एग्ज़ॉस्ट और डिसोरिएंट कर सकती थी। ये वो डाइमेंशन है, जो बिना फिजिकल वेपन्स के भी एक पावरफुल इम्पैक्ट क्रियेट करता है। मॉडर्न वारफेयर टेक्नोलॉजी के अडवांस्ड फॉर्म्स में रोबॉटिक्स और आर्टिफीसियल इन्टेलिजेन्स का बड़ा रोल है। ऑटोमेटेड वेपन्स और ए आई बेस्ड

डिसीजन जैसे की। मैंने कहा इसे यूज़ करके वारफेयर को आज भी और प्रिसाइस और ऑटोमेटेड बनाया गया है। वारफेयर टेक्नोलॉजी एक ऐसा फील है जो हमेशा से एवोल्यूशन में है। और अभी भी हो रहा है। वारफेयर का इम्पैक्ट एक सोसाइटी कल्चर और सिविलाइज़ेशन पर काफी बड़ा होता है। वॉर और कॉनफ्लिक्ट तो हमेशा से ह्यूमन हिस्टरी का हिस्सा रहे है और कहा जाता है की प्राचीन समय में भी वारफेयर में स्पेशल टैक्टिक्स और वेपन्स का यूज़ किया जाता था। एनशिएंट इंडिया में अडवांस वेपन मेकिंग और इवन केमिकल वारफेयर

जैसे टेक्नीक्स थे। आइरन और मेटलर्जी का अर्ली यूज़ वारफेयर में किया जाता था और कुछ टेस्ट में मेंशन्स मिलते हैं कि कैसे स्ट्रैटेजिक पॉइंट्स और साइकोलॉजिकल वारफेयर यूज़ होते थे तो ये तो वारफेयर टेक्नोलॉजी जो एक फैसिनेटिंग और कॉम्प्लेक्स फील्ड है। हमने इस एपिसोड में बात की दी फ़ील्ड्स ऑफ़ नॉलेज जो नाइन अननोन कैर्री करते थे और कैर्री करते हैं। शायद हम इस एपिसोड को कंटिन्यू करेंगे। अगले पार्ट में आई होप कि आपको ये एपिसोड नॉलेजबल लगा होगा। आपने कुछ नया सीखा होगा कुछ।

नया सुना होगा। अगर आप ऐसे ही और एपिसोड्स सुनना चाहते है तो डोन्ट फर्गेट टु एक्सप्लोर दी एपिसोड लिस्ट ऑफ़ इंडिया अनवेल यहाँ पे आपको बहुत डेटा मिलेगा। मैं मिलूंगा आप से दी नाइन फ़ील्ड्स ऑफ़ नॉलेज के अगले पार्ट में तब तक। थिस इस राकेश साइनिंग अप फ्रॉम इंडिया अनवेल्ड थैंक यू फ़ोर लिसनिंग।

Transcript supplied by the publisher with the episode.

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India Unveiled

Rakesh Soni · History · Hindi

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