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Sumeria: The Cradle of CivilizationWritten history spans roughly 6,000 years. For half of this period, the center of the world was the "Near East" (including modern Iraq, Iran, and Egypt). These ancient peoples did not merely exist; they invented the foundations of modern life: agriculture, coinage, law, mathematics, medicine, and writing. The origins of European and American progress—and even Greek science—trace back not to the "Aryans," but to these pioneers of the Middle East.I. Elam: The Culture of SusaTo the east of Sumer, in modern-day Iran, lay Elam. Its capital, Susa, dates back to…
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लिखा हुआ इतिहास कम से कम 6000 साल पुराना है। इस लंबे समय के आधे हिस्से तक दुनिया का सेंटर मिडिल ईस्ट ही रहा। इसमें रूस के नीचे का एशिया का हिस्सा और ईजिप्ट भी शामिल था। यहाँ के लोगों ने वो चीजें बनाई जिन्हें हम आज भी इस्तेमाल करते हैं। इन्हीं लोगों ने खेती बाड़ी घोड़े, गाड़ी, सिक्के, कानून, गणित यानी मैथेमेटिक्स और दवाइयां शुरू की, यहाँ तक कि घड़ी कैलेंडर। पेपर और इंक और स्कूल्स और बुक्स भी वहीं पैदा हुई। आज की यूरोप और अमेरिका की तरक्की
इसी पुरानी सभ्यता की देन है। आर्य या आर्यन्स लोगों ने सभ्यता नहीं बनाई। उन्होंने इसे बेबीलोन और मिस्र से सीखा था। ग्रीस यानी यूनान ने भी अपनी कला और विज्ञान अपने इन पुराने पूर्वजों से ही पाया था। जब हम मिडिल ईस्ट का सम्मान करते हैं तो हम असल में उन लोगों का शुक्रिया अदा करते हैं जिन्होंने आज की दुनिया की नींव रखी। अगर आप आज के ईरान यानी पर्शिया का नक्शा देखें तो खाड़ी से उत्तर की तरफ सूसा नाम का एक पुराना शहर था। इस इलाके को यहूदी इलम कहते थे, जिसका मतलब है ऊंची जमीन।
इसके एक तरफ दलदल था और दूसरी तरफ ऊंचे पहाड़। यहाँ के लोगों ने दुनिया की सबसे पहली सभ्यताओं में से एक को जन्म दिया। यहाँ खुदाई में 20,000 साल पुराने इंसानी अवशेष मिले हैं। करीब 4500 बीसी तक यहाँ का समाज बहुत आगे बढ़ चुका था। ऐसा लगता है कि यहाँ के लोग पहले शिकारी थे पर वे बहुत जल्दी किसान बन गए। उनके पास कॉपर के हथियार थे और वो लिखना भी जानते थे। उनके पास सुंदर जेवर और आईने भी थे। उनका व्यापार मिस्र से लेकर भारत तक फैला हुआ था। वे मिट्टी के बर्तनों पर बहुत ही सुंदर बेलबूटे और जानवरों की
तस्वीरें बनाते थे। उनके कुछ बर्तन तो इंसान के बनाए सबसे बेहतरीन बर्तनों में गिने जाते हैं। कुम्हार का पहिया या पॉटर्स व्हील और गाड़ी का पहिया यानी वेगन व्हील सबसे पहले यही इस्तेमाल किया गया। बाद में बेबीलोन और मिस्र तक पहुंचा। सुसा शहर 6000 सालों तक जिंदा रहा और उसने बड़े बड़े राजाओं का दौर देखा। साल 646 में जब सीरिया के राजा ने इसे लूटा तो अपने साथ बेशुमार सोना, चांदी और शाही रथ ले गए। इतिहास में कला और जंग का यह सिलसिला हमेशा से चलता आया है।
अगर हम नक्शे पर वापस चले तो खाड़ी से निकलने वाली दो मशहूर नदियां दजला और फराद इन डिग्री सैंड। इफ़ेरतिस जहाँ अलग होती है, वहीं उत्तर और दक्षिण में पुराने सुमेरिया के दबे हुए शहर बसे थे। इनमें उर्ख, लगाश और निपुर जैसे नाम शामिल है। अगर आप फरात नदी के किनारे किनारे उत्तर पश्चिम की तरफ चले तो बेबी लोन आएगा, जो समय का सबसे मशहूर शहर था। इसके पूर्व में किस और उत्तर में अक्कड़ की राजधानी थी मेसोपोटामिया का शुरुआती इतिहास?
असल में उत्तर के लोगों और दक्षिण के सुमेरियाई लोगों के बीच अपनी आज़ादी बचाने की एक लंबी जंग है। इसी खींचतान के बीच इन सब ने मिलकर दुनिया की पहली और सबसे महान सभ्यता खड़ी कर दी। इतनी खोज के बाद भी हम पक्के तौर पर नहीं कह सकते कि सुमेरिया के लोग किस नस्ल के थे, किस रेस के थे या वे कहाँ से आए थे, शायद वे मध्य एशिया शायद वे सेंट्रल एशिया या पहाड़ों से आए थे। कुछ कहानियों कहते हैं कि वे समंदर के रास्ते खाड़ी में पहुंचे और फिर नदियों के किनारे बस गए। उनकी भाषा और रहन सहन देखकर कुछ
लोग उन्हें पुराने ईरान या पुराने पर्शिया, यहाँ तक कि मंगोलिया से भी जोड़तें हैं। पर सच क्या है? यह कोई नहीं जानता। पुराने निशान बताते हैं कि ये लोग थोड़े नाटे और मजबूत कद काठी के थे। उनकी नाक लंबी और सीधी थी और आंखें नीचे की तरफ झुकी हुई थीं। बहुत से लोग दाढ़ी रखते थे तो कुछ पूरी तरह। क्लीन सेवेन भी थे। वे बेहतरीन उन के कपड़े पहनते थे। औरतें अपना कपड़ा बाएं कंधे से लपेटती थी जबकि मर्द इसी कमर पर बांधते थे और शरीर का ऊपरी हिस्सा खुला रखते थे।
जैसे जैसे सभ्यता बढ़ी, कपड़े गले तक पहुँच गए। घर के नौकर अक्सर नंगे बदन ही काम करते थे। लोग सिर पर टोपी और पैरों में सैंडल पहनते थे, लेकिन अमीर औरतें चमड़े के जूते पहनती थी जो फीतों से बंधे होते थे। औरतों को चिड़िया हार और झुमके पहनने का बहुत शौक था। उस जमाने में भी औरत की सजावट से ही उसके पति की अमीरी का अंदाजा लगाया जाता था, जब यह सभ्यता बहुत पुरानी हो गई। करीब 2300 ईसा पूर्व तो वहाँ के कवियों ने अपनी पुरानी कहानियों लिखनी शुरू की। उन्होंने दुनिया के बनने और एक
महाप्रलय, एक दफलर की कहानी लिखी जिसने सब कुछ तबाह कर दिया। यह कहानी आगे चलकर बेबीलोन और यहूदियों की परंपराओं में भी शामिल हुई। 1929 में प्रोफेसर वुली ने जब। और की खुदाई की तो उन्हें बहुत गहराई में मिट्टी की एक आठ फिट मोटी परत मिली। उनका मानना था कि यह परत उसी भयानक बाढ़ की वजह से जमी थी। इस परत के नीचे बहुत पुरानी चीजें मिली जिन्हें बाद के कवियों ने सुनहरा, घोर या गोल्डन एज कहा। पुजारियों और इतिहासकारों ने राजाओं की लंबी लिस्ट तैयार की।
उन्होंने कुछ राजाओं के राज़ करने का समय हजारों साल तक बता दिया। उन्होंने गिलगमे और तमुष जैसे महान राजाओं की कहानियों सुनाईं। गिल्गमे सागे चलकर बेबीलोन की कविताओं का हीरो बना और तमुष को ग्रीक ने यूनानियों ने अपना देवता मान लिया। नुपुर शहर की खुदाई 66 फिट तक नीचे की गई है, जिससे पता चलता है कि यह सभ्यता कम से कम। 5000 ईसा पूर्व 5000 बीसी जितनी पुरानी है। 3000 बीसी के बाद से मिट्टी की तख्तियों पर राजाओं का सही इतिहास मिलना शुरू होता है।
इसमें उर लगाश। और उरुक के राजाओं की जीत और उनकी मौत का जिक्र है। लगाश का एक राजा था उरुका गिना। वह एक बहुत ही भला और सुधारक राजा था रिफॉर्मर उसने ऐसे नियम बनाए ताकि अमीर लोग गरीबों का खून न चूस सकें। उसने आदेश दिया कि कोई भी बड़ा पुजारी किसी गरीब माँ के बगीचे से उसकी लकड़ी या फल नहीं छीन सकता। उसने पुजारियों की फीस भी बहुत कम कर दी। उसे इस बात पर गर्व था कि उसने अपनी जनता को आज़ादी दी। लिबर्टी। उसके ये नियम इतिहास के सबसे पुराने और सबसे न्यायपूर्ण कानून
कोड ऑफ़ लॉज़ माने जाते हैं। लेकिन ये खुशी ज्यादा दिन नहीं चली। लुगल जगीसी नाम के एक हमलावर ने लगाश पर हमला कर दिया। और उसे पूरी तरह तबाह कर दिया। मंदिरों को तोड़ दिया गया, लोगों को सड़कों पर मार डाला गया और भगवान की मूर्तियों को कैदी बना कर ले जाया गया। करीब 4800 साल पहले। एक मेरी आई कवि ने अपने तबाह हुए शहर के लिए यह दुख भरा गीत लिखा था हाय मेरा शहर, मेरी दौलत मेरा मन भर आया है, मेरे लगा शहर के लिए मेरी रूह रो रही है पवित्र गिरसू। लगाश में बच्चे तड़प रहे हैं।
दुश्मन ने मंदिर के अंदर तक कब्जा कर लिया है। वो हमारी रानी को हमारी देवी को मंदिर से बाहर ले गया है। मेरे उजड़े हुए शहर की देवी तुम कब वापस आओगी? हम खूंखार लुगल जगीसी और सुमेरिया के दूसरे बड़े राजाओं को पीछे छोड़ आगे बढ़ते हैं। इसी बीच सामने नस्ल के एक दूसरे कबीले ने अकड़ का राज़ खड़ा किया। उनका राजा था सरगुन जिसने अपनी राजधानी अगाड़ी में बनाई थी। सुसा में मिली एक पत्थर की लाठ से सरगौन को एक लंबी शानदार दाढ़ी और शाही अंदाज में दिखाया गया है।
उसकी शुरुआत किसी बड़े खानदान से नहीं हुई थी। इतिहास को उसके पिता का कोई अतापता नहीं मिला और उसकी माँ। मंदिर में काम करने वाली एक मामूली औरत थी। सरगोन की कहानी हजारों साल बाद पैदा हुए मूसा की कहानी जैसी लगती है। पुरानी कहानियों के मुताबिक, सरगोन ने खुद कहा कि मेरी गरीब माँ ने मुझे गुपचुप जन्म दिया। उसने मुझे सरकंडों की एक टोकरी में रखा और उसे मिट्टी के तेल में बंद करके नदी में बहा दिया। एक मजदूर ने उसे बचाया और पहल पोसकर बड़ा किया। वह राजा का नौकर बना, फिर धीरे
धीरे अपनी ताकत बढ़ाई, बगावत की और खुद। अगाड़े का राजा बन गया। उसने खुद को पूरी दुनिया का राजा कहा। इतिहासकारों ने उसे महान दी ग्रेट कहा है क्योंकि उसने बहुत से शहर जीते, बहुत लूट मचाई और हजारों लोगों को मारा। उसने उसे लोगल जगीसी को हराकर। जंजीरों में जकड़ लिया, जिसने लगा शहर को बर्बाद किया था। सर्गोन ने दुनिया का पहला बहुत बड़ा राज़ बनाया और 55 साल तक हुकूमत की सर्गोन के बाद उसके तीन बेटे राजा बने, तीसरा बेटा। नराम सिंह बहुत बड़ा बिल्डर था। आज उसके कामों में से सिर्फ एक
सुंदर पत्थर की तख्ती बची है। जीस पर उसकी जीत की कहानी लिखी है। पेरिस के म्यूज़ियम में रखी यह तख्ती दिखाती है कि नराम सिंह अपने दुश्मनों की लाशों पर। शाही अंदाज में पैर रखकर खड़ा है। उसके सामने दुश्मन अपनी जान की भीख मांग रहे हैं पर वह उन्हें मौत देने को तैयार है। उनके पीछे जागरोश पहाड़ दिखाई देता है। यह पत्थर तराशने की कला बताती है। उस जमाने के लोग इस काम में कितने माहिर हो चूके थे। किसी शहर का जलकर राख हो जाना हमेशा बुरा नहीं होता। इससे नए सिरे से सुंदरी इमारतें
बनाने का मौका मिलता है। करीब 2600 ईसा पूर्व। 2600 बीसी लगा शहर फिर से फलने फूलने लगा। अब यहाँ का राजा गुडेया था, जिसकी पत्थर की मूर्तियां बहुत मशहूर है। पेरिस के म्यूज़ियम में उसकी एक मूर्ति उससे बहुत ही शांत और। नेक इंसान के रूप में दिखाती है। वह कोई अजनबी राजा नहीं था बल्कि उसे धर्म और अच्छी किताबों से प्यार था। उसने मंदिर बनवाए और कमजोर लोगों की मदद की। उसके राज़ में कानून था। सात सालों तक नौकरानी अपनी। मालकिन के बराबर थी। गुलाम अपने मालिक के साथ चलता था और ताकतवर ने कमजोरों को कभी
परेशान नहीं किया। इसी वजह से उसकी मौत के बाद लोगों ने उसे भगवान की तरह पूजा इसी दौरान उर शहर अपनी। तरक्की के सबसे ऊंचे मुकाम पर था। यहाँ का सबसे बड़ा राजा उर्स एंगुर था। उसने पूरे सुमेरिया के लिए इतिहास के पहले बड़े कानून बना है। उसने गर्व से कहा, मैंने हमेशा के लिए इंसाफ कायम कर दिया है। जैसे जैसे उर शहर व्यापार से अमीर हुआ, राजा ने इसे सुंदर मंदिरों से सजा दिया। उसके बेटे डूंगी ने 50 8 साल तक राज़ किया और लोगों को इतनी सेवा की कि उसे पुरानी जन्नत वापस लाने वाला भगवान माना गया।
लेकिन ये सुख ज्यादा दिन नहीं टिका। पूर्व से खूंखार एलम के लोग और पश्चिम से एमोराइड कबीले के लोग हैं और उन्होंने उर की शांति और अमीरी को लूट लिया। उन्होंने शहर को बुरी तरह तबाह कर दिया। और राजा को बंदी बना लिया और के कवियों ने अपनी प्यारी देवी की मूर्ति की चोरी और शहर की बर्बादी पर बहुत ही दर्द भरे गीत गाए। हजारों साल पहले के एक सुमेरियाई कवि का दर्द आज भी महसूस किया जा सकता है। दुश्मन ने मुझे लूट लिया, गंदे हाथों से मुझे बर्बाद किया, उसने मुझे मार डाला, मैं खौफ से कांप
रही हूँ हाय मैं कितने लाचार हूँ उसे ज़रा भी लिहाज नहीं। उसने मेरे कपड़े उतार लिए और अपनी बीवी को पहना दिए। मेरे गहने छीन लिए और अपनी बेटी को सजा दिए। वो मेरे मंदिर के अंदर तक घुस आया। उसने मुझे मेरे ही घर में ऐसे भगाया जैसे परिंदे को उड़ा देते हैं। म्याहें भरती रह गई और मेरा घर पीछे छूट गया। करीब 200 सालों तक इलम और अमोर के लोगों ने सुमेरिया पर राज़ किया। हमारे लिए यह बहुत लंबा समय है, लेकिन इतिहास की आँखों में यह पलक झपकने जैसा था।
फिरोत्तर से महान खम्मोरा भी आया जो बेबी लोन का राजा था। उसने एलोम के लोगों से अपने शहर वापस छीने और 22 सालों तक सही मौके का इंतजार किया। आखिर में उसने एक बहुत बड़ा राज़ बनाया और पूरे इलाके में अपना कानून लागू कर दिया। इसके बाद कई सदियों तक। इसी नस्ल के लोगों ने हुकूमत की सुमेरिया के लोगों का नाम अब और सुनाई नहीं दिया। इतिहास की किताब में उनका छोटा सा किस्सा खत्म हो चुका था। भले ही सुमेरियाई लोग चले गए लेकिन उनकी सिविलाइज़ेशन।
उनकी तरक्की जिंदा रही। उनके हुनरमंद कारीगर, कवि और कलाकार बेबीलोन और के लोगों को अपना हुनर सीखा गए। उनकी इस तरक्की की सबसे बड़ी वजह उनकी जमीन थी। हर साल नदियों में बर्फ़ पिघलने के बाद बाढ़ आती थी, जो जमीन को उपजाऊ बना देती थी। सुमेरियाई लोगों ने इस बाढ़ के पानी को संभालने के लिए नहरे बनाना सीखा। करीब 4000 ईसा पूर्व 4000 बीसी का यह काम?
उनकी सबसे बड़ी कामयाबी थी खेती में खूब अनाज और खजूर पैदा होते थे। उन्होंने लकड़ी के हल और बीज बोने वाली मशीनें भी बना ली थीं। उस जमाने में चीजें बहुत सीधी साधी थी। इंसान तांबे और ब्रोंज का इस्तेमाल करने लगा था और कभी कभी लूहे की औजार भी बनाता था। लेकिन मेटल उस समय बहुत महंगा था और आसानी से नहीं मिलता था। ज्यादातर औजार पत्थर और मिट्टी के बने होते थे। सुई और छेद करने वाले औजार हड्डियों से बनाए जाते थे कपड़ा बुनना एक बहुत बड़ा काम था और राजा खुद इसकी निगरानी करता था।
लोग घास फूस और मिट्टी के घरों में रहते थे जिनके दरवाजे लकड़ी के होते थे। गाय, भेड़ और। सूर घर के पास ही इंसानों के साथ रहते थे। पीने का पानी कुँच से भरा जाता था। सामान ले जाने के लिए पानी का रास्ता सबसे अच्छा था। सुमेरिया में पत्थर नहीं मिलते थे, इसलिए उन्हें नाव के जरिए दूर दूर से लाया जाता था। लेकिन धीरे धीरे जमीन पर चलने वाली पहिया वाली गाड़ियां भी बनने लगी थीं। खुदाई में ऐसे निशान मिले हैं जिनसे पता चलता है कि उनका व्यापार मिस्र और भारत तक फैला हुआ था।
उस जमाने में सिक्के नहीं थे, इसलिए लोग सामान के बदले सामान लेते थे। लेकिन सोने और चांदी भी लेनदेन के लिए इस्तेमाल होने लगे थे। मिट्टी की तख्तियों पर हिसाब किताब लिखा जाता था। लोग उधार पर भी सामान लेते थे और उस पर 15 से 33%, 15 से 33% तक। ब्याज यानी इन्ट्रेस्ट देना पड़ता था। पुराने जमाने के कब्रों में बहुत सारा सोना और चांदी मिला है। समाज में अमीर और गरीब के बीच बड़ा फर्क था और गुलामी का भी रिवाज था, लेकिन धीरे धीरे एक मिडिल क्लास भी बन रहा था। जिसमें डॉक्टर, छोटे व्यापारी और
पुजारी शामिल थे। उस समय की डॉक्टरी उस समय की मेडिसिन में हर बिमारी का इलाज था लेकिन लोग अभी भी जादू टोने पर यकीन करते थे। उनका मानना था कि बिमारी बुरी आत्माओं की वजह से होती है। जिन्हें भगाना जरूरी है, उन्होंने चाँद की चाल को देखकर अपना कैलेंडर भी बना लिया था। हर शहर अपनी आजादी के लिए मरता था और अपना अलग राजा रखता था। राजा को पत्तेसी कहा जाता था, जिसका मतलब था पुजारी राजा। इसका मतलब यह था कि राजपाट और धर्म एक दूसरे से जुड़े हुए थे।
2800 ईसा पूर्व 2800 बीसी तक व्यापार इतना बढ़ गया कि शहरों का अलग रहना मुश्किल हो गया। फिर बड़े राजा आए। जिन्होंने सबको जोड़कर एक राज़ बनाया। इन राजाओं की जिंदगी खौफ में बीतती थी। उनके महल के रास्ते इतने संकरे थे कि एक बार में एक ही आदमी निकल सके। दरवाजे के पास छुपे हुए गार्ड्स हराने वाले की जांच करते थे ताकि कोई हमला ना कर दे। राजा रथ पर सवार होकर जंग लड़ने जाता था। उसके सैनिक धनुष बाण और भालों से लैस होते थे। ये जंगे साफ तौर पर व्यापार के रास्तों और मॉल पर कब्जा करने के
लिए होती थी। अकड़ के राजा मनीष तुसू ने तो साफ कहा था कि वह इलम पर हमला इसलिए कर रहा है ताकि वहाँ की चांदी की खदानों पर कब्जा कर सके। हारने वालों को या तो गुलाम बना लिया जाता था या मैदान में ही मार दिया जाता था। शहरों के इसी आपसी झगड़े और हिंसा ने धीरे धीरे सुमेरिया को कमजोर कर दिया और अंत में उसे तबाह कर दिया। बड़े साम्राज्य में व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक सिस्टम बनाया गया था जंग जीतने के बाद। राजा अपने बहादुर सेनापतियों को जमीन देता था। ये लोग अपनी जमीन पर ऑर्डर बनाए
रखते थे और जरूरत पड़ने पर राजा को सैनिक और रसदियानी सप्लाइज देते थे। सरकार का खजाना टैक्स से भरता था, जिसमें लोग अनाज या सामान देते थे। सुमेरिया के पास अपने बेहतरीन कानून थे। ये कानून बेबी लोन के मशहूर कानूनों से भी पुराने थे। सुमेरिया का कानून व्यापार, शादी और कर्ज हर चीज़ पर नजर रखता था। इंसाफ के लिए कोर्ट अक्सर मंदिरों में होते थे और। पुजारी ही जज बनते थे। इस सिस्टम की सबसे अच्छी बात यह थी कि कोर्ट जाने से पहले एक सरकारी आदमी दोनों पक्षों में
सुलह करवाने की कोशिश करता था ताकि झगड़ा वहीं खत्म हो जाए। राजा उरेंगुर ने अपने कानून। समस के नाम पर बनाए थे समस यानी सूरज का देवता। लोग मानते थे कि वह सुबह अपनी आग वाली गाड़ी पर सवार होकर आसमान में निकलता है। नूपुर में एनुलील की पूजा होती थी तो उरूप में इस्तकी। ईस्टर जमीन और प्यार की देवी थी। लगाश में निनकारसा नाम की देवी थी जो लोगों के दुख दूर करने के लिए दूसरे बड़े देवताओं से सिफारिश करती थी। सुन चाँद का देवता था जिसके सिर
पर चाँद का टुकड़ा बना होता था। लोगों का मानना था कि हवा फरिश्तों और शैतानों से भरी हुई है। ज्यादातर देवता मंदिरों में रहते थे। भक्त उनके लिए बैल, बकरियां, खजूर, घी और केक लेकर आते थे। इसे देख कर लगता है कि सुमेरिया के अमीर लोग बहुत अच्छा खाना खाते थे। शुरू में शायद देवताओं को इंसान की बलि दी जाती थी लेकिन बाद में जानवरों की बलि दी जाने लगी। एक पुरानी तख्ती पर लिखा है, इंसान की जान बचाने के लिए भेड़ की बलि दी गई। इन चढ़ावों ने पुजारियों को शहर
का सबसे अमीर और ताकतवर हिस्सा बना दिया। वे इतने ताकतवर हो गए की एक सर सरकार भी वही चलाते थे लेकिन पुजारियों के बढ़ते लालच को देखकर राजा रुकागीना ने उनके खिलाफ़ आवाज उठाई। उसने उन पर रोक लगाई ताकि वे किसानों और मशुआरों को न लूट सके। उसने ऐसे नियम बनाए जिससे लाचार और कमजोर लोगों को इंसाफ मिल सके। हजारों साल पहले भी दुनिया वैसी ही थी जैसी आज है जहाँ ताकतवर। कमजोर को दबाने की कोशिश करता था। राजा औरुकागीना के मौत के बाद पुजारियों ने अपनी ताकत फिर से
हासिल कर ली। इंसान पुरानी कहानियों के लिए कोई भी कीमत देने को तैयार रहता है। सुमरियाई लोग मानते थे। कि मरने के बाद एक दूसरी दुनिया है। परवेश एक अँधेरी और दुःख भरी जगह मानते थे। जहाँ सिर्फ साए रहते हैं, वे जन्नत या जान्हो हेवन और हेल्त के बारे में नहीं जानते थे। उनकी दुआएं और पूजा सिर्फ जमीन पर मिलने वाले फायदों के लिए थी। एक पुरानी कहानी अदा पा की थी जिसे सब कुछ पता था पर उसे कभी ना मरने का राज़ नहीं बताया गया। एक और कहानी ताग तुक की थी। जिसने मना किए हुए फल खाली और
अपनी सेहत और लंबी उम्र खो दी। पुजारी सिर्फ कहानियों ही नहीं सुनाते थे, वे बच्चों को पढ़ाते भी थे। मंदिरों में स्कूल सोते थे जहाँ लड़कों और लड़कियों को लिखना और हिसाब किताब सिखाया जाता था। वहाँ से बच्चे बड़े होकर सरकारी लेखक बनते थे। आज की मिट्टी की तख्तियों पर पहाड़े और ज्योमैट्री के सवाल लिखे मिलते हैं। वे बच्चों को सिखाते थे कि शुरू में इंसान के पास ना खाना था ना कपड़े। वो जानवरों की तरह जमीन पर चलता था। और घास खाता था। राजा गुड़िया की अपनी देवी बाऊ के लिए प्रार्थना बहुत ही भावुक थी,
जिससे उनके धर्म की गहराई का पता चलता है। है मेरी रानी तुम ही लगा शहर को बनाने वाली माँ हो। जीस पर तुम्हारी नजर है वो बहुत ताकतवर है जिसकी तुम रक्षा करती हो। उसकी उम्र लंबी होती है, मेरी कोई माँ नहीं है, तुम ही मेरी माँ हो, मेरा कोई पिता नहीं है, तुम ही मेरे पिता हो है, मेरी देवी। तुम जानती हो कि मेरे लिए क्या अच्छा है, तुमने ही मुझे जिंदगी की सांस दी है। तुम्हारी छांव में मैं सुकून से रहूंगा। हर मंदिर में औरतें होती थी, कुछ सेवा करती थी तो कुछ को देवताओं
को अर्धांगनि माना जाता था। सुमेरिया इस समाज में से बुरा नहीं माना जाता था। बाप अपनी बेटी को मंदिर भेजने में गर्व महसूस करता था और अपनी बेटी के दहेज का हिस्सा मंदिर को भेंट कर देता था। शादी के नियम बहुत सख्त थे। औरत अपनी शादी का दहेज खुद संभालती थी। बच्चों पर उसका और उसके पति का बराबर हक था। पति की गैरमौजूदगी में वही घर और जायदाद की मालकिन होती थी। वह अपना अलग व्यापार भी कर सकती थी और अपने गुलामों को बेच भी सकती थी। कुछ औरतें जैसे।
रानी शुबद बहुत ताकतवर थी और उन्होंने शान से राज़ किया लेकिन फिर भी समाज में मर्द का ही बोलबाला था। कुछ हालातों में वह अपनी बीवी को बेच सकता था या कर्ज चुकाने के लिए उसे गुलाम बना सकता था? मर्दों की गलतियाँ माफ़ थीं। पर औरतों की गलती करने पर मौत की सजा मिलती थी। अगर औरत माँ नहीं बन पाती थी तो उसे तलाक दे दिया जाता था। बच्चों के पास कोई कानूनी हक नहीं था। माँ बाप उन्हें कभी भी घर से निकाल सकते थे। अमीर घर की औरतों की जिंदगी बहुत ऐशुअ आराम वाली थी।
रानी सुबद की कब्र में नीले हरे पत्थरों वाला श्रृंगार दान मिला है। इसमें सोने के पिन और लापिश लाजुली के गहने मिले हैं। इस छोटे से श्रृंगार दान में एक छोटी चम्मच भी मिली है, जिससे शायद वे लाली लगाती थीं। साथ ही पलकें संवारने के लिए चिमटी भी मिली है। सच तो ये है कि दुनिया में कुछ भी नया नहीं है। हजारों साल पहले की पहली औरत और आज की आखिरी औरत के शौक बिल्कुल एक जैसे ही हैं। सुमेरिया की खुदाई में जो सबसे हैरान करने वाली चीज़ मिली, वो है लिखावट राइटिंग।
ऐसा लगता है कि हजारों साल पहले भी यह कला बहुत आगे बढ़ चुकी थी। सबसे पुराने निशान पत्थर पर मिले हैं, जो करीब 3600 ईसा पूर्व। 3600 बीसी के है। फिर 3200 इसा पूर्व के आसपास मिट्टी की तख्तियां मिलने लगी। क्लियर टैबलेट्स के लोगों की किस्मत अच्छी थी कि उन्होंने अपनी बातें किसी कमजोर कागज़ पर नहीं लिखी बल्कि गीली मिट्टी पर लिखी। उन्होंने मिट्टी पर नुकीली चीज़ से त्रिकोण जैसे निशान बनाए जिसे कि लाक्षर यानी च्यूनीफर्म कहा जाता है। इस मिट्टी पर उन्होंने अपने
व्यापार के सौदे, कोर्ट के फैसले और जमीन जायदाद का हिसाब लिखा। लिखने के बाद वे इन तथ्यों को आग या धूप में सुखा देते थे, जिससे ये पत्थर जैसी मजबूत हो जाती थी। यही वजह है कि हजारों साल बाद भी ये आज हमारे पास सुरक्षित है। सुमेरिया की यह लिखावट ही दुनिया के लिए उनकी सबसे बड़ी देन थी। सुमेरिया के लोग दाईं से बाएँ और लिखते थे राइट टु लेफ्ट। शुरू में ये सिर्फ तस्वीरें थी पर हजारों साल तक बार बार और तेजी से लिखने की वजह से वे छोटे निशान बन
गए। अब ये निशान किसी चीज़ की तस्वीर नहीं। बल्कि एक आवाज बन चूके थे। जैसे अगर हम आज मक्खी यानी बी की तस्वीर बनाएं और धीरे धीरे उसे उतना छोटा कर दें कि उसका मतलब सिर्फ बी की आवाज रह जाए, सो मेरे आए लोग आवाजों को लिखना तो सीख गए थे। परक्षरों यानी अल्फाबेट तक पहुंचने का काम। बाद में मिस्र यानी ईजिप्ट के लोगों ने किया लिखने की कला से कहानियों और साहित्य यानी लिटरेचर बनने में हजारों साल लगे होंगे। पहले तो सिर्फ सामान के बिल और रसीदें लिखी जाती थी।
फिर धीरे धीरे पुजारियों ने अपने जादू का मंत्र और दुआएं लिखना शुरू किया ताकि वे भूल ना जाए। 2700 ईसा पूर्व 2700 बीसी तक सुमेरिया में बड़ी बड़ी लाइब्रेरी बन चुकी थी। टेल्लो नाम की जगह पर 30,000। 30,000 से ज्यादा मिट्टी की तख्तियां एक के ऊपर एक अच्छे से रखी हुई मिली। दुनिया की सबसे पुरानी कहानियों में से एक गिलगमेष की कहानी भी यहीं से शुरू हुई। सुमेरिया की पहली कविताएं असल में भगवान के लिए गाए जाने वाले गीत। और दुख भरे जिक्र थे। सुमेरिया ने ही दुनिया को घर और मंदिर बनाने के बुनियादी तरीके
सिखाए। उन्होंने ही खम्भे और मेहरा बनाना शुरू किया। कॉलम सौरार गरीब किसान नरगुल के डंडों को जमीन में गाड़ कर। उन्हें ऊपर से मोड़ देते थे, जिसे एक गोबंद या मेहराब जैसा आकार बन जाता था। नीपुर के खंडहरों में 5000 साल पुरानी नालियां मिली हैं जिनमें पक्की मेहरा आर्क बनी हुई है और के शाही मकबरों में भी। 3500 पूर्व के मेहराब मिले हैं। ये बिल्कुल आज के तरीके से पत्थर जोड़कर बनाए गए थे। अमीर लोग अपने महल ऊंची जगहों पर बनाते थे ताकि दुश्मन आसानी से ना पहुँच सके।
ये महल ईंटों के बने होते थे। और इनकी दीवारों पर रंगीन मिट्टी से सुंदर डिज़ैन बनाए जाते थे। घर के बीच में एक खुला आंगन होता था ताकि धूप और ठंडी हवा मिल सके। कमरों के दरवाजे बाहर की तरफ नहीं बल्कि इसी आंगन की तरफ खुलते थे। उस जमाने में खिड़कियां बहुत कम होती थी। पीने का पानी कुओं से आता था और गंदे पानी के लिए नालियों का बहुत अच्छा इंतजाम था। शहर का सबसे बड़ा और जरूरी मंदिर एक ऊंचे टावर जैसा होता था, जिसे जघुरत कहते थे। यह मंदिर तीन चार।
यह सात मंजिलें का होता था और हर मंजिल पिछली मंजिल से छोटी होती थी। इसके बाहर से घुमावदार सीढ़ियों होती थी। लोग मानते थे कि शहर का सबसे बड़ा देवता सबसे ऊपर वाली मंजिल पर रहता है। मुसीबत के समय पूरा शहर? इसी मंदिर के शरण में आ जाता था। मंदिरों को सजाने के लिए जानवरों और देवताओं की मूर्तियां बनाई जाती थी। राजा गुटिया की बहुत सी मूर्तियां मिली है, जो पत्थर डियोराइड को तराश कर बनाई गई थी। पुर में रानी शुबद की कब्र से चांदी की बनी एक गाय का सिर मिला
है, जो उस जमाने की बेहतरीन कलाकारी है। पत्थरों पर उकेरी गई जिद की कहानियों भले ही थोड़ी खुरदरी दिखे लेकिन उन्हें बहुत जान और ताकत महसूस होती है। यह एक ऐसा कला थी। जो भी जवान थी और तेजी से फल फूल रही थी। सुमेरिया की मिट्टी के बर्तनों के बारे में हम ज्यादा तारीफ नहीं कर सकते। शायद वक्त ने अच्छी चीजें मिटा दी और सिर्फ बेकार चीजें ही बची रह गई। सुमेरिया के बर्तन ज्यादातर साधारण मिट्टी के थे और वे हेलम के बर्तनों जैसे सुंदर नहीं थे,
लेकिन वहाँ के सुनारों ने गोल्डस्मिथ ने कमाल का काम किया था। उनकी पुरानी कब्रों में सोने के बहुत ही सुंदर बर्तन मिले हैं। जो करीब 6000 साल पुराने हैं। ऐंटी मेनू का चांदी का बर्तन बहुत ही शानदार है। जीस पर जानवरों की बहुत बारीक तस्वीरें उकेरी गई हैं। सबसे बेहतरीन चीज़ उर्र की खुदाई में मिला सोने का म्यान और लपिस। लाजली का खंजर है? ये इतना सुंदर है कि इसे आज के जमाने के हिसाब से भी बिल्कुल सही कहा जा सकता है। वहाँ पत्थर और कीमती धातुओं की गोल मोहरें भी मिली हैं।
सुमेरिया के लोग इन मोहरों को अपने सिग्नेचर्स की जगह इस्तेमाल करते थे। इसे देखकर लगता है कि वे लोग रहन सहन में हमसे कम नहीं थे। अक्सर हम सोचते हैं कि पुराने लोग पिछड़े थे और हम बहुत आगे निकल गए हैं, लेकिन उनकी ये चीजें हमें सोचने पर मजबूर कर देती हैं। सुमेरिया की तरक्की, उसकी सिविलाइजेशन को हम इस तरह समझ सकते हैं। एक तरफ साधारण मिट्टी के बर्तन थे और दूसरी तरफ सोने के बेहतरीन जेवर। उन्होंने ही दुनिया को ये पहली चीजें दी। पहले बड़े राज़ यानी एम्पायर्स
पहली सिंचाई यानी इरिगेशन। पैसे के रूप में सोने चांदी का इस्तेमाल पहले व्यापारिक सौद यानी बिज़नेस कॉन्ट्रैक्ट्स, उधार का सिस्टम, क्रेडिट सिस्टम, पहला कानून कोड ऑफ लॉ और लिखने का हुनर। यही से दुनिया के बनने और महाप्रलय की पहली कहानियों निकली। यही पहली लाइब्रेरी स्कूल कविताएं, सजना, संवर्णा, महल और मंदिर बने। मेहराब और गुंबद भी सबसे पहले यही देखे गए लेकिन सभ्यता के साथ साथ कुछ बुराइयां भी आईं। गुलामी, राजाओं का जुल्म और बड़ी
जंगे। समाज में उच्च नीच का फर्क पैदा हो गया। ताकतवर लोगों के लिए ऐश्व आराम बढ़ गया, जबकि बाकी लोगों के लिए कड़ी मेहनत और अनुशासन यानी डिसिप्लिन वाली जिंदगी शुरू हो गई। इतिहास ने यही से अपनी चाल शुरू की थी। जब हम सुमेरिया की बात करते हैं, तो हम इतिहास की बिल्कुल शुरुआत में होते हैं। यह कहना मुश्किल है कि कौन सी सभ्यता कौन सी सिविलाइज़ेशन सबसे पहले आई सबसे पुरानी लिखावट सुमेरिया की मिली है, पर इसका मतलब यह नहीं कि वही सबसे पहले
थे। बेबेलोन और अशीरिया की तरक्की भी सुमेरिया की ही देन मानी जाती है। उनकी कहानियों और देवता भी सुमेरियाई फिलॉसोफी से ही निकले हैं। एक दिलचस्प बात ये है कि गेहूं और जौ और भेड़ बकरियां इजिप्ट और मिसपोटोमिया दोनों जगह मिली है, लेकिन ये चीजें अपने नेचुरल शक्ल में ईजिप्ट या मिस्र में नहीं बल्कि पुराने अरब या यमन के इलाके में पाई जाती है। इसलिए कुछ विद्वान मानते हैं कि खेती बाड़ी और जानवरों को पालने का हुनर सबसे पहले अरब में शुरू
हुआ। और फिर वहाँ से मिस्र और सुमेरिया पहुंचा। यह बात साफ है कि मिस्र की तरक्की में सुमेरिया और बेबीलोन का बड़ा हाथ था। इन दोनों देशों के बीच व्यापार चलता था। नक्शा देखने पर समझ आता है कि मिस्र अपनी। संस्कृति अपने कल्चर के लिए अफ्रीका से ज्यादा एशिया से जुड़ा हुआ था। मिस्र की पुरानी भाषा और उनके लिखने के तरीके सुमेरिया से बहुत मिलते जुलते हैं। शुरू में मिस्र के लोग भी सुमेरिया की तरह गोल मोहरों का इस्तेमाल करते थे। बर्तन बनाने का पहिया और रथ भी
शायद सुमेरिया से ही मिस्र पहुंचे। मिस्र के पुराने चाकू और दीवारों को सजाने के तरीके भी मेसोपोटामिया जैसे ही थे। जीस समय मिस्र की सिविलाइज़ेशन उसकी तरक्की शुरू हो रही थी। उस समय उर के कलाकार बेहतरीन मूर्तियां और नक्काशी बना रहे थे। मिश्र ने भले ही सुमेरिया से बहुत कुछ सीखा हो, लेकिन जल्द ही उसने अपनी एक अलग और शानदार पहचान बनाई। मिश्र की सभ्यता इतिहास की सबसे अमीर। ताकतवर और खूबसूरत सभ्यताओं में से एक बनी सुमेरिया तो बस एक शुरुआत थी।
आगे चलकर मिस्र ने जो कर दिखाया उसका मुकाबला ग्रीस यानी जुनान या रोम भी नहीं कर पाए।
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