Skip to content
Melo Podcasts Home
CategoriesLanguagesFollowing

Episode notes

In his profound philosophical essay, Bertrand Russell explores the human condition within a purposeless universe. He begins by recounting a myth told by Mephistopheles to Dr. Faustus, wherein the Creation is depicted as a cruel play staged by a deity for his own amusement. In this tale, God grows weary of the predictable praises of angels and decides to create a world of "monstrous" struggle where beings are tortured yet still feel compelled to worship him. After billions of years of cosmic evolution—from swirling nebulae to boiling seas—Man is born with the "knowledge of good and evil" and…

Transcript

Read the transcript · about 3,510 words, follows along as you listen

डॉ। फास्टर्स अपनी पढ़ाई के कमरे में बैठे थे तभी बेफिस्टोफिलस ने उन्हें दुनिया के बनने की कहानी सुनाई। उसने बताया शुरू शुरू में फरिश्ते हर वक्त भगवान की तारीफ करते थे। पर धीरे धीरे भगवान इस तारीफ से बोर होने लगे। उन्हें लगा कि इन फरिश्तों को तो मैंने ढेर सारी खुशियां दी हैं, इसलिए ये मेरी तारीफ करते हैं। इसमें क्या बड़ी बात है? असली मज़ा तो तब आएगा जब मैं ऐसे जीव बनाओ जिन्हें मैं दुख दो, फिर भी वे मेरी ही पूजा करें। यह सोचकर भगवान मन ही मन मुस्कराए और उन्होंने एक बड़ा नाटक शुरू करने का फैसला किया। करोड़ों सालों तक स्पेस में गर्म धूल और गैस के बादल बिना किसी मतलब के घूमते रहे। फिर धीरे धीरे उन्होंने एक शेप लेना शुरू किया। उनसे प्लानेट्स बने और वे ठंडे हुए। उस समय समुद्र उबल रहे थे और पहाड़ों से आग निकल रही थी। काले बादलों से इतनी भारी बारिश हुई कि जमीन पूरी तरह भीग गई। फिर समंदर की गहराइयों में जीवन की पहली छोटी सी शुरुआत हुई। वह गर्मी की वजह से तेजी से बढ़ी और बड़े बड़े जंगल और पेड़ बन गए। वहाँ डरावने समुद्री जानवर पैदा हुए, जो आपस में लड़ते और एक दूसरे को खा जाते थे। जैसे जैसे यह नाटक आगे बढ़ा, इंसान का जन्म हुआ। इंसान के पास सोचने की ताकत थी। उसे सही और गलत की समझ थी और उसके अंदर पूजा करने की एक प्यास थी।

इंसान ने देखा कि यह दुनिया बहुत अजीब और डरावनी है। यहाँ हर चीज़ खत्म हो रही है और हर कोई मौत से पहले बस थोड़े समय के लिए जीने की। स्ट्रगल कर रहा है। इंसान ने अपने आप से कहा शायद इस सबके पीछे कोई छिपा हुआ मकसद है, जो बहुत अच्छा है। हमें किसी ना किसी की इज्जत करनी चाहिए और इस दिखने वाली दुनिया में तो ऐसी कोई चीज़ नहीं है जिसकी इज्जत की जाए। इसलिए इंसान इस लड़ाई से अलग हट गया। उसने सोचा कि भगवान चाहते हैं कि इंसान अपनी मेहनत से इस बिगड़ी हुई दुनिया को ठीक करे। जब भी इंसान अपने अंदर के पुराने जंगली जानवरों वाले स्वभाव को मानता तो वह उसे पाप कहता और भगवान से माफी मांगता। पर उसे शक रहता कि क्या उसे वाकई माफ़ किया जाएगा?

फिर उसने अपने मन में एक भगवान वाली योजना बनाई जिससे भगवान का गुस्सा शांत हो सके। इंसान ने देखा कि उसका आज बुरा है तो उसने इसे और भी कठिन बना लिया। ताकि उसका आने वाला कल बेहतर हो सके। उसने उन छोटी खुशियों को भी छोड़ दिया जो उसे मिल सकती थी और इसके लिए भगवान को शुक्रिया कहा। ये सब देख कर भगवान मुस्कराये जब उन्होंने देखा कि इंसान दुख सहने और पूजा करने में एक दम पक्का हो चुका है। तो उन्होंने आसमान में एक दूसरा सूरज भेजा। वह सूरज इंसान के सूरज से ज़ोर से टकराया और सब कुछ फिर से धोएं और धूल के बादलों में बदल गया। हाँ, उसने धीरे से कहा, ये एक अच्छा नाटक था। मैं इसे दोबारा करवाऊंगा। साइंस हमें दुनिया की जो तस्वीर दिखाता है, वह कुछ ऐसी ही है। इसमें कोई खास मकसद या मीनिंग नहीं दिखता। अब से हमें अपनी सारी अच्छी सोच इसी दुनिया में संभाल कर रखनी होगी। इंसान ऐसी चीजों से बना है जिन्हें खुद नहीं पता था कि वे क्या बना रहे हैं। हमारी शुरुआत, हमारी ग्रोथ, हमारी उम्मीदें और डर, हमारा प्यार और हमारा यकीन ये सब बस आइटम्स के अचानक आपस में जुड़ने का रिसाल्ट है। कोई भी बहादुरी या गहरी सोच इंसान को मरने के बाद बचाकर नहीं रख सकती। सदियों की मेहनत, बड़े बड़े लोगों की बुद्धि और सारी तरक्की 1 दिन पूरी तरह खत्म हो जाएगी जब हमारा सोलर सिस्टम खत्म होगा।

तो इंसान की सारी कामयाबी इस टूटी फूटी दुनिया के मलबे के नीचे दब जाएगी। यह बात लगभग पक्की है। जो भी सोचने का तरीका है, इस सच को नहीं मानता, वह लंबे समय तक टिक नहीं पाएगा। अब हमें अपनी आत्मा का घर। इसे उदासी की मजबूत नींव पर बनाना होगा। अब सवाल यह है कितनी बेरहम दुनिया में इंसान जैसा छोटा सा अजीव अपनी इच्छाओं को कैसे जिंदा रखे। यह एक अजीब राज़ है की नेचर जो बहुत ताकतवर। परन्ंधी है। उसने आखिर में एक ऐसा बच्चा पैदा किया जो नेचर के बस में तो है पर उसके पास देखने की समझ है। इंसान को सही और गलत की पहचान है वह अपनी उस अंधी माँ। यानी नेचर के कामों को परख सकता है, जिसने उसे बनाया है। मौत के पक्के डर के बावजूद इंसान अपने छोटे से जीवन में आजाद है। वह चीजों की जांच पड़ताल कर सकता है, उनमें कमियां निकाल सकता है और अपने मन की इमेजिनेशन से नई चीजें बना सकता है। इस पूरी दुनिया में सिर्फ इंसान ही ऐसा है जिसके पास यह आजादी है। यह खूबी उसे उन बड़ी ताकतों से महान बनाती है जो उसकी बाहर की ज़िन्दगी को चलाती है। पुराने समय का इंसान भी हमारी तरह ही नेचर की ताकतों के आगे खुद को छोटा और बेबस महसूस करता था, पर उसके पास ताकत से बढ़कर इज्जत करने के लिए और कुछ नहीं था इसलिए वह अपने देवताओं के आगे झुक जाता था। यह सोचे बिना इच्छावे पूजा के

लायक भी है या नहीं? पुरानी कहानियों का वह लम्बा दौर बहुत डरावना और दुख भरा है। अपने जलन करने वाले देवताओं को खुश करने के लिए इंसान ने जुल्म बहुत सारा दर्द। और यहाँ तक कि इंसानों की बलि भी थी। उस डरे हुए भक्त को लगता था कि अगर वह अपनी सबसे कीमती चीज़ दे देगा तो शायद उसके देवता के खून की प्यास शांत हो जाएगी और फिर वह उसे और तंग नहीं करेंगे। इसे एक। गुलामों वाला धर्म कह सकते हैं रिलिजन ऑफ़ स्लेव्स यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे कोई गुलाम अपने मालिक के आगे डर के मारे झुकता है और अपने मन में भी यह सोचने की हिम्मत नहीं करता कि उसका मालिक बुरा है। उस समय तक लोगों को यह नहीं पता था। कि अच्छी सोच आजाद हो सकती है। इसलिए सिर्फ ताकत की ही पूजा होती रही, चाहे वह कितना भी दर्द क्यों ना दे पर धीरे धीरे जैसे जैसे इंसान की सही गलत की समझ बढ़ी। उसे अपनी अच्छी सोच की जरूरत महसूस होने लगी। उसे लगा कि अब सिर्फ ताकतवर होने से काम नहीं चलेगा, भगवान को अच्छा भी होना चाहिए। फिर भी कुछ लोग ऐसे रहे जिन्होंने सिर्फ ताकत को ही सब कुछ माना जैसे पुराने किताबों की कहानियों में। जब भगवान अपनी ताकत और जानकारी तो दिखाते हैं पर अपनी अच्छाई के बारे में कुछ नहीं कहते। आज भी कुछ लोग यही मानते हैं कि दुनिया में वही बचेगा जो सबसे

ताकतवर है। लेकिन बहुत से लोग इस बात से खुश नहीं थे। उनकी अच्छी सोच ने इस बात को नहीं माना। इसलिए इंसान ने खुद एक ऐसे भगवान को बनाया जो सबसे ताकतवर भी हो और सबसे अच्छा भी। ये एक ऐसा बिल था जिसमें वह सब कुछ था जो दुनिया में अभी है और वह भी। जो दुनिया में होना चाहिए, लेकिन असली दुनिया हमेशा अच्छी नहीं होती। अगर हम आँख बंद करके इसे ही सब कुछ मान ले तो ये एक तरह की गुलामी होगी। हमें अपनी सोच को इस गुलामी से साफ करना होगा। इंसान की असली इज्ज़त इसी में है कि वह नेचर की बेरहम ताकतों के आगे न झुके। जब हमें यह समझा जाता है कि यह अंधी ताकत अक्सर बुरी होती है और इंसान इस बेजान दुनिया में एक छोटा सा बेबस टुकड़ा मात्र है, तब हमारे सामने एक। चुनाव आता है एक चॉइस हम ताकत की पूजा करें या अच्छाई की? क्या हमारा भगवान, कोई ऐसी ताकत है जो जुल्म करती है या फिर हमारा भगवान वह है जिसे हमने अपने मन की अच्छी आवाज से बनाया है? ताकत की पूजा करना हार मानने जैसा है। इसका मतलब है कि हमने इस बेरहम दुनिया के आगे घुटने टेक दिए हैं। अगर हमें वाकई ताकत की इज्ज़त करनी है तो उन लोगों की हिम्मत की इज्ज़त करें। जो यह मानने से मना कर देते हैं कि जो चल रहा है वही सही है। हमें यह मानना होगा कि इस दुनिया में बहुत सी चीजें खराब हैं,

जिन्हें बेहतर बनाया जा सकता है, भले ही यह दुनिया वैसी न हो जैसा हम चाहते हैं। फिर भी हमें इन चीजों का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। सच यानी ट्रुथ खूबसूरती यानी ब्यूटी और परफेक्ट होने का सपना यानी परफेक्शन। अगर दुनिया की ताकतें बुरी हैं। तो हमें उन्हें अपने दिल से निकाल देना चाहिए। इंसान की असली आज़ाद इसी में है कि वह सिर्फ उस भगवान को माने जो प्यार और अच्छाई से बना हो। काम करते वक्त हमें शायद दुनिया के नियमों को मानना पड़े, पर हमारी सोच और हमारी उम्मीदें। एकदम आजाद है। हम दुनिया के लोगों से आजाद हैं। हम इस छोटी सी धरती से आजाद हैं। जीस पर हमारा शरीर रेंगता है। यहाँ तक कि हम मौत के डर से भी आजाद हैं। हमें अपने अंदर ऐसा पक्का भरोसा जगाना होगा। जिससे हम हमेशा अच्छाई का सपना देख सके। फिर से सपने को अपनी आँखों में लेकर हमें असली दुनिया में काम करने के लिए उतरना होगा। जब हमें पहली बार पता चलता है कि असली सच्चाई वैसी नहीं है। जैसा हमारा सपना था तो हमारे अंदर एक गुस्सा पैदा होता है। हमें लगता है कि हमें इस बुरी दुनिया से डटकर लड़ना चाहिए और अपनी आजादी के लिए आवाज़ उठानी चाहिए। हमें लगता है कि चाहे कितना भी दर्द सह ना पड़े, हम झुकेंगे नहीं। लेकिन हर वक्त नाराज रहना भी इस तरह की गुलामी है क्यों? क्योंकि गुस्से में हमारा दिमाग

हर वक्त उसे पूरी दुनिया के बारे में सोचता रहता है। समझदार इंसान वह है जो अपनी जिद, अपनी डिजायर्स को तो छोड़ दे। पर अपनी सोच को हमेशा आजाद रखें। जब हम अपनी बेकार की इच्छाओं को छोड़ देते हैं तो हमारे अंदर सब रहता है और जब हमारी सोच आजाद होती है तभी हम दुनिया में असली खूब सोते और कला देख पाते हैं। इसी खूबसूरती की मदद से हम इस मुश्किल दुनिया को थोड़ा बेहतर बना पाते हैं। सच्ची आज़ादी सिर्फ उन्हें मिलती है जो जिंदगी से अपने लिए ऐसी चीजें नहीं मांगते जो वक्त के साथ खत्म हो जाए। किसी चीज़ को खुशी खुशी छोड़ देना सिर्फ गुस्से में लड़ने से कहीं ज्यादा बेहतर है। हमें लगता है कि हमारी हर पसंद अच्छी है, लेकिन ऐसा नहीं होता जब हम अपनी इच्छाओं को काबू में करना सीखते हैं। तो हमें असली सच्चाई का पता चलता है। इससे हमारी उम्मीदें और भी सांप और अच्छी हो जाती हैं। सब्र करने में एक और अच्छी बात है अगर कोई बहुत अच्छी चीज़ भी हमें नहीं मिल पा रही। तो उसके लिए हर वक्त परेशान नहीं होना चाहिए। हर इंसान की जिंदगी में कभी ना कभी वह वक्त आता है जब उसे अपनी कोई बड़ी चीज़ छोड़नी पड़ती है। जब हम जवान होते हैं तो हमें लगता है कि हम कुछ भी पा सकते हैं पर मौत बिमारी। गरीबी ये अपनी जिम्मेदारी हमें यह सिखाती है कि यह दुनिया सिर्फ हमारे लिए नहीं बनी है, चाहे हमें

कोई चीज़ कितनी भी प्यारी लगे, किस्मत उसे हमें देने से मना कर सकती है। असली बहादुरी इसमें है ये जो बुरा वक्त आए। तो हम रोने धोने की बजाय अपनी टूटी हुई उम्मीदों को सह न सीखें। बेकार के पछतावे में समय गवाह न छोड़ दें। दुनिया की ताकतों के आगे इस तरह झुकना ही अकलमंदी की विस्डम की शुरुआत है। लेकिन सिर्फ चीजों को छोड़ देना ही पूरी अकलमंदी नहीं है। सिर्फ हार मानने से हम अपने सपनों का घर नहीं बना सकते। हमारे सपनों की झलक हमें संगीत, सुन्दर कला और सोचने के तरीके में मिलती है। ये एक ऐसी दुनिया है जहाँ कोई दुख नहीं है। और न ही कुछ खोने का डर है। जब हम इन अच्छी चीजों के बारे में सोचते हैं तो हमारे दिल में जनक यानी हेवन जैसा एहसास होता है। यही एहसास हमें सीखाता है कि हमें अपनी ज़िन्दगी को कैसे बेहतर बनाना है। इस सुंदर जगह तक पहुंचने के लिए हर इंसान को एक अंधेरी गुफा से गुजरना पड़ता है। इस गुफा का दरवाजा मायूसी है और इसका रास्ता पुरानी टूटी हुई उम्मीदों से बना है। यहाँ पहुँचकर इंसान को अपना घमंड छोड़ना पड़ता है। यहाँ हमें अपने लालच और बेकाबू इच्छाओं को मारना होगा तभी हमारी आत्मा किस्मत के डर से अजान हो पाएगी। जब हम इस अंधेरी गुफा से बाहर निकलते हैं तो हमें अकलमंदी की नई रौशनी मिलती है। उस रौशनी में एक नई ख़ुशी?

और सब के लिए प्यार हमारे दिल को सुकून देता है, जब हम बिना किसी फालतू गुस्से के या मान लेते हैं, ये किस्मत के अपने नियम होते हैं और यह बेजान दुनिया हमारी पूजा के लायक नहीं है। तब एक बड़ा बदलाव आता है। तब हम अपनी सोचने की ताकत से इस दुनिया को नया रूप दे सकते हैं, जैसे मिट्री की पुरानी मूर्ति की जगह चमकता हुआ सोना आ जाए, थपेड़ों पहाड़ों और बादलों की शक्ल में। यह इंसान की जिंदगी की कहानियों में, यहाँ तक कि मौत में भी हम वैसे ही खूबसूरती देख पाते हैं जैसी हमारी सोच ने सबसे पहले बनाई थी। इस तरह हमारा दिमाग नेचर की बेजान ताकतों पर अपनी जीत हासिल करता है। दुनिया हमें जितना दुख और रुकावटें देती है, उसे झेल कर उसे अच्छा बनाना उतनी ही बड़ी कामयाबी है। ये एक चट्टान में छिपा हुआ खजाना निकालने जैसा है। सभी तरह की कलाओं में दुख भरी कहानियों सबसे महान होती हैं। वे मुश्किलों और दुखों के बीच भी अपनी चमक बनाए रखती हैं। मान लीजिए कि दुख एक दुश्मन का देश है तो ये कहानियों उस दुश्मन के घर के बीचोबीच अपना मजबूत किला बनाती हैं। इस किले की दीवारों के अंदर इंसान की अजात ज़िन्दगी चलती रहती है। बाहर भले ही मौत, दर्द और मायूसी खड़ी हो, पर अंदर रहने वाले लोग इन दुखों को भी एक नए और सुंदर नज़रिए से देख पाते हैं। खुशकिस्मत है वो लोग जो इस उचाई

पर रहते हैं जहाँ से सब कुछ साफ दिखता है। उन बहादुर योद्धाओं को सलाम जिन्होंने बरसों की लड़ाई के बाद भी हमारे लिए आजादी का यह कीमती तौफा बचा कर रखा और हमारे मन के घर को हारने नहीं दिया। दुख भरी कहानियों हमें वह बात दिखाती हैं जो जिंदगी में हर जगह और हर वक्त मौजूद है। मौत को देखना बर्दाश्त न होने वाले दर्द को सहना और उस बीते हुए वक्त को याद करना जो कभी वापस नहीं आएगा। इन सब में एक बहुत ही पवित्र और गहरा एहसास छिपा है। ये हमें बताता है की हम दुनिया कितनी बड़ी और मिस्ट्री से भरी है। दुख के धागे से ही एक इंसान इस दुनिया से जुड़ता है। जब हम इन बातों को गहराई से समझते हैं तो हम अपने छोटी छोटी इच्छाओं और रोज़ की फालतू भागदौड़ को भूल जाते हैं। हमें दिखता है कि हमारी ज़िन्दगी एक छोटी सी नाव जैसी है, जिसके चारों तरफ अंधेरा और गहरा समंदर है। हम इस समंदर की लहरों पर बस कुछ ही समय के लिए हैं। बाहर के सन्नाटे से ठंडी हवाएं आती हैं और हमें डराती हैं। इस पूरी दुनिया में इंसान अकेला है और उसे अकेले ही अपने हिम्मत के साथ लड़ना पड़ता है। यह दुनिया ऐसी है जिसे हमारे डर या हमारी उम्मीदों से कोई मतलब नहीं है। जो इंसान इस अंधेरे से लड़कर जीतता है, वही असली हीरो है। इस लड़ाई के बाद ही इंसान के अंदर सच्ची समझदारी और दूसरों के लिए प्यार पैदा होता है।

यहीं से एक नई जिंदगी शुरू होती है। जब हम बहुत बदलाव और अपनी बेबसी को अच्छी तरह समझ लेते हैं और उन्हें स्वीकार कर लेते हैं, उन्हें एक्सेप्ट कर लेते हैं। तभी हम उन पर जीत हासिल कर पाते हैं। यही वजह है कि बीता हुआ वक्त इतना जादुई होता है, उसकी यादें पतझड़ के उन सुनहरे पत्तो जैसी है जो बस गिरने ही वाले हैं पर फिर भी आसमान में सोने की तरह चमक रहे हैं। बीता हुआ वक्त बदलता नहीं है। और न ही वह कोई कोशिश करता है। वह बस शांति से सो रहा है। उस वक्त की सारी छोटी और बेकार बातें मिट चुकी हैं और जो कुछ भी सुंदर था वह आज भी सितारों की तरह चमक रहा है। जीस इंसान ने अपनी किस्मत को जीत लिया है उसके लिए पुरानी यादें सुकून पानी की चाबी बन जाती है अगर हम बाहर से देखने की कोशिश करें। तो इंसान की जिंदगी नेचर की ताकतों के सामने बहुत छोटी सी चीज़ है। जो लोग मन से गुलाम होते हैं, वे वक्त किस्मत और मौत की पूजा करने पर मजबूर होते हैं। उन्हें लगता है कि ये ताकतें उनसे बहुत बड़ी हैं। और 1 दिन उनकी हर प्यारी चीज़ को मिटा देंगे। लेकिन भले ही ये ताकतें कितनी भी बड़ी क्यों न हो, इनके बारे में हिम्मत से सोचना और इनकी शक्ति को महसूस करना इनसे भी कहीं ज्यादा बड़ा काम है। यही सोच हमें एक। आजाद इंसान बनाती है। फिर हम किसी डर की वजह से नहीं

झुकते बल्कि सच को खुशी खुशी मान लेते हैं और उसे अपनी ज़िन्दगी का हिस्सा बना लेते हैं। अपनी खुद की छोटी छोटी खुशियों के पीछे भागना छोड़ देना। अपने मन से लालच को निकाल देना और उन अच्छी चीजों से जुड़ना जो हमेशा रहने वाली है, यही असली आजादी है। एक आजाद इंसान की यही सच्ची पूजा है। यह आजादी हमें तब मिलती है जब हम किस्मत के सच को गहराई से समझते हैं। जब हमारा दिमाग इतना साफ और मजबूत हो जाता है कि उस पर वक्त की मार का कोई असर नहीं होता, तब किस्मत खुद हमारे काबू में आ जाती है। हम सब इंसान एक ही डोरी से बंधे हैं और वह डोरी है। मौत। हम सब को एक ना 1 दिन जाना ही है। एक आजाद इंसान को जब यह बात समझ जाती है तो उसे हर तरफ प्यार नजर आने लगता है। वह अपने रोज़ के हर काम को प्यार के साथ ही करता है। इंसान की ज़िन्दगी रात के अंधेरे में एक लंबी पैदल यात्रा की तरह है। इस रास्ते में चारों तरफ छिपे हुए दुश्मन है, बहुत थकान है और दर्द भी है। हम सब एक ऐसी मंजिल की तरफ बढ़ रहे हैं। यहाँ पहुंचना बहुत मुश्किल है। और वहाँ कोई भी ज्यादा देर तक रुक नहीं सकता जैसे जैसे हम आगे बढ़ते हैं हमारे साथ ही एक एक करके हमारी आँखों से ओझल हो जाते हैं क्योंकि मौत उन्हें चुपचाप अपने साथ ले जाती है। हमारे पास बहुत कम समय है। जिसमें हम अपने साथियों की मदद कर

सके या उनकी खुशियों का ख्याल रख सके। इसलिए हमारा काम यह होना चाहिए कि हम उनके रास्ते में उजाला भर दे। हम अपनी हमदर्दी से उनके दुखों को कम करें और उन्हें ढेर सारा प्यार दे। जब उनकी हिम्मत टूटने लगे या वे मायूस हों तो हमें उनमें फिर से भरोसा जगाना चाहिए। हमें तराजू लेकर यह नहीं नापना चाहिए कि कौन कितना अच्छा है और कौन कितना बुरा। हमें बस उनकी जरूरत के बारे में सोचना चाहिए। उनके दुःख, उनकी मुश्किलें और उनकी गलतियों को समझना चाहिए। हमें याद रखना चाहिए कि वे भी हमारी तरह इसी अंधेरे में सफर कर रहे हैं और हम सब एक ही दुख भरी कहानी का हिस्सा हैं जब उनका सफर खत्म हो जाए। और वे बीता हुआ वक्त बन जाए तब हमें यह महसूस होना चाहिए कि उनके किसी भी दुख या हार की वजह हम नहीं थे, बल्कि जब भी उनके दिल में कोई अच्छी उम्मीद जागी, हम उन्हें हिम्मत देने और अच्छी बातें सीखाने के लिए हमेशा उनके साथ खड़े थे। इंसान की जिंदगी बहुत छोटी और बेबस है। एक ना 1 दिन हम सबको और हमारे पूरे मानव वंश को खत्म होना ही है। यह मौत का अंधेरा बहुत पक्का और बेरहम है। यह दुनिया और इसके नियम अंधे हैं। उन्हें सही और गलत की कोई समझ नहीं है। यह बेजान दुनिया बस अपने रास्ते पर चलती रहती है और इससे किसी के टूटने या खत्म होने से कोई फर्क नहीं पड़ता।

आज इंसान अपने सबसे प्यारे लोगों को खो देता है। और कल उसे खुद भी उसी अंधेरे के दरवाजे से गुजरना होगा। इसलिए जब तक मौत का वार हम पर नहीं होता, हमें क्या करना चाहिए? हमें बस अपने दिल में बड़े और अच्छे विचार पालने चाहिए। जो हमारी छोटी सी ज़िन्दगी को महान बना सके। हमें किस्मत के डर को गुलामों की तरह डरकर नहीं जीना चाहिए। हमें उस मंदिर की पूजा करनी चाहिए जिसे हमने खुद अपनी अच्छाई से बनाया है। बाहर की दुनिया भले ही हमारे साथ जुल्म करे। पर हमारा मन हमेशा याद रहना चाहिए। दुनिया की बेजान ताकतें हमें कुचलने की कोशिश करेंगी। लेकिन हमें एक बहादुर सिपाही की तरह डटे रहना है, भले ही हम थक जाये। पर हमें अपने सोच वाले दुनिया को टूटने नहीं देना है। यही इंसान की असली जीत है। आज के लिए बस इतना ही हम फिर मिलेंगे आपसे एक नए एपिसोड में एक नए टॉपिक के साथ मेरा नाम है रोहित और आप सुन रहे थे सिलेबस विथ रोहित, धन्यवाद।

Transcript supplied by the publisher with the episode.

SyllabuswithRohit

by SyllabuswithRohit · Hindi · Learning

My channel covers a variety of subjects—books, stories, and more, all in Hindi. I share knowledge, ideas, and learning beyond the syllabus. For new episodes, please visit: https://www.youtube.com/@SyllabuswithRohit

More from SyllabuswithRohit

  1. 22 Jun 2026 · 49 min

    The Prologue to Friedrich Nietzsche’s Thus Spoke Zarathustra

    The Prologue to Friedrich Nietzsche’s Thus Spoke Zarathustra is not merely an introduction; it is a self-contained philosophical masterpiece that lays the groundwork for one of the most profound and challenging works of modern thought. It opens with a powerful image of isolation and abundance: Zarathustra, having spent ten years in the mountains, realizes that his wisdom has grown too vast to contain. Like a cup that must overflow or a sun that must set to share its light, he resolves to "go under" (descend) and bring his revelations to humanity. This descent marks the beginning of a…

  2. 21 Jun 2026 · 1 hr 5 min

    Is Life Worth Living? (Hindi/हिंदी में)

    Around fifteen years ago, when Mr. Mallock published a book with this title, a popular joke claimed that the answer "depends upon the liver." But tonight, my answer will not be a joke. To echo Shakespeare, I am not here to entertain you. These reflections are heavy and serious, carrying profound pain and truth. Let us set aside the world's superficial glamour for an hour and dive into the depths of our minds to confront the real questions we so often ignore.The Illusion of Constant OptimismFor many, the value of life is found in their innate, unshakeable optimism. Walt Whitman: A living…

  3. 20 Jun 2026 · 1 hr

    Mean Genes

    Mean Genes: From S*x to Money to Food, Taming Our Primal Instincts, authored by Terry Burnham and Jay Phelan, is a fascinating cross-disciplinary look at the biological roots of modern human struggle. Published in 2000, it remains a cornerstone of popular evolutionary psychology. The book’s central premise is that our bodies and brains are "running on software" designed for a world that no longer exists—the Pleistocene era.While civilization has advanced at lightning speed, our genes change at a glacial pace. This "mismatch" creates a tug-of-war between our primal instincts (which want us to…

  4. 18 Jun 2026 · 4 hr 17 min

    Krishnamurti to Himself (Hindi/हिंदी में)

    This unique collection represents the final spontaneous recordings of J. Krishnamurti. Recorded in the solitude of his home, these entries are not formal lectures but intimate dialogues with himself. At the age of eighty-seven, finding it difficult to write by hand, he used a recorder to capture his morning reflections on nature, the crisis of human consciousness, and the beauty of a mind in total silence.00:00:00 Introduction Ojai CaliforniaKrishnamurti returns to Ojai to record solitary reflections on the nature of thought, his nearing end, and his lifelong mission to help humanity…

  5. 17 Jun 2026 · 1 hr 9 min

    The Status Syndrome (Hindi/हिंदी में)

    In his influential work, The Status Syndrome, Sir Michael Marmot challenges the conventional wisdom that health is primarily a matter of genetics or personal choices. Instead, he argues that our position on the social hierarchy is the single most important factor in determining how long we live and what diseases we suffer from. This is not just about the difference between the very rich and the very poor. It is about a "social gradient" where, at every step down the ladder, health worsens and life expectancy drops.The Social Gradient and the Whitehall StudiesThe foundation of Marmot's theory…

  6. 16 Jun 2026 · 18 min

    Kafan (short story)

    "Kafan" (1936) is widely considered Munshi Premchand’s last and most famous short story. Moving away from his earlier idealistic portrayals of village life, "Kafan" is a brutal, cynical, and dark exploration of human psychology under the crushing weight of extreme poverty. It tells the story of two men who have been stripped of their dignity and humanity by a lifetime of hunger and social apathy.The Setting and The "Anti-Heroes"The story introduces us to Ghisu (the father) and Madhav (the son), two members of a lower-caste family sitting outside their hut on a cold, dark night. Inside the…

  7. 5 Jul 2026 · 5 hr 37 min

    Demian (Hindi/हिंदी में)

    Published in 1919 under the pseudonym "Emil Sinclair," Demian is far more than a standard coming-of-age story. It is a feverish, introspective, and philosophical exploration of the human soul. Written by Hermann Hesse during a period of deep personal crisis and psychoanalysis (under a disciple of Carl Jung), the novel serves as a guide for anyone struggling to reconcile societal expectations with their own inner truth.It is a Bildungsroman (a novel of education/formation) that moves away from the physical world of action and adventure, diving instead into the turbulent waters of the…

  8. 4 Jul 2026 · 1 hr 23 min

    How to Change Your Mind (Hindi/हिंदी में)

    In his 2018 masterpiece, How to Change Your Mind: What the New Science of Psychedelics Teaches Us About Consciousness, Dying, Addiction, Depression, and Transcendence, Michael Pollan performs a remarkable feat of cultural alchemy. He takes a subject long relegated to the fringes of "hippie" counterculture and places it firmly within the realm of rigorous science, clinical medicine, and profound philosophical inquiry. The book is structured as a "mental travelogue," blending meticulous historical research with cutting-edge neuroscience and Pollan’s own transformative experiences as a…

  9. 3 Jul 2026 · 1 hr 9 min

    On the Shortness of Life (Hindi/हिंदी में)

    Seneca was a Roman thinker and a leader in the Stoic school. He wrote a short work called On the Shortness of Life. It is a letter to a man named Paulinus. But it also feels like a letter to us. The claim is bold and simple: life is not too short; we just waste most of it. This line sounds sharp. Yet the essay is warm. It gives us a way to use time well.Seneca starts by naming the problem. People say there is not enough time. They rush. They groan. They blame fate. Seneca says the fault is ours. We “are not given a short life but make it so.” Many fill their days with work that is not their…

  10. 2 Jul 2026 · 50 min

    Enchiridion (Hindi/हिंदी में)

    Epictetus wrote a small book called Enchiridion—meaning “manual,” or a sort of practical guide. This little text has had a profound impact on modern thought and philosophy. When it was translated into everyday language, it quickly became popular, especially among those who thought for themselves, those who challenged the Church, and those who valued their own inner life. Montaigne owned a copy. Pascal disliked the pride of Stoic philosophers. Frederick the Great carried it with him to every battle. When Anthony, Earl of Shaftesbury, was gravely ill, this book gave him strength and courage,…

Every episode of SyllabuswithRohit →

Take it with you

The Melo app keeps playing with the screen off, works in the car and on your watch, wakes you to your station, and browses the whole catalogue offline. Free, no ads, no account.

Get it on Google Play